देश के महानगरों में युवाओं के लिए फ्लेट ढूंढना किसी जंग से कम नहीं है. यहां लैंडलॉर्ड की डिमांड्स की एक लंबी लिस्ट पर खरा उतरना पड़ता है. कई शर्तें माननी पड़ती हैं और मोटी रकम देने के बाद कहीं डील होती है. और उसके बाद आप बनते हैं बैचलर टेनेंट. जी हां, बैचलर टेनेंट्स. ये शब्द दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में किसी श्राप से कम नहीं है. देखिए ये रिपोर्ट