अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ताजा हालात की जानकारी दी है। यह जलडमरूमध्य अमेरिका और इजरायल के हमलों के कारण लंबे समय तक बंद रहा है। अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज को फिर से खोला गया है। ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में होर्मुज से होकर करीब 34 जहाज गुजरे हैं।

होर्मुज को बंद करेगा ईरान?
सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने एक सूत्र के हवाले से बताया, ईरान केवल अपनी व्यवस्थाओं के तहत ही जलडमरूमध्य को फिर से खोलेगा, जैसा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) में तय किया गया है। सूत्र ने आगे कहा कि अमेरिका के किसी भी हमले के जवाब में ईरान कम से कम दोगुने लक्ष्यों पर हमला करेगा। सूत्र ने बताया, “पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम से पता चलता है कि ईरान होर्मुज नदी के प्रबंधन से पीछे नहीं हटेगा।”
ईरान बोला- करारा जवाब देंगे
इस बीच एक अनाम ईरानी अधिकारी ने कहा है कि किसी भी खतरे का करारा जवाब दिया जाएगा। उस ने कहा कि शासन अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के बीच कोई भेद नहीं करता है। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ दी गई धमकियों का सीधा जवाब देते हुए कहा कि ऐसी धमकियां देने से उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होगा। अधिकारी ने आगे कहा कि वह (ट्रंप) निश्चित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और अंतिम समझौते पर बातचीत दोनों में हार जाएंगे। अब फैसला उनका है।”
ईरानी सेना के 8 जवानों की मौत
ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार तड़के दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों में ईरानी सेना के आठ जवान मारे गए। इसमें आगे कहा गया है कि मारे गए सैनिक वायुसेना और नौसेना से संबंधित थे और बंदर अब्बास और बुशहर में हुए हमलों के कारण उनकी मृत्यु हुई। इस बीच नाटो शिखर सम्मेलन के बाद बुधवार को तुर्की के अंकारा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह “शायद आज रात ईरान पर हमला करेंगे”। ट्रंप ने कहा, “मैं थोड़ी चेतावनी दे रहा हूं। हम आज रात उन पर कड़ा प्रहार करने वाले हैं।”
होर्मुज के बंद होने से भारत को कितना नुकसान
- भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी ज्यादा निर्भर है।
- यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक हितों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
- भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% से अधिक कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते आयात करता है।
- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, ईरान और कतर से आने वाला तेल और गैस का बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर ही गुजरता है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते में किसी भी रुकावट के आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटा पर पड़ता है।
