संभल का ₹101 करोड़ का वो ‘सरकारी खेल’, जहां घोटाले की जमीन पर खड़ा हुआ अरबों का साम्राज्य!


सौरव प्रजापति, संभल। मुरादाबाद रोड पर स्थिति शहजादी सराय ग्राम पंचायत की 101 करोड़ की कीमत वाली 38 बीघा जमीन पर वर्तमान में करोड़ों रुपये की लागत से स्ट्रक्चर खड़े हैं। एक तरफ मेंथा फैक्ट्री का भवन है। जिसकी कीमत लगभग डेढ़ करोड़ से अधिक है। इसी के बराबर में धर्म कांटा भी संचालित है जो, 20 लाख से ज्यादा का बताया जा रहा है।

इतना ही नहीं सड़क की दूसरी तरफ पूर्व चेयरमैन हाजी नूसरत इलाही के भतीजे शारिक द्वारा खरीदी गई भूमि पर भी निर्माण है। वहां पर चिलिंग प्लांट चला, गत्ते की फैक्ट्री चली, फिर मुर्गी पालन हुआ और अब बकरी पालन किया जा रहा है।

कुल मिलाकर घोटाले की जमीन पर करोड़ों रुपये लगाकर आरोपितों ने स्ट्रक्चर खड़े किए और उनमें अरबों रुपये का कारोबार संचालित किया। हालांकि वर्तमान स्थिति में सभी निर्माणों पर कारोबार नहीं हो रहा था।

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शासन ने 11 अगस्त 1954 को गजट जारी कर ग्राम तश्तपुर गोसाईं की लगभग 38 बीघा जमीन गैरआबाद घोषित करते हुए इसका प्रबंधन नगर पालिका परिषद संभल को सौंप दिया गया था। सन् 1967 में जमीन का पट्टा तत्कालीन चेयरमैन चिरंजीलाल ने सईदुल रहमान के नाम करा दिया था।

वर्ष 1995 में गांव चकबंदी प्रक्रिया में आया। 1997 में सईदुल ने जमीन अपनी करने का आवेदन किया। वहीं, क्षेत्र के ही अमीरचंद्र ने भी जमीन पर दावा किया। साल दर साल विभिन्न प्रक्रिया के बीच 15 फरवरी 2008 को तत्कालीन उपसंचालक चकबंदी खेम सिंह खड़क ने सईदुल के पक्ष में आदेश किया।

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उनके तबादले के बाद वर्ष नगर पालिका परिषद ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। इस समय हाजी नुसरत चेयरमैन थे। उच्च न्यायालय में प्रक्रिया विचाराधीन थी। वर्ष 2013 में तत्कालीन चेयरमैन हकीम कौसर के इशारे पर ही ईओ राजकुमार गुप्ता ने याचिका वापस ले ली थी।

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इसी दौरान सईदुल रहमान और उसकी मौत के बाद उत्तराधिकारियों ने भूमि का अधिकांश भाग अन्य व्यक्तियों को बेच दिया था। तीन जून 2026 को जिला शासकीय अधिवक्ता ने पुनरीक्षण प्रार्थना पत्र उपसंचालक चकबंदी (अपर जिलाधिकारी न्यायिक) के समक्ष प्रस्तुत किया।

सुनवाई के बाद उपसंचालक चकबंदी ओमप्रकाश अंजोर ने पाया कि तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष को इस प्रकार का पट्टा देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। उन्होंने पूर्व के आदेश निरस्त किए। जिसके बाद 27 जून को प्रशासन ने जगह पर वापस कब्जा ग्राम सभा को सौंपा था।

प्रकरण में 29 जुलाई को तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता, रिटायर्ड मानचित्रक शहाबुद्दीन, पैरोकार मजीद खान, तत्कालीन चकबंदी उपसंचालक खेम सिंह खड़क, सईदुल हसन के बेटे इबादुर रहमान खान, एहसानुर रहमान खान, शाहजहां बेगम सहित 32 लाेगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ।

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तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मंगलवार को ग्राम पंचायत के प्रधान कुंवरपाल की शिकायत पर तहसील प्रशासन ने जमीन पर काबिज पर सभी भवनों पर सील लगा दी थी। लेखपाल स्पर्श गुप्ता का मानना है कि करोड़ों रुपये के निर्माण बने हुए हैं।

जो, इस फर्जीवाड़े के बाद ही बने हैं। यहां पर बनी मेंथा फैक्ट्री हाल ही में बंद हुई है। धर्मकांटा अभरी चल रहा है। उधर, सड़क दूसरी तरफ बने भवन में बकरी पालन किया जा रहा है। पूर्व में कई कारोबार बदल चुके हैं। देखा जाएं तो अरबों रुपये यहां पर कारोबार से कमाए जा चुके हैं।

 

संभल में मुरादाबाद मार्ग पर स्थित ग्राम सभा की भूमि पर बने निर्माणों का इतिहास खंगाला जा रहा है। कितने समय पहले बने और क्या-क्या कारोबार वहां पर किया गया है। डेटा जुटाने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

– अंकित खंडेलवाल, डीएम, संभल।


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