कानून के हाथ बड़े लंबे होते हैं: 13 साल से आठवीें कक्षा की फर्जी अंकसूची के सहारे नौकरी कर रहे जीएसटी के दो कर्मचारी बर्खास्त


राज्य जीएसटी विभाग ने फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले दो कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है। 2013 की भृत्य भर्ती में किशोर पटेल और भाग…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 09:23:35 AM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 09:26:44 AM (IST)

कानून के हाथ बड़े लंबे होते हैं: 13 साल से आठवीें कक्षा की फर्जी अंकसूची के सहारे नौकरी कर रहे  जीएसटी के दो कर्मचारी बर्खास्त
फर्जीवाड़े का प्रतीकात्मक विजुअल। अर्काइव

HighLights

  1. जीएसटी विभाग के दो कर्मचारी बर्खास्त
  2. आठवीं की फर्जी मार्कशीट से नौकरी
  3. पदोन्नति के बाद विभाग ने कार्रवाई की।

राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। कहते हैं न कि कानून के हाथ बड़े लंबे होते हैं। यही बात सच हुई। आठवीं कक्षा की फर्जी मार्कशीट के सहारे जीएसटी विभाग में 13 साल से नौकरी करने वाले दो लोगों को विभाग ने मामला सामने आने के बाद बर्खास्त कर दिया है। दोनों की पदोन्नति के बाद मामले का राज खुला।

जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने मंगलवार को किशोर पटेल और भागवत पटेल की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश जारी किए। दोनों पर वर्ष 2013 की भृत्य भर्ती में कक्षा आठवीं की कथित फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर नौकरी पाने का आरोप था। बाद में दोनों की पदोन्नति सहायक ग्रेड तीन के पद पर हुई थी।

96 प्रतिशत की फर्जी मार्कशीट पेश की

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भर्ती के दौरान दोनों अभ्यर्थियों किशोर पटेल और भागवत पटेल ने कक्षा आठवीं में 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाने वाली अंकसूची पेश की थी, जिसके आधार पर उनका चयन हुआ। मामला तब सामने आया जब शिकायतकर्ताओं ने संबंधित विद्यालय के परीक्षा परिणाम पंजी के आधार पर अंकसूचियों की सत्यता पर सवाल उठाए।

अबसेंट परीक्षार्थियों के रोल नंबर से किया फर्जीवाड़ा

सूचना के अधिकार (आरटीआइ) से प्राप्त दस्तावेजों में यह भी आरोप सामने आया कि समतुल्यता परीक्षा में अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर का उपयोग कर फर्जी अंकसूचियां तैयार की गई थीं। शिकायत के बाद जीएसटी विभाग ने दस्तावेजों का सत्यापन कराया था। प्रारंभिक रिपोर्ट में अंकसूचियां सही बताई गईं, लेकिन बाद में विधानसभा में मामला उठने के बाद जांच तेज हुई और अंततः दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया।

शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं

कार्रवाई के बाद भी कई सवाल बने हुए हैं। आरोप है कि जिन शिक्षा अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेजों के सत्यापन और कथित संरक्षण का आरोप है, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि ऐसे मामलों में बर्खास्तगी के साथ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का भी प्रविधान है, लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।



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