जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में मध्य जिला के हौज काजी थाना पुलिस ने सिविक सेंटर स्थित आयकर विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है।
इस मामले में पुलिस ने गिरोह के तीन शातिर आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें आयकर विभाग का एक पूर्व एमटीएस कर्मचारी भी शामिल है। यह गिरोह बेरोजगार युवाओं को जाल में फंसाकर अब तक 6-7 लोगों से करीब 10 लाख रुपये की ठगी कर चुका है।
पुलिस ने इनके पास से फर्जी वेरिफिकेशन फॉर्म, पीड़ितों के दस्तावेज और वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
नौकरी दिलाने का दिया था भरोसा
इस मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब अजमेरी गेट के रहने वाले एक पीड़ित ने 18 मई को हौज काजी थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि नवीन प्रकाश, दीपक तिवारी और रोहित चौहान नाम के व्यक्तियों ने उसे आयकर विभाग में एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था।
कर्मचारी बताकर पीड़ित को फंसाया
दिसंबर 2025 में आरोपित नवीन प्रकाश ने खुद को इनकम टैक्स का कर्मचारी बताकर पीड़ित को जाल में फंसाया। इसके बाद उसने दीपक तिवारी से मिलवाया, जिसने अजमेरी गेट के एक मंदिर के पास पीड़ित से 5,000 नकद लिए और बाकी के पैसों के लिए रोहित चौहान का बैंक खाता नंबर दे दिया।
झांसे में आकर पीड़ित ने अपने पीएफ की सारी जमा पूंजी 1,98,500 डिजिटल ट्रांसफर कर दिए। कुल मिलाकर पीड़ित से 2,03,500 ठग लिए गए। विश्वास जीतने के लिए आरोपितों ने फर्जी वेरिफिकेशन फॉर्म का भी इस्तेमाल किया, लेकिन मार्च के बाद वे गायब हो गए।
पुलिस ने इस संबंध में बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश इंस्पेक्टर संदीप कालखांडे को सौंपी।
टीम गठित की गई
वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह के निर्देश पर हौज काजी के एसएचओ और एसीपी कमला मार्केट की देखरेख में इंस्पेक्टर संदीप कालखांडे, एसआई अभिषेक, पीएसआई विवेक ग्रेवाल, हेड कॉन्स्टेबल माटू राम और कॉन्स्टेबल गणेश, हरेंद्र व ए.बी. सिंह की एक विशेष टीम बनाई गई।
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बताया गया कि तकनीकी सर्विलांस, कॉल रिकॉर्ड्स और बैंक खातों की जांच के बाद पुलिस ने जाल बिछाया। सबसे पहले 3 जुलाई को रोहित चौहान उर्फ दीपक तिवारी को रोहिणी से दबोचा गया। उसकी निशानदेही पर गिरोह के अन्य सदस्यों चिराग अग्रवाल उर्फ नवीन प्रकाश और तरुण गोस्वामी उर्फ गिरिराज को भी गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं एक अन्य आरोपी पवन दत्त शर्मा को बाउंड डाउन (पूछताछ के लिए पाबंद) किया गया है।