इस फैसले से भारत में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की लागत कम होगी. हालांकि इससे कंपनियों की कमाई पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जो कंपनियां पहले से इन क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं, उन्हें राहत मिल सकती है और लंबे समय में मुनाफा बढ़ने की संभावना है.
बैटरी स्टॉक्स
Image Credit: Canva, tv9
केंद्र सरकार ने बैटरी, डिस्प्ले और स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी और प्रमुख कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट का दायरा बढ़ा दिया है. इस फैसले से भारत में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की लागत कम होगी. हालांकि इससे कंपनियों की कमाई पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जो कंपनियां पहले से इन क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं, उन्हें राहत मिल सकती है और लंबे समय में मुनाफा बढ़ने की संभावना है.
कस्टम ड्यूटी छूट का दायरा बढ़ा
- केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने नई अधिसूचना जारी कर लिथियम आयन बैटरी, डिस्प्ले असेंबली और स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल से जुड़ी मशीनरी और कंपोनेंट्स पर ड्यूटी में राहत दी है.
- सबसे बड़ा बदलाव बैटरी निर्माण से जुड़ा है. पहले जहां सीमित मशीनों पर रियायती कस्टम ड्यूटी मिलती थी, अब इसे बढ़ाकर 85 तरह की मशीनों तक कर दिया गया है. इसमें पाउडर तैयारी, स्लरी मिक्सिंग, कोटिंग, कैलेंडरिंग, स्लिटिंग, इलेक्ट्रोड स्टैकिंग, इलेक्ट्रोलाइट फिलिंग, लेजर वेल्डिंग, टेस्टिंग, पैकेजिंग और अन्य पूरी उत्पादन प्रक्रिया शामिल है. साथ ही सॉल्वेंट रिकवरी, हीट रिकवरी, डस्ट कलेक्शन और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम जैसी सहायक मशीनें भी इस राहत के दायरे में आ गई हैं.
- सरकार ने ऑटोमोबाइल, मेडिकल और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाली डिस्प्ले असेंबली के पांच प्रमुख कंपोनेंट्स पर भी ड्यूटी छूट जारी रखी है. हालांकि मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, टीवी, स्मार्ट मीटर और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल के डिस्प्ले इस छूट में शामिल नहीं हैं.
- इसके अलावा स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल में इस्तेमाल होने वाले छह प्रमुख कंपोनेंट्स जैसे नैनोक्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, पीईटी लाइनर, पीसी शिम, कॉइल और नियोडिमियम मैग्नेट पर भी रियायती कस्टम ड्यूटी का लाभ मिलेगा.
बैटरी और ईवी सेक्टर की कंपनियों को फायदा
Exide Industries बेंगलुरु में अपनी सब्सिडियरी कंपनी के जरिए लिथियम आयन सेल गीगाफैक्ट्री स्थापित कर रही है. बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी पर ड्यूटी राहत मिलने से कंपनी के पूंजीगत खर्च में कमी आएगी और लागत घट सकती है.
Amara Raja Energy & Mobility आंध्र प्रदेश में लिथियम आयन सेल निर्माण के लिए गीगा कॉरिडोर तैयार कर रही है. स्लरी मिक्सिंग, सेल असेंबली और इलेक्ट्रोड निर्माण जैसी मशीनों के आयात पर कम ड्यूटी से कंपनी की विस्तार योजनाओं को मजबूती मिलेगी.
EMS कंपनियों को मिल सकती है बढ़त
Dixon Technologies मोबाइल फोन के अलावा डिस्प्ले और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण में तेजी से विस्तार कर रही है. डिस्प्ले से जुड़े कंपोनेंट्स और मशीनरी पर राहत मिलने से इन कारोबारों की लागत कम हो सकती है और भविष्य की परियोजनाओं को फायदा मिलेगा.
Syrma SGS Technology ऑटो और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए डिस्प्ले आधारित सब-असेंबली तैयार करती है.
स्मार्टफोन कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों पर नजर
Kaynes Technology इलेक्ट्रॉनिक सब-असेंबली और स्मार्टफोन कंपोनेंट्स के कारोबार का विस्तार कर रही है. वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स पर ड्यूटी राहत मिलने से लागत घट सकती है और मार्जिन बेहतर हो सकते हैं.
Avalon Technologies भी विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक सब-असेंबली बनाती है. यदि कंपनी वायरलेस चार्जिंग सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती है तो इस राहत का अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है.
बैटरी केमिकल कंपनियों को भी मिल सकता है फायदा
Neogen Chemicals लिथियम आयन बैटरी में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रोलाइट और विशेष केमिकल बनाती है. हालांकि राहत सीधे केमिकल पर नहीं है, लेकिन बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ने से इनके उत्पादों की मांग बढ़ सकती है.
Himadri Speciality Chemical बैटरी के लिए एडवांस्ड कार्बन मटेरियल और एनोड ग्रेड उत्पाद तैयार करती है. भारत में बैटरी निर्माण बढ़ने से कंपनी के उत्पादों की मांग में भी तेजी आने की संभावना है.
इसे भी पढ़ें- नहीं थम रही इस स्टॉक में तेजी, 6 महीने में 52% भागे शेयर, आशीष कचोलिया ने भी लगाया है पैसा
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
Follow us on social media