Modi-Albanese Nuclear Deal: भारत को मिलेगा Australia का Uranium, क्यों है इतना अहम
Modi-Albanese Nuclear Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच लंबे समय से लंबित नागरिक परमाणु सहयोग (Civil Nuclear Cooperation) को आखिरकार नई रफ्तार मिल गई है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ हुई शिखर वार्ता में दोनों देशों ने यूरेनियम निर्यात को लागू करने के लिए प्रशासनिक समझौते (Administrative Arrangement) पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही एक दशक से अधिक समय से अटका समझौता अब जमीन पर उतरने की दिशा में बढ़ गया है।

भारत तेजी से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वच्छ और विश्वसनीय स्रोतों पर जोर दे रहा है। देश ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए यूरेनियम की लगातार उपलब्धता बेहद जरूरी है।
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है। ऐसे में वहां से मिलने वाली स्थिर आपूर्ति भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती दे सकती है और कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नागरिक परमाणु सहयोग का ढांचा 2014-15 में तैयार हो गया था, लेकिन इसके बाद भी यूरेनियम निर्यात शुरू नहीं हो पाया। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत का परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य न होना और यूरेनियम के शांतिपूर्ण उपयोग को लेकर ऑस्ट्रेलिया की चिंताएं थीं।
अब दोनों देशों ने आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम केवल भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में ही इस्तेमाल होगा और यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगा।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया की यह साझेदारी रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चीन को भी जाएगा बड़ा संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। दोनों देश पहले से ही क्वाड (Quad) जैसे मंचों पर साथ काम कर रहे हैं और अब यह साझेदारी और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
भारत को क्या होगा फायदा?
- परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए यूरेनियम की स्थिर आपूर्ति मिलेगी।
- स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है।
- ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी भी मजबूत होगी।
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भू-राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के बीच हुआ यह समझौता केवल यूरेनियम व्यापार तक सीमित नहीं है। यह भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीति जैसे कई अहम आयाम शामिल हैं। आने वाले वर्षों में यह समझौता भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक रणनीतिक भूमिका-दोनों को नई दिशा दे सकता है।