ऐसी किस्मत…एक दिन की पक्की सरकारी नौकरी, नियुक्ति के अगले दिन ही रिटायरमेंट – nandlal ravani jamtara jharkhand resident gets permanent job of government school teacher a day before retirement


Jamtara: पक्की सरकारी नौकरी हर किसी के किस्मत में नहीं होती। मगर, यह नौकरी अगर 24 घंटे की ही हो तो इसे आप क्या कहेंगे? एक व्यक्ति के साथ कुछ ऐसा ही हु।

Nandlal Ravani Teaching job Jharkhand
नंदलाल रवानी, टीचर झारखंड
रांची: अब इसे क्या कहेंगे। यह किस्मत ही तो है कि सरकारी नौकरी तो मिली, मगर वो भी एक दिन के लिए। अब इस टीचर की कहानी पढ़कर आप भी भावुक हो उठेंगे। यह असली कहानी है नंदलाल रवानी की है। नंदलाल को पक्की टीचिंग जॉब का लंबा इंतजार रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले खत्म हुआ। जानते हैं नंदलाल की कहानी, जो आपको भी भावुक कर देगी।

60 साल का होने से एक दिन पहले मिली नौकरी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड के जामताड़ा के रहने वाले नंदलाल को 60 साल के होने से एक दिन पहले सोमवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से असिस्टेंट टीचर के तौर पर नियुक्ति पत्र मिला।

मैंने पूरी जिंदगी पक्की नौकरी का इंतजार किया और वह भी रिटायरमेंट के ठीक पहले मिली।

नंदलाल रवानी

नंदलाल बोले-रिटायरमेंट से पहले मिली पक्की नौकरी

नंदलाल ने कहा, ‘मैंने पूरी जिंदगी पक्की नौकरी का इंतजार किया और वह भी रिटायरमेंट के ठीक पहले मिली।’ वे 2006 से पैरा टीचर के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने 2016 में झारखंड टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास किया था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया 2023 में शुरू हुई और नियुक्तियां इस साल पूरी हुईं।

पलामू के नईम को 1 महीने पहले मिली थी नौकरी

नंदलाल ऐसे सिस्टम से परेशान होने वाले अकेले नहीं हैं। पलामू के नईम अंसारी 31 मई को रिटायर हो गए, जबकि उन्हें नियुक्ति पत्र रिटायरमेंट से एक महीने पहले मिला। राजेंद्र विश्वकर्मा, जिन्होंने भी 2016 में TET पास किया था, उन्हें नौकरी में सिर्फ तीन साल मिलेंगे। मई में हुई एक और नियुक्ति सेरेमनी में, कई लोगों ने कहा कि वे रिटायरमेंट के बहुत करीब थे।

झारखंड प्राइमरी टीचर संघ ने भर्ती में देरी को ठहराया जिम्मेदार

झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष अमित महतो ने भर्ती में देरी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि समय पर नियुक्ति होने से ऐसे मामले नहीं होते। राज्य पैरा टीचरों के लिए 50% पद आरक्षित करता है, जिसमें 58 साल तक की उम्र में छूट मिलती है।

झारखंड में अब भी 39 हजार पद खाली

  • स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सेक्रेटरी उमा शंकर सिंह ने कहा कि भर्ती सिर्फ़ उन कैंडिडेट्स के लिए थी जिन्होंने 2016 का TET पास किया था और इसे चरणों में पूरा किया गया।
  • उन्होंने बताया कि नया ‘सहायक आचार्य कैडर’ बनने के बाद 26,000 पदों में से लगभग 11,000 पद भरे गए हैं। हालांकि, पूरे झारखंड में टीचिंग के लगभग 39,000 पद अभी भी खाली हैं।

दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें