नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ खिलाड़ी ऐसे हुए हैं जिन्होंने खेल को सिर्फ खेला नहीं, बल्कि उसे एक नई पहचान और नया आत्मसम्मान दिया. आज यानी 10 जुलाई को भारत के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक, सुनील मनोहर गावस्कर का जन्मदिन है. 10 जुलाई 1949 को जन्मे गावस्कर को उनकी तकनीकी सटीकता, अद्वितीय एकाग्रता और पिच पर चट्टान की तरह डटे रहने के मजबूत संकल्प के लिए जाना जाता है. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के सबसे साहसी और मजबूत सलामी बल्लेबाजों में शुमार गावस्कर का भारतीय क्रिकेट में योगदान अतुल्नीय है. उन्होंने उस दौर में दुनिया के सबसे खतरनाक और खूंखार तेज गेंदबाजों, विशेषकर वेस्टइंडीज के घातक पेस अटैक का सामना बिना हेलमेट पहने किया. अपनी इसी निडरता के दम पर वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 10,000 रनों का जादुई आंकड़ा छूने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने.
सुनील गावस्कर वर्ल्ड क्रिकेट में लिटिल मास्टर के नाम से जाने गए.
सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने कैरेबियाई, अंग्रेज, ऑस्ट्रेलियाई और पाकिस्तानी गेंदबाजों के सामने दिनों-दिन पिच पर संघर्ष किया ताकि भारतीय टीम को मजबूती से खड़ा रख सकें. उन्होंने वैश्विक मंच पर भारतीय क्रिकेट के प्रति दुनिया का नजरिया बदला और देश को क्रिकेट जगत में एक बड़ा सम्मान दिलाया. अपने 16 साल के शानदार करियर में उन्होंने 125 टेस्ट मैच खेले और 34 शतकों की मदद से 10,122 रन बनाए, जिससे आगे आने वाली पीढ़ियों के बल्लेबाजों को देश के लिए खेलने की प्रेरणा मिली. एक कप्तान के रूप में भी उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी और भारत को ऑस्ट्रेलिया की धरती पर 1985 की प्रतिष्ठित ‘बेंसन एंड हेजेस विश्व चैंपियनशिप’ जिताई.
सुनील गावस्कर वर्ल्ड क्रिकेट में लिटिल मास्टर के नाम से जाने गए.
क्यों कहलाए गावस्कर ‘लिटिल मास्टर’?
सुनील गावस्कर को भारतीय क्रिकेट का असली और पहला ‘लिटिल मास्टर’ माना जाता है. यह प्रतिष्ठित नाम उन्हें 70 और 80 के दशक में उनकी अद्भुत और कलात्मक बल्लेबाजी के लिए प्रशंसकों और कमेंटेटरों द्वारा दिया गया था. शारीरिक कद में भले ही गावस्कर छोटे थे, लेकिन जब वह अपने चरम पर दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों के सामने क्रीज पर उतरते थे, तो उनके कारनामे आसमान छूते थे. उनकी बेजोड़ तकनीक, मजबूत डिफेंस और शांत स्वभाव के कारण ‘लिटिल मास्टर’ का यह खिताब इस महान खिलाड़ी पर पूरी तरह से खरा उतरा.
करियर के बेमिसाल आंकड़े और ऐतिहासिक उपलब्धियां
अगर आंकड़ों की बात करें, तो गावस्कर ने अपने टेस्ट करियर में खेले 125 मैचों की 214 पारियों में 51.12 की शानदार औसत से 10,122 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से 34 शतक और 45 अर्धशतक निकले. वनडे क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा, जहां उन्होंने 108 मैचों में 35.13 की औसत से 3,092 रन बनाए, जिसमें 27 अर्धशतक और एक शतक शामिल है. शुरुआत में आलोचक गावस्कर को धीमी बल्लेबाजी के कारण वनडे के अनुकूल नहीं मानते थे, लेकिन उन्होंने 1987 के विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ महज 88 गेंदों पर नाबाद 103 रनों की तूफानी पारी खेलकर अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया था.
गावस्कर के नाम कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं. टेस्ट में 10,000 रन का आंकड़ा छूने वाले पहले खिलाड़ी होने के साथ-साथ उन्होंने अपनी डेब्यू (पदार्पण) सीरीज में ही 774 रन बना डाले थे. यह ऐतिहासिक कारनामा उन्होंने 1971 में अपनी पसंदीदा विपक्षी टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ महज 21 साल की उम्र में किया था, जिसने भारत को कैरेबियाई धरती पर पहली बार सीरीज जिताने में मदद की. इसके अलावा, वह महान सर डॉन ब्रैडमैन के 29 टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड को तोड़ने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने. उनके 34 शतकों का विश्व रिकॉर्ड साल 2005 तक कायम रहा, जिसे बाद में महान सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा.
देश के प्रति उनकी महान सेवाओं के लिए भारत सरकार ने 1980 में उन्हें प्रतिष्ठित ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया, जबकि बीसीसीआई ने 2012 में उन्हें ‘कर्नल सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ दिया. साल 1996 में, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट संबंधों को सम्मान देने के लिए दोनों देशों के बोर्ड ने मिलकर ‘बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी’ की शुरुआत की.
सुनील गावस्कर से जुड़े 10 दिलचस्प और अनसुने किस्से
गावस्कर के जीवन और करियर से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने तथ्य हैं, जो उनके खेल की तरह ही बेहद दिलचस्प हैं:
अस्पताल में बच्चे की अदला-बदली: गावस्कर ने खुद एक बार खुलासा किया था कि जन्म के समय अस्पताल के स्टाफ ने गलती से उन्हें एक मछुआरे के बच्चे से बदल दिया था. उनके चाचा ने उनके कान के पास एक खास निशान देखा था, जिसकी वजह से उनकी सही पहचान हो सकी और वह अपने परिवार के पास वापस आ पाए.
पारियों में शतकों का रिकॉर्ड: वह इकलौते ऐसे भारतीय बल्लेबाज हैं जिन्होंने तीन बार एक ही टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक जड़े हैं। इसके साथ ही वह सबसे तेज 5,000 टेस्ट रन बनाने वाले भारतीय भी हैं.
इंग्लैंड में ऐतिहासिक 221 रन की पारी: गावस्कर ने इंग्लैंड की धरती पर शानदार 221 रनों की एक यादगार मैराथन पारी खेली थी, जो भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बेहतरीन और क्लासिक पारियों में गिनी जाती है और इसने विदेशी पिचों पर भारतीयों का लोहा मनवाया.
शतकीय साझेदारियों का रिकॉर्ड: गावस्कर अपने करियर में रिकॉर्ड 58 बार शतकीय साझेदारियों का हिस्सा रहे, और खास बात यह है कि ये साझेदारियां उन्होंने 18 अलग-अलग खिलाड़ियों के साथ कीं.
शानदार फील्डर: वह पहले ऐसे गैर-विकेटकीपर भारतीय खिलाड़ी बने जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 100 से अधिक कैच लपकने का रिकॉर्ड बनाया.
बैट कैरी करने का कारनामा: साल 1983 में पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट में नाबाद 127 रन बनाकर वह टेस्ट मैच में ‘कैरी हिज बैट’ (पूरी पारी में शुरू से अंत तक नाबाद रहने वाले) करने वाले पहले भारतीय बने.
विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर: साल 1980 में प्रतिष्ठित क्रिकेट पत्रिका ‘विजडन’ ने उन्हें साल के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों (Cricketers of the Year) में चुना था.
बॉम्बे के शेरिफ: खेल के अलावा समाज में उनके योगदान को देखते हुए साल 1994 में उन्हें मुंबई (तब बॉम्बे) का शेरिफ नियुक्त किया गया था, जो एक साल का मानद पद होता है.
एमसीसी काउड्रे लेक्चर: साल 2003 में वह प्रतिष्ठित ‘एमसीसी स्पिरिट ऑफ क्रिकेट काउड्रे लेक्चर’ देने वाले पहले और अब तक के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर बने.
बीसीसीआई के अंतरिम अध्यक्ष: साल 2014 में परिस्थितियों की मांग को देखते हुए उन्हें कुछ समय के लिए बीसीसीआई (BCCI) का अंतरिम अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया था.