नई दिल्ली. एक दिन हीरो तो एक दिन जीरो, एक लम्हां अर्श पर तो दूसरे लम्हें फर्श पर ऐसा उतार चढ़ाव सिर्फ क्रिकेट के मैदान पर देखने को मिल सकता है जिसका सबसे ताजा उदाहरण इंग्लैंड में देखने को मिल रहा है. 4 जुलाई को ओल्ड ट्रैफर्ड में वैभव सूर्यवंशी भारत के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बने. इससे पहले उन्होंने आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए 776 रन बनाए थे, वह भी 237 से ज़्यादा के स्ट्राइक रेट से. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की अपनी पहली ही गेंद पर, जो उनके आईपीएल साथी जोफ़्रा आर्चर ने डाली थी, उन्होंने छक्का जड़ दिया. यह एक शानदार और बॉलीवुड वाली ब्लॉकबस्टर शुरुआत थी.
इंग्लैंड में वैभव सूर्यवंशी पर एक्सपर्ट्स की राय, खेलेंगे तभी सीखेंगे, दम है एक दिन सबको दिखेगा
समय का पहिया घूमा और तीन मैच बाद ही तारीफ़ की जगह सवाल उठने लगे हैं. इंग्लैंड के गेंदबाज़ों ने, ख़ासकर आर्चर ने, इस बच्चे की कमज़ोरी पकड़ ली है. भारत में लोग संजू सैमसन को वापस टीम में लाने की मांग कर रहे हैं लेकिन टीम इंडिया को जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए. सूर्यवंशी भारत का भविष्य हैं. उन्हें और मौक़े मिलने चाहिए, उनकी ग़लतियों को सीखने का हिस्सा माना जाना चाहिए, और उन्हें सही कोचिंग दी जानी चाहिए.
बॉडीलाइन बॉलिंग ने बदली कहानी
इंटरनेशनल क्रिकेट बहुत जल्दी किसी भी कमज़ोरी को पकड़ लेता है. भारत की सपाट पिचों से इंग्लैंड की उछाल वाली पिचों पर आने पर सूर्यवंशी की एक ख़ास और बार-बार होने वाली कमज़ोरी सामने आई है. तेज़ उछाल पर उनके हाथ और कोहनी ब्लॉक ब्लॉक हो जाते हैं. हाथ शरीर से चिपके होने की वजह से वह पुल या कट जैसे शॉट खेलने के लिए जगह नहीं बना पाते और गेंद सीधे गर्दन पर आने पर मजबूरी में शॉट खेलते हैं. जितनी जल्दी वह इस आदत से बाहर निकलें, उतना अच्छा होगा. क्रिकेट में ख़बर बहुत जल्दी फैलती है, अब हर गेंदबाज़ उनकी गर्दन को निशाना बनाएगा.
आईपीएल के दौरान सूर्यवंशी राजस्थान रॉयल्स के नेट्स में आर्चर को ख़ूब पीटते थे. साफ़ है कि आर्चर उनकी कमज़ोरी तभी से जानते थे, बस आईपीएल में एक ही टीम में होने की वजह से वह वहाँ उस रणनीति को बचाकर चल रहे थे. अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब दोनों अलग-अलग देशों के लिए आमने-सामने हैं, तो आर्चर ने अपनी उसी पुरानी योजना पर अमल किया और तीन मैच में उन्हें दो बार आउट कर चुके हैं.
आर्चर बनाम सूर्यवंशी: एक जैसी कहानी
इंग्लैंड में वैभव की पहली तीन पारियों में एक जैसा पैटर्न दिख रहा है, अच्छी शुरुआत के बाद वही शॉर्ट-बॉल की दिक़्क़त. पूरी सीरीज़ में सिर्फ़ 25 गेंदों में उन्होंने दुनिया के बड़े गेंदबाज़ों को कई छक्के मारे हैं, जो उनकी क़ाबलियत दिखाता है लेकिन सिर्फ़ आर्चर के ख़िलाफ़ उनका रिकॉर्ड 13 गेंद, 18 रन, दो बार आउट, यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी असली परीक्षा कहां हो रही है. कॉमेंट्री कर रहे नासिर हुसैन ने भी उन्हें ख़ारिज नहीं किया. अभिषेक शर्मा से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि टैलेंट के मामले में कोई मुक़ाबला ही नहीं है, सूर्यवंशी की कहानी “बड़ी बात” और “अलग लेवल” की है लेकिन मोईन ने यह भी कहा कि इंग्लैंड में छक्का लगाना अलग बात है, क्योंकि यहां हवा का बड़ा असर होता है और पिच मैच के दौरान बदलती रहती है.
खेलेंगे तो सीखेंगे वैभव
सिर्फ़ 15 साल की उम्र में उनके पास सीखने और सुधरने का बहुत समय है, जो बहुत कम खिलाड़ियों को मिलता है. उनके पास नाकाम होने और फिर से खड़े होने का पूरा मौक़ा है. भरोसा ज़रूरी है: उन्हें अभी बाहर करना यह संदेश देगा कि यहां सिर्फ़ तुरंत मिलने वाली परफ़ेक्शन चलती है, सब्र नहीं. एक निडर खिलाड़ी बनाने के लिए टीम को उसकी ग़लतियां सहनी होंगी. भारत के कई बड़े बल्लेबाज़ों की तकनीक इंग्लैंड के पहले दौरे पर ही परखी गई है. जो टिके रहे, वही आगे चलकर महान बने.
नेट्स और कोच का रोल अहम
सूर्यवंशी को मुश्किल हालात से बचाने की ज़रूरत नहीं, बल्कि सही कोचिंग की ज़रूरत है उन्हें ऐसा स्टांस सिखाना होगा जिससे शॉर्ट बॉल पर भी वह पीछे की तरफ़ वज़न ट्रांसफ़र कर सकें और अपना संतुलन न खोएं. कोचों को उनके हाथ जल्दी फ्री करने पर काम करना होगा, ताकि गेंद अचानक उठने पर हाथ शरीर से न चिपकें. जैसा नासिर ने कहा, इंग्लैंड की हवा और बदलती पिच अलग चुनौती है. उन्हें सब्र रखना होगा, बाउंसर पर मेहनत करनी होगी, और यह सीखना होगा कि कब शॉट खेलना है और कब गेंद को शरीर पर लेकर चुपचाप रन लेना है.
आखिरी मैच नहीं मौका है मैदान मारने का
11 जुलाई को साउथैम्प्टन में होने वाले आखिरी टी20 मैच से पहले इंग्लैंड के पास इस युवा खिलाड़ी के ख़िलाफ़ एक तैयार योजना है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट उनके बड़े होने का इंतज़ार नहीं करेगा, लेकिन भारतीय टीम मैनेजमेंट को करना चाहिए.गौतम गंभीर ने बिल्कुल सही कहा है कि वैभव एक मैच-विनर हैं जो कुछ ही गेंदों में मैच बदल सकते हैं, और उन्हें पूरा समय और सुरक्षा दी जाएगी। सूर्यवंशी में दुनिया के सबसे अच्छे गेंदबाज़ों को मैदान से बाहर मारने की ताक़त है। अगर इस निडरता के साथ सही कोचिंग मिल जाए, तो भारत सिर्फ़ एक बच्चे को नहीं बचाएगा, बल्कि आगे चलकर एक महान खिलाड़ी तैयार करेगा. उन्हें मौक़े दीजिए, ग़लती करने की छूट दीजिए, और मैदान पर ही उन्हें सीखने दीजिए.