CM बनने के बाद करूर पहुंचे विजय, पीड़ितों को दी सरकारी नौकरी, विपक्ष हमलावर


करूर भगदड़ के बाद सीएम विजय पहली बार करूर पहुंचे हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)

10 जुलाई 2026 (पब्लिश्ड: 10 जुलाई 2026, 03:18 PM IST)

तमिलनाडु के करूर जिले में CM विजय की चुनावी रैली में हुई भगदड़ को लगभग एक साल बीत चुके हैं. मगर इस घटना में मारे गए 41 लोगों के घरवालों का ज़ख्म कभी नहीं भरेगा. जोसफ विजय बतौर मुख्यमंत्री उस घटना के बाद पहली बार करूर पहुंचे हैं. उन्होंने हादसे वाले दिन का ज़िक्र किया. सीएम विजय ने पुलिस और विपक्षी पार्टी DMK (द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम) पर निशाना साधा है. उन्होंने साफ कहा कि उस दिन उन्हें फंसाया गया था. 

जोसफ विजय 10 जुलाई को करूर पहुंचे हैं. उन्होंने करूर की जनता के सामने ऐलान किया ‘करूर की वो घटना हमेशा मेरे ज़हन में ताज़ा रहेगी. उसकी तस्वीर आज भी याद आती है.’ उन्होंने बताया कि पुलिस पर भरोसा करना उनकी सबसे बड़ी भूल थी. उनका कहना है कि अगर पुलिस चाहती तो उन्हें रोक सकती थी मगर पुलिस ने ऐसा नहीं किया. 

मृतकों के घरवालों को सरकारी नौकरी 

DMK ने विजय और उनकी पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) पर निशाना साधा था. तब उनपर आरोप लगे थे कि अगर वो दोषी नहीं हैं तो चुप क्यों हैं? मुख्यमंत्री ने इस बात को याद करते हुए कहा, ‘पुलिस ने सारा दोष मुझपर मढ़ दिया. जबकि पुलिस ने पर्याप्त बल तैनात नहीं किए थे. MK Stalin मुझपर सवाल उठाते हैं जबकि सच्चाई ये है कि उन्होंने खुद पुलिस के साथ मिलकर वो भगदड़ होने दिया.’

CM विजय ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवार को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है. उन्होंने ये भी ऐलान किया है कि पार्टी करूर जिले में मृतकों के सम्मान में एक मेमोरियल बनाएगी. 

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नौकरी देने पर विवाद क्यों? 

लेकिन DMK का कहना है कि मृतकों के परिवार को नौकरी देने के बहाने उनका बयान बदला जा सकता है. जबकि जांच अभी तक चल रही है. इसके लिए DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी डाली थी. मगर सुप्रीम कोर्ट ने इसे ख़ारिज कर कहा, ‘क्या अब हम बातएंगे कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को क्या करना चाहिए?’ सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इसमें सीएम विजय की कोई गलती नहीं है. 

इसके बाद DMK CBI तक पहुंची और आग्रह किया कि गवाहों के बयान सीएम विजय के दौरे से पहले ही सुरक्षित कर लें. सुप्रीम कोर्ट के अलावा मद्रास हाई कोर्ट के मदुरई बेंच ने भी विपक्षी पार्टी की याचिका ख़ारिज कर दी है. हालांकि बेंच ने कहा कि परिजनों को दी गई नौकरी टेम्पररी ही होगी जब तक इस केस का फैसला नहीं आ जाता. 

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