लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। कहते हैं कि असली चैंपियन केवल मैदान में नहीं बनते, बल्कि हर उस दिन तैयार होते हैं जब वे थकान, दबाव और चुनौतियों के बावजूद अपने लक्ष्य से समझौता नहीं करते।
इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइआइटी-दिल्ली) की बीटेक छात्रा आन्या सिंह ऐसी ही युवा प्रतिभा हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की कठिन पढ़ाई और फिगर स्केटिंग जैसे चुनौतीपूर्ण खेल के बीच ऐसा संतुलन बनाया कि आज वे देश की सबसे सफल युवा फिगर स्केटरों में शुमार हैं।
हिमाद्री आइस रिंक में आयोजित 21वीं नेशनल फिगर स्केटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर आन्या ने लगातार दूसरा राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया है। इसके साथ ही उन्होंने लगातार आठवीं बार राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है।
25 से अधिक राष्ट्रीय पदकों और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली आन्या की यह उपलब्धि केवल खेल की जीत नहीं, बल्कि अनुशासन, समय प्रबंधन और अटूट संकल्प की मिसाल भी है। उनकी कहानी उन हजारों युवाओं को यह भरोसा देती है कि यदि इरादे मजबूत हों तो पढ़ाई और खेल दोनों में शिखर तक पहुंचा जा सकता है।
पढ़ाई और स्केटिंग में बनाया बेहतरीन संतुलन
आन्या सिंह के लिए इंजीनियरिंग और फिगर स्केटिंग दोनों ही समान महत्व रखते हैं। एक ओर कालेज की कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, प्रोजेक्ट और परीक्षाएं, तो दूसरी ओर रोजाना कई घंटों का कठिन अभ्यास। कई बार ऐसा भी हुआ जब राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी और सेमेस्टर परीक्षाएं एक ही समय पर आ गईं, लेकिन उन्होंने कभी किसी एक क्षेत्र को दूसरे पर हावी नहीं होने दिया।
आन्या का कहना है कि खेल ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और समय का सही उपयोग करना सिखाया, जबकि इंजीनियरिंग की पढ़ाई ने समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की क्षमता विकसित की। यही संतुलन उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
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लगातार आठवीं बार बनीं राष्ट्रीय चैंपियन
हिमाद्री आइस रिंक में आयोजित 21वीं नेशनल फिगर स्केटिंग चैंपियनशिप में जीता गया गोल्ड मेडल उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है। आइआइआइटी-दिल्ली में प्रवेश लेने के बाद यह उनका लगातार दूसरा राष्ट्रीय स्वर्ण पदक है, जबकि कुल मिलाकर वे लगातार आठ बार राष्ट्रीय चैंपियन बनने का रिकार्ड बना चुकी हैं। चैंपियनशिप से पहले उन्होंने एक आस्ट्रेलियाई कोच के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण ने उनकी तकनीक, संतुलन और प्रस्तुति को और निखारा, जिसका लाभ राष्ट्रीय प्रतियोगिता में साफ दिखाई दिया।
25 से अधिक राष्ट्रीय पदक, सात देशों में भारत का प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय स्तर पर 25 से अधिक पदक जीत चुकी आन्या भारत का प्रतिनिधित्व कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी कर चुकी हैं। उन्होंने हांगकांग, थाईलैंड, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, कजाकिस्तान, चीन और फिलीपींस में आयोजित प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है। आन्या ने बताया कि हर पदक के पीछे वर्षों की मेहनत, कठिन अभ्यास, असफलताओं से मिली सीख और परिवार तथा कोच का निरंतर सहयोग होता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे के साथ उतरना उनके लिए हमेशा सबसे गर्व का क्षण होता है।
तकनीक और खेल का अनोखा संगम
कंप्यूटर साइंस की छात्रा होने के कारण आन्या मानती हैं कि आने वाला समय खेल और तकनीक के बेहतर तालमेल का होगा। उनका कहना है कि वीडियो एनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक उपकरण खिलाड़ियों की तकनीकी गलतियों को पहचानने और प्रदर्शन को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
फिगर स्केटिंग जैसे खेल में जंप, स्पिन और बाडी बैलेंस का फ्रेम-दर-फ्रेम विश्लेषण प्रदर्शन को नई ऊंचाई तक ले जा सकता है। वहीं वियरेबल डिवाइस खिलाड़ियों की फिटनेस और चोट के जोखिम पर लगातार नजर रखने में मदद कर रहे हैं।
माता-पिता और कोच रहे सबसे बड़े सहारे
आन्या अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने माता-पिता और कोच को देती हैं। उनका कहना है कि कठिन समय में परिवार ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया और यह भरोसा दिलाया कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। यदि परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो पढ़ाई और खेल दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना संभव नहीं होता।
राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल करने के बाद अब आन्या का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए बड़े पदक जीतना है। साथ ही वे आइआइआइटी-दिल्ली से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर तकनीक के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट करियर बनाना चाहती हैं। उनका मानना है कि सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और हर प्रतियोगिता उन्हें पहले से बेहतर बनने का अवसर देती है।
भारत में फिगर स्केटिंग को बढ़ावा देने की जरूरत
आन्या का कहना है कि भारत में फिगर स्केटिंग की सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी ढांचे की कमी है। देश में अधिक आइस रिंक बनने चाहिए, खिलाड़ियों को बेहतर आर्थिक सहायता और प्रायोजन मिलना चाहिए तथा स्कूल स्तर से ही इस खेल को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। मीडिया में भी फिगर स्केटिंग को अधिक स्थान मिलने से नई प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा लोग केवल मेडल देखते हैं, लेकिन उसके पीछे वर्षों की मेहनत, असफलताएं और अनुशासन नहीं देख पाते। हर प्रतियोगिता मेरे लिए नई शुरुआत होती है। मैं हमेशा ऐसे अभ्यास करती हूं, जैसे पहले कभी जीती ही नहीं और ऐसे मुकाबला करती हूं, जैसे कभी हारी ही नहीं।