PAK Remittances Hike: ‘मनी ऑर्डर’ पर इतराने लगा पाकिस्तान, लेकिन इस सच ने खोल दिया पोल! – Pakistan remittances hit record over 41 billion dollar in FY26 surpass export earnings tuta


पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर है, ये तो पूरी दुनिया जानती है. किसी भी देश में जब रोजगार नहीं होता है, तो फिर लोग लाचार होकर बाहर कमाने जाते हैं. पाकिस्तान में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है. फैक्ट्रियां बंद हैं. अधिकतर लोग रोजी-रोटी के लिए विदेश निकल लेते हैं. 

अब इस बीच एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जिसे देखकर लगता है कि पाकिस्तान की आर्थिक सेहत किस कदर बिगड़ी है. दरअसल, मौजूदा समय पाकिस्तान अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह से विदेशी कर्ज और प्रवासियों के पैसों पर निर्भर है. खासकर आईएमएफ (IMF) के कर्ज से जरूरतें पूरी हो रही हैं. इसलिए कर्ज भी लगातार बढ़ता जा रहा है. 

कर्ज में डूबी है पाकिस्तान की इकोनॉमी

हालात ये है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानी प्रवासियों ने देश में रिकॉर्ड 41.6 बिलियन डॉलर की रेमिटेंस यानी विदेशों से अपने घर पैसे भेजे हैं. जिसे लेकर पाकिस्तान की सरकार इतरा रही है. लेकिन आंकड़ों को देखें तो $41.6 बिलियन की रेमिटेंस पाकिस्तान के लिए कोई गर्व की बात नहीं है, बल्कि उसकी आर्थिक लाचारी और नीतियों की विफलता को दर्शाता है.

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के अनुसार FY26 में अब तक की सबसे ज्यादा रेमिटेंस मिली है, जो पिछले वित्त वर्ष (FY25) के $38.3 बिलियन के मुकाबले 8.6% अधिक है. पाकिस्तान सरकार इसे एक बड़ी कामयाबी के रूप में पेश कर रही है, लेकिन आर्थिक नजरिये से यह आंकड़ा इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि पाकिस्तान आर्थिक तौर पर कितना कमजोर, खोखला और विदेशों पर निर्भर हो चुका है.  

एक्सपोर्ट से ज्यादा रेमिटेंस पर निर्भरता
असल बात यह है कि पाकिस्तान के एक्सपोर्ट से ज्यादा FY26 में रेमिटेंस का फंड है. किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसका मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और एक्सपोर्ट होता है. लेकिन पाकिस्तान के मामले में स्थिति पूरी तरह से उलट है. पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक के अनुसार 30 जून को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर (FY26) में देश को विदेशों में काम करने वाले लोगों से रिकॉर्ड $41.6 बिलियन की रेमिटेंस मिली, यह रकम इसी दौरान हुए कुल एक्सपोर्ट से भी ज्यादा थी. वित्त वर्ष 2026 में पाकिस्तान का एक्सपोर्ट 40.67 बिलियन डॉलर रहा. 

अब जब किसी देश की अर्थव्यवस्था उत्पादन के बजाय केवल प्रवासियों की दया और उनके भेजे पैसे पर टिक जाए, तो वह आर्थिक रूप से बेहद नाजुक स्थिति में मानी जाती है. पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी उसका भारी-भरकम व्यापार घाटा है. देश का आयात उसके निर्यात से बहुत ज्यादा है, जिसे चुकाने के लिए उसके पास डॉलर नहीं होते. 

पाकिस्तान को FY26 में सबसे ज्यादा रेमिटेंस सऊदी अरब से $829.6 मिलियन, यूएई से $792.3 मिलियन, यूके से $514.9 मिलियन और अमेरिका से $296.8 मिलियन मिली है. फिलहाल अर्थव्यवस्था में ठहराव के संकेत भले ही रेमिटेंस में 8.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई हो, लेकिन पिछले सालों के मुकाबले इसकी रफ्तार भी धीमी पड़ रही है. वित्त वर्ष 2025 में रेमिटेंस की वृद्धि दर 26.6% और वित्त वर्ष 2024 में 10.7% थी.

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