राज्य ब्यूरो, भोपाल। प्रदेश में भले ही पदोन्नति को लेकर अलग-अलग विचार हों लेकिन इससे रोजगार की राह निकलेगी। पदोन्नति होने से जो पद रिक्त होंगे, उन पर सरकार भर्ती करेगी। आगामी दो साल में दो लाख पदों पर भर्ती का लक्ष्य रखा गया है। सभी विभागों से कहा गया है कि वे रिक्त पदों का ब्योरा तैयार करें। जैसे-जैसे पदोन्नति होती जाए, वैसे-वैसे रिक्त पदों पर भर्ती के प्रस्ताव बनाकर संबंधित एजेंसियों को भेजे जाएंगे। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने पोर्टल भी तैयार कर दिया है, जिस पर रिक्तता की स्थिति दर्शाई जाएगी।
पदोन्नति अटकने से भर्तियां प्रभावित
पदोन्नति न होने और अन्य कई कारणों से प्रदेश में लंबे समय से भर्तियां नहीं हुई हैं। डेढ़ लाख से अधिक पद विभिन्न विभागों में रिक्त हो गए। पदोन्नति नहीं हुई तो नीचे के पद खाली नहीं हुए। इसके कारण भर्तियां प्रभावित हुई। जो अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त होता गया, उसके पद का प्रभार दे दिया गया।
2023 से शुरू हुआ था भर्ती अभियान
दूसरी ओर बेरोजगारी के कारण युवा सरकार से नाराज होने लगे, जिसके चलते वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भर्ती का अभियान प्रारंभ किया। एक लाख पदों पर भर्ती का दावा किया गया लेकिन 67 हजार भर्तियां हो सकीं। 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के कारण 10 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां रुकी हुई हैं।
तीन साल में ढाई लाख भर्ती का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन साल में ढाई लाख पदों पर भर्ती की घोषणा की। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को भर्ती के प्रस्ताव देने के लिए कहा। इसके पीछे आधार यह था कि पदोन्नतियां होंगी, जिससे नीचे के पद रिक्त होंगे और भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इतनी बड़ी संख्या में एक साथ भर्ती करने से स्थापना व्यय बढ़ता, जिससे वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ा सकता था इसलिए वित्त विभाग ने तीन साल में ढाई लाख पदों पर भर्ती का फार्मूला तैयार किया।