नई दिल्ली (Compassionate Appointment Rules). घर की दीवार पर टंगी माला चढ़ी तस्वीर और हाथ में सरकारी दफ्तर की धूल खाती फाइल- यह उत्तर प्रदेश के नोएडा के एक छोटे से कमरे में रहने वाले 24 साल के आयुष की रोजमर्रा की जिंदगी है. 6 साल पहले उसके पिता (बिजली विभाग में लाइनमैन थे) एक हादसे का शिकार हो गए. घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा. सरकार का नियम था कि ‘अनुकंपा’ के आधार पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिलेगी. आयुष ने अगले ही महीने आवेदन कर दिया, लेकिन आज 6 साल बाद भी उसका नाम वेटिंग लिस्ट में 142वें नंबर पर अटका हुआ है.
क्या है अनुकंपा नियुक्ति और यह किस आधार पर मिलती है?
सरकारी नौकरी के दौरान अचानक मौत या गंभीर बीमारी के कारण रिटायरमेंट… ये 2 ऐसी स्थितियां हैं जो किसी भी कर्मचारी के परिवार को सड़क पर ला सकती हैं. इसी वित्तीय संकट और भुखमरी से अपनों को बचाने के लिए सरकार अनुकंपा नियुक्ति की सुविधा देती है.
सबसे जरूरी फैक्ट: यह नौकरी कोई अधिकार नहीं है, बल्कि दया या सहायता है. सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में साफ किया है कि अनुकंपा नियुक्ति का एकमात्र उद्देश्य परिवार को तुरंत आर्थिक तंगी से उबारना है, न कि परिवार को हमेशा के लिए सरकारी नौकरी का वैकल्पिक जरिया देना.
अनुकंपा के आधार पर नौकरी किसे मिलती है?
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों के अनुसार, मृतक कर्मचारी के ‘आश्रित परिवार के सदस्य’ (Dependent Family Member) ही इसके पात्र होते हैं. इनमें शामिल हैं:
- पति या पत्नी
- बेटा (दत्तक पुत्र यानी गोद लिया हुआ बेटा भी शामिल है)
- बेटी (अविवाहित/विवाहित/विधवा/तलाकशुदा और गोद ली हुई बेटी भी शामिल है)
- भाई या बहन (यह नियम केवल तब लागू होता है जब मृत कर्मचारी अविवाहित था और उसका भाई या बहन पूरी तरह उस पर निर्भर थे).
अनुकंपा नियुक्ति को लेकर पूछे जाने वाले कुछ सवाल-जवाब
1- पिता की मौत के बाद नौकरी किसे मिलेगी, मां को या बच्चों को?
पहली प्राथमिकता हमेशा जीवनसाथी (पति/पत्नी) को दी जाती है. अगर पत्नी चाहे तो अपनी सहमति से अपने बेटे या बेटी के लिए दावा छोड़ सकती है. लेकिन इस पर अंतिम फैसला विभाग परिवार की वित्तीय स्थिति और बच्चे की योग्यता देखकर करता है.
2- पत्नी की मौत के बाद क्या पति को नौकरी मिलेगी?
हां, बिल्कुल मिलेगी, अगर पति मृत पत्नी पर आर्थिक रूप से निर्भर था.
3- क्या पत्नी की मौत के बाद उसके भाई या बहन को नौकरी मिल सकती है?
नहीं. अगर मृत महिला कर्मचारी शादीशुदा थी तो उसके भाई-बहन को नौकरी नहीं मिल सकती. केवल अविवाहित कर्मचारी की स्थिति में ही भाई या बहन पात्र होते हैं.
4- क्या पद और सैलरी मृत कर्मचारी वाली ही रहती है?
यह सबसे बड़ा भ्रम है कि अगर पिता क्लास-2 अधिकारी (जैसे इंस्पेक्टर या मैनेजर) थे तो उनके बेटे को भी वही पोस्ट मिलेगी.
5- पति की मौत के बाद क्या दूसरी शादी करने पर छिन जाती है अनुकंपा वाली नौकरी?
नहीं, पति की मौत के बाद अनुकंपा पर मिली नौकरी दूसरी शादी करने पर भी नहीं छिनती है. यह नौकरी पीड़ित को उसके भरण-पोषण के लिए स्थायी रूप से दी जाती है.
अनुकंपा नियुक्ति के नियम
अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली नौकरी के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं, जिससे कंफ्यूजन की कोई स्थिति ना रहे. जानिए उनके बारे में:
- केवल निचले पदों पर नियुक्ति: अनुकंपा नियुक्ति केवल ग्रुप सी या पहले के ग्रुप डी पदों (जैसे- क्लर्क, चपरासी, मल्टी-टास्किंग स्टाफ, असिस्टेंट) पर ही दी जा सकती है.
- योग्यता का नियम: अगर पिता सीनियर पद पर थे तो भी आश्रित को ग्रुप सी से ऊपर का पद नहीं मिलेगा. इसके अलावा, आश्रित के पास उस पद के लिए आवश्यक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता (जैसे 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएशन और टाइपिंग) होनी जरूरी है.
- सैलरी: सैलरी उस नए पद (जैसे ग्रुप सी या डी) के वेतनमान के अनुसार ही मिलेगी, न कि मृत कर्मचारी की आखिरी सैलरी के बराबर.
अनुकंपा नियुक्ति के लिए अर्जी लगानी पड़ती है या विभाग खुद बुलाता है?
कई लोगों को लगता है कि मौत के बाद सरकारी महकमा खुद आकर नौकरी का लेटर सौंप देगा. ऐसा बिल्कुल नहीं होता.
- खुद लगानी पड़ती है अर्जी: परिवार को मृत कर्मचारी के विभाग के पास निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन करना होता है. इसके साथ मृत्यु प्रमाण पत्र, संपत्ति और देनदारियों का ब्योरा और परिवार के अन्य सदस्यों का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लगाना पड़ता है.
- वेलफेयर ऑफिसर की भूमिका: सरकारी नियमों के मुताबिक, विभाग के वेलफेयर ऑफिसर की जिम्मेदारी होती है कि वह पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें प्रक्रिया समझाए. लेकिन असल में सारा कागजी काम परिवार को ही दौड़-भाग कर करना पड़ता है.
सिर्फ सरकारी में या प्राइवेट कंपनियों में भी मिलता है यह अधिकार?
कई लोग इसे लेकर कंफ्यूजन की स्थिति में रहते हैं. वे जानना चाहते हैं कि अनुकंपा नियुक्ति का नियम सिर्फ सरकारी नौकरी को लेकर है या प्राइवेट जॉब को लेकर भी.
- सरकारी क्षेत्र: यह योजना केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और सरकारी बैंकों में लागू है.
- निजी क्षेत्र: भारत के श्रम कानूनों के तहत किसी भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए अनुकंपा नियुक्ति देना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है. TATA जैसी कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियां अपनी इंटरनल पॉलिसी के तहत अनुकंपा या पेंशन की मदद देती हैं. लेकिन ज्यादातर निजी कंपनियों में ऐसा नियम नहीं है.
10-10 साल का इंतजार और ‘5% का सख्त नियम’
- 5% कोटा नियम: किसी भी विभाग में सीधी भर्ती के तहत आने वाली कुल वैकेंसी के केवल 5% हिस्से पर ही अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है. अगर किसी विभाग में इस साल क्लर्क की भर्ती के लिए केवल 20 सीटें निकलीं तो अनुकंपा के कोटे में सिर्फ 1 सीट (20 का 5%) आएगी. लेकिन वहां लाइन में पहले से ही 50 पीड़ित परिवार खड़े हैं. ऐसे में बाकी 49 परिवारों को अगले साल या उससे अगले साल का इंतजार करना होगा. इसीलिए 10-10 साल तक आश्रितों को नौकरी नहीं मिल पाती और कई बार तो इंतजार करते-करते आश्रित खुद सरकारी नौकरी की अधिकतम आयु सीमा पार कर जाते हैं.
100-पॉइंट मेरिट सिस्टम: नौकरी के लिए वरीयता किसे मिलेगी?
अनुकंपा नियुक्ति की वेटिंग लिस्ट में ट्रांसपेरेंसी लाने के लिए अब सरकारें 100-पॉइंट मेरिट सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं. इसमें परिवार की माली हालत के हिसाब से पॉइंट्स दिए जाते हैं:
- पारिवारिक पेंशन: जितनी कम पेंशन, उतने ज्यादा पॉइंट्स.
- मुश्त रकम (Terminal Benefits): पीएफ, ग्रेच्युटी आदि में जो पैसा मिला, वह जितना कम होगा, पॉइंट्स उतने ही ज्यादा होंगे.
- नाबालिग बच्चे और अविवाहित बेटियां: संख्या जितनी अधिक होगी, उतने ज्यादा पॉइंट्स मिलेंगे.
- बचा हुआ सेवाकाल: मृत कर्मचारी की रिटायरमेंट में जितने ज्यादा साल बचे थे, उतने अधिक पॉइंट्स.
जिस परिवार के पॉइंट्स सबसे ज्यादा होते हैं, उसे वेटिंग लिस्ट में ऊपर रखा जाता है.
अनुकंपा नियुक्ति में इंसानियत की जरूरत
अनुकंपा नियुक्ति बेहद शानदार नीति है. लेकिन ‘5% कोटे’ और धीमी प्रशासनिक फाइलों ने इसे ऐसे दलदल में बदल दिया है जहां उम्मीदें दम तोड़ देती हैं. भुखमरी से जूझ रहे परिवारों के मामलों का निपटारा तुरंत होना चाहिए. सरकार को नौकरी की जगह एकमुश्त आर्थिक मदद का विकल्प भी देना चाहिए, जिससे किसी मजबूर परिवार को सालों तक दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें.