Russia Diesel Ban: रूस के एक फैसले से सहमा डीजल मार्केट, भारत के लिए मायने – russia diesel export ban creates global market stir dual impact for india inflation and profit


नई दिल्‍ली: इस हफ्ते रूस के डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगाने के फैसले ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा दी है। इससे इस इंडस्ट्रियल फ्यूल की कमी और बढ़ गई है। कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। यहां तक कि उन देशों में भी जो अब मॉस्को से यह फ्यूल नहीं खरीदते हैं।

भारत के लिए क्‍या हैं इसके मायने?

रूस की ओर से डीजल एक्‍सपोर्ट पर लगाए गए प्रतिबंध से ग्‍लोबल बाजार में डीजल की कमी और कीमतें बढ़ेंगी। इसका भारत पर मिलाजुला और दोहरा असर होगा। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल के दाम बढ़ने से भारत के घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। कच्चे तेल के आयात का बिल भी महंगा होने के आसार हैं। लेकिन, दूसरी तरफ भारत के लिए यह एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है।

चूंकि भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है और उसके पास मजबूत रिफाइनिंग क्षमता है। लिहाजा, भारतीय रिफाइनरी कंपनियां (जैसे रिलायंस और नायरा) इस ग्‍लोबल किल्लत के बीच यूरोप, ब्राजील और अन्य देशों को महंगे दामों पर डीजल एक्‍सपोर्ट करके भारी मुनाफा कमा सकती हैं।

ग्‍लोबल खपत में डीजल का सबसे ज्‍यादा हिस्‍सा

ग्लोबल ऑयल खपत में डीजल का हिस्सा सबसे ज्‍यादा है। इसके कई तरह के इस्तेमाल की वजह से इसकी बढ़ती कीमतों का असर पूरी ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ सकता है। मसलन, इंडस्ट्रियल मशीनरी, खेती के उपकरण, भारी ट्रांसपोर्ट और बिजली बनाने में।

महामारी के बाद मजबूत मांग और पश्चिम में रिफाइनरी बंद होने के कारण उत्पादन में कटौती की वजह से कई सालों से सप्लाई कम रही है। ईरान युद्ध ने मार्केट पर और दबाव डाला है।

रूस अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डीजल एक्सपोर्टर है। वहां रिफाइनरी बंद होने से फ्यूल की ग्लोबल सप्लाई पर काफी असर पड़ सकता है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों की वजह से घरेलू कमी के कारण बैन से पहले ही इसका एक्सपोर्ट धीमा हो रहा था।

डीजल सप्‍लाई पर बढ़ता दबाव

केप्‍लर के अनुसार, 1 से 10 जुलाई के बीच रूस से डीजल और गैस-ऑयल की लोडिंग सिर्फ 2,34,000 बैरल प्रति दिन थी। यह जून में 4,00,000 बैरल प्रति दिन और 2025 के औसत लगभग 8,17,000 बैरल प्रति दिन से कम थी।
डीजल सप्लाई पर दबाव तब और बढ़ गया जब बुधवार को रूस की ओर से एक्सपोर्ट बैन की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरान पर नए हमले किए। इससे होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही और मिडिल ईस्‍ट के एक्सपोर्ट पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं।

बुधवार को जारी अमेरिकी सरकारी आंकड़ों से पता चला कि पिछले हफ्ते डीजल की इन्वेंट्री में 45 लाख बैरल से ज्‍यादा की कमी आई। 3 जुलाई तक यह 9.78 करोड़ बैरल रह गई। यह पांच साल के औसत से 6% कम है।

गल्फ ऑयल के सलाहकार टॉम क्लोजा ने गुरुवार को क्लाइंट्स को लिखा, ‘फारस की खाड़ी से आई खबरों, रूस की ओर से एक्सपोर्ट रोकने और अमेरिका की एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्‍ट्रेशन की चौंकाने वाली रिपोर्ट ने डिस्टिलेट बेचने वालों को मार्केट से बाहर कर दिया।’

रूस से फ्यूल इंपोर्ट नहीं करते अमेरिका-यूरोप

यूक्रेन पर हमले के कारण अमेरिका और यूरोप अब रूस से फ्यूल इंपोर्ट नहीं करते हैं। लेकिन, मॉस्को के एक्सपोर्ट बैन के बावजूद दोनों क्षेत्रों में डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। इससे ऑयल मार्केट के आपस में जुड़े होने का पता चलता है। बुधवार को अमेरिकी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स 11% बढ़कर 154 डॉलर प्रति बैरल हो गया। यह WTI क्रूड के मुकाबले 80 डॉलर प्रति बैरल ज्‍यादा है।
वहीं, यूरोपियन लो-सल्फर गैसऑयल फ्यूचर्स बुधवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स के मुकाबले 60.77 डॉलर प्रति बैरल के अब तक के सबसे ऊंचे प्रीमियम पर पहुंच गए।

रूस से एक्सपोर्ट घटने के कारण दुनिया भर में सप्लाई कम हो गई है। इससे ब्राजील और तुर्की जैसे रेगुलर ग्राहकों को अमेरिकी कार्गो के लिए यूरोपियन देशों और दूसरे इंपोर्टर्स से मुकाबला करना पड़ रहा है। इसका असर पावर और एग्रीकल्चर सेक्टर पर भी पड़ सकता है।

वोर्टक्सा के एनालिस्ट मिक स्ट्रॉटमैन ने कहा कि अगर तुर्की अपने प्रोडक्शन का इस्तेमाल घरेलू जरूरतों के लिए करता है तो इससे गर्मियों में डिमांड बढ़ने पर मेडिटेरेनियन इलाके में बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले डीजल की सप्लाई रुक जाएगी।

बढ़ सकती है किसानों के लिए लागत

डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब यह भी है कि दक्षिणी गोलार्ध में बुवाई के मौसम और उत्तरी गोलार्ध में कटाई के मौसम से पहले किसानों की लागत बढ़ सकती है। कारण है कि ब्राजील और अमेरिका के मिडवेस्ट के किसान एक ही सप्लाई के लिए मुकाबला कर रहे हैं।

कंसल्टेंसी FGE NexantECA में रिफाइनिंग हेड क्विलिन टैम ने कहा, ‘जब होर्मुज स्‍ट्रेट में रुकावट आई थी तो अमेरिका EU/ब्रिटेन के लिए डीजल का मुख्य सप्लायर बन गया था। लेकिन, अब लैटिन अमेरिका को भेजा जाने वाला हर बैरल यूरोप नहीं जा रहा है। यह तब हो रहा है जब अमेरिका और ARA में डीजल का स्टॉक साल के इस समय के हिसाब से पहले ही ऐतिहासिक रेंज से काफी नीचे है।’

टैम ने आगे कहा कि मिडिल ईस्ट में फिर से तनाव बढ़ने का मतलब यह भी है कि जुलाई में चीन की ओर से फ्यूल एक्सपोर्ट पर लगी रोक में दी गई ढील का अगस्त में भी जारी रहना पक्का नहीं है। इससे एशिया से मिलने वाली संभावित राहत कम हो सकती है।

अमित शुक्‍ला

लेखक के बारे मेंअमित शुक्‍लाअमित शुक्‍ला नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर हैं। उनका पत्रकारिता में 20 साल से ज्‍यादा का अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्‍होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, फॉरेन ट्रेड, शेयर मार्केट, रियल एस्‍टेट, राजनीति, देश-विदेश, फीचर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। उनके पास पत्रकारिता और जनसंचार में डॉक्‍टरेट (PhD) की डिग्री है। टाइम्‍स इंटरनेट लिमिटेड (TIL) में उनका सफर जनवरी 2018 में शुरू हुआ। TIL में रहते हुए नवभारत टाइम्‍स (डिजिटल) से पहले उन्‍होंने इकनॉमिक टाइम्‍स (डिजिटल) में सेवाएं दीं।

पत्रकारिता का अनुभव
अमित शुक्‍ला के पास डिजिटल के साथ प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया का लंबा अनुभव है। TIL से जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण (नोएडा) में सेंट्रल डेस्‍क पर उन्‍होंने करीब एक दशक बिताया। यहीं से उनके करियर की शुरुआत भी हुई। पहले वह फ्रीलांसर के तौर पर जागरण समूह की फीचर टीम से जुड़े थे। फिर सेंट्रल डेस्‍क का अहम हिस्‍सा बने।

जाने-माने संस्‍थानों में अध्‍यापन
अमित शुक्‍ला ने जाने-माने मीडिया संस्‍थानों के अलावा देश के नामचीन शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय (नोएडा) शामिल हैं।

लिंग्‍व‍िस्‍ट के तौर पर खास पहचान
अमित शुक्‍ला ने लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, ऑस्ट्रियन इकोनॉमिक सेंटर, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज समेत कई अन्य भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया।

अवार्ड/अचीवमेंट
ET एक्‍सीलेंस अर्वाड्स 2019
र‍िसर्च फेलो (मीडिया) – ग्रैफनाइल रिसर्च
कीनोट स्‍पीकर – चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (उन्‍नाव कैंपस)… और पढ़ें



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