Lindsey Graham Sudden Death News,यूक्रेन दौरा, ईरान की धमकी, अचानक मौत… ट्रंप के करीबी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को दिया गया जहर? जांच की मांग – us senator lindsey graham sudden death news poisoning allegations amid iran irgc threat ukraine visit – America News


US Senator Lindsey Graham Demise: लोरा लूमर ने लिंडसे ग्राहम की मौत की जांच की मांग की है। उन्होंने लिखा ‘उनकी मौत की जांच होनी चाहिए। खासकर इसलिए क्योंकि एक हफ्ते से भी कम समय पहले ईरान ने उनकी मौत की मांग की थी। उनके स्टाफ का ‘छोटी और अचानक हुई बीमारी’ कहने का क्या मतलब है?’

Lindsey Graham dies
सीनेटर लिंडसे ग्राहम की मौत के बाद अमेरिका में सवाल
वॉशिंगटन: लंबे समय तक अमेरिकी सीनेटर रहे लिंडसे ग्राहम का 11 जुलाई को 71 साल की उम्र में अचानक निधन हो गया है। उनकी मौत अचानक हार्ट अटैक से हुई है। लिंडसे ग्राहम की मौत को अमेरिका में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लोग साजिशों से जोड़ रहे हैं। लिंडसे ग्राहम इजरायल के हार्ड कोर समर्थक थे और ईरान के साथ अमेरिका की शांति वार्ता का विरोध करते थे। उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। सबसे खास बात ये है कि ईरान के समर्थन में हुए प्रदर्शनों में कुछ तस्वीरें लिंडसे ग्राहम की थीं जिन्हें मारने की बात कही गई थी।

लिंडसे ग्राहम के ऑफिस ने उनके निधन की जानकारी दी है और बताया कि शनिवार शाम को उनका देहांत हो गया। खबरों के मुताबिक उनके कैपिटल हिल स्थित घर पर कार्डियक अरेस्ट की सूचना मिलने के बाद इमरजेंसी टीम वहां पहुंची थी। उनके निधन के बाद अमेरिका के कई ताकतवर शख्सियत उनकी मौत को साजिश से जोड़ रहे हैं जिनमें डोनाल्ड ट्रंप की काफी करीबी पत्रकार लोरा लूमर शामिल हैं। इजरायली प्रधानमंत्री ऑफिस के पूर्व प्रवक्ता डेविड काएस ने भी लिंडसे ग्राहम की मौत की जांच की मांग की है।

लिंडसे ग्राहम की मौत के बाद अमेरिका में सवाल

लोरा लूमर ट्रंप की काफी करीबी हैं और उन्होंने लिखा है ‘5 दिन पहले IRGC ने सबके सामने सीनेटर लिंडसे ग्राहम की हत्या की मांग की थी। वे पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध खत्म करने की कोशिश में विदेश में एक युद्ध-क्षेत्र की यात्रा पर थे। वे एक दिन से भी कम समय के लिए घर लौटे थे और आज रात उनके स्टाफ ने बताया कि ‘छोटी और अचानक हुई बीमारी’ के कारण उनका निधन हो गया। क्या उन्हें विदेश में या अमेरिका लौटने पर किसी विदेशी दुश्मन ने जहर दिया था?’

लोरा लूमर ने लिंडसे ग्राहम की मौत की जांच की मांग की है। उन्होंने लिखा ‘उनकी मौत की जांच होनी चाहिए। खासकर इसलिए क्योंकि एक हफ्ते से भी कम समय पहले ईरान ने उनकी मौत की मांग की थी। उनके स्टाफ का ‘छोटी और अचानक हुई बीमारी’ कहने का क्या मतलब है?’

वहीं इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व सलाहकार और प्रवक्ता डेविड काएस ने लिखा है ‘6 दिन पहले तेहरान, कल मौत, जांच जरूरी है।’

आपको बता दें कि पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम के दौरान कई तरह के अमेरिका विरोधी पोस्टर्स दिखाए गये थे। इनमें से एक पोस्टर में लिंडसे ग्राहम को भी मारने की बात कही गई थी। इसीलिए अब उनकी मौत को ईरान से जोड़ा जा रहा है।

लिंडसे ग्राहम की मेडिकल रिपोर्ट में क्या कहा गया?

हालांकि लिंडसे ग्राहम की मौत को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की साजिश या जांच की मांग नहीं की गई है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार शाम 11 जुलाई को सीनेटर ग्राहम के कैपिटल हिल स्थित आवास पर कार्डियक अरेस्ट की सूचना मिलने पर आपातकालीन चिकित्सा कर्मी वहां पहुंचे थे। हालांकि ग्राहम तेहरान के कड़े आलोचक थे और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के जबरदस्त समर्थक थे लेकिन अमेरिकी फ़ेडरल इंटेलिजेंस और कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने उनकी मौत से जुड़ी किसी साजिश या जहर दिए जाने की घटना की जांच की कोई घोषणा नहीं की है।

अभिजात शेखर आजाद

लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।

अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।

विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।

पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।

पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।

अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें