जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के ओडिशा सीमा से सटे गुड़ाबांदा प्रखंड में बेशकीमती पन्ना का विशाल भंडार होने के बावजूद अवैध खनन और तस्करी का खेल पूरी तरह थम नहीं पाया है।
हाल ही में बहरागोड़ा में डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के पन्ना के साथ तीन तस्करों की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर गुड़ाबांदा का पन्ना भंडार चर्चा में आ गया है।
हालांकि प्रशासन समय-समय पर अवैध खदानों को सील करता रहा है, लेकिन सुदूर क्षेत्रों में चोरी-छिपे खनन अब भी जारी है। घाटशिला अनुमंडल मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित गुड़ाबांदा प्रखंड के तीन प्रमुख क्षेत्रों की धरती के नीचे उच्च गुणवत्ता वाले पन्ना का विशाल भंडार है। विशेषज्ञ सर्वे के अनुसार:
गुड़ाबांदा में वर्ष 2012 से पहले तक बाहरी पत्थर कारोबारी स्थानीय ग्रामीणों को चंद रुपयों की मजदूरी देकर करोड़ों का पन्ना निकलवाते थे। ग्रामीणों को इस रत्न की वास्तविक कीमत का अंदाजा नहीं था।
लेकिन वर्ष 2012 में बेनीडांगर स्थित एक अवैध खदान की सुरंग धंसने से तीन ग्रामीणों (झापोल मुर्मू, रवि मुर्मू और बद्रीनाथ मुर्मू) की मौत हो गई।
इस बड़े हादसे के बाद जब प्रशासनिक जांच शुरू हुई, तब जाकर गुड़ाबांदा में पन्ना के इस अरबों रुपये के विशाल खनिज भंडार का आधिकारिक खुलासा हुआ।
नक्सलवाद खत्म होने के बाद बढ़ी सक्रियता
बारुनमुठी, थुरुकूगोड़ा और बाउटिया क्षेत्र पूर्व में घोर नक्सल प्रभावित रहे हैं। वर्ष 2017 में कुख्यात नक्सली कान्हू मुंडा समेत छह नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई।
इसके बाद वन एवं खनन विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए कई अवैध खदानों में मिट्टी भरकर उन्हें सील कराया। इसके बावजूद, सीमावर्ती इलाका होने के कारण राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के अंतरराज्यीय तस्करों की नजर इस बहुमूल्य खनिज पर टिकी हुई है, जो वर्तमान में प्रशासन के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती है।