आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम: कम लागत में ज्यादा तांबा निकालने के लिए HCL – NML मिलकर करेंगे रिसर्च


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) ने खनन और धातु विज्ञान के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 

एचसीएल ने जमशेदपुर स्थित CSIR-NML के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOA) पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली में हुए इस रणनीतिक करार का मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान (Research) के जरिए देश में तांबा उत्पादन की प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

इस ऐतिहासिक साझेदारी के जरिए दोनों ही प्रतिष्ठित संस्थान अपने-अपने अनुभवों और संसाधनों को साझा करेंगे। एचसीएल जहां दशकों से तांबा खनन और Refining में अपनी महारत रखती है, वहीं सीएसआईआर-एनएमएल धातु विज्ञान (Metallurgy) में वैज्ञानिक अनुसंधान का अग्रणी केंद्र है।

  •     लागत में कमी: दोनों संस्थान मिलकर ऐसी तकनीकों पर काम करेंगे, जिससे तांबा निकालने की प्रक्रिया में लगने वाले समय और लागत को कम किया जा सके।
  •     बर्बादी पर रोक: वैज्ञानिक अब ऐसी प्रक्रियाओं पर शोध करेंगे जिससे जमीन से निकलने वाले कच्चे अयस्क (ओर) से अधिकतम मात्रा में शुद्ध तांबा प्राप्त किया जा सके और बर्बादी को न्यूनतम स्तर पर लाया जाए।

पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन माइनिंग पर जोर

मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए खनन कार्य (Sustainable Mining) करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस समझौते के तहत विशेष रूप से टिकाऊ खनन प्रथाओं पर जोर दिया जाएगा। 

 

वैज्ञानिक ऐसी हरित विधियों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनसे खनन के दौरान प्राकृतिक संसाधनों को कम से कम क्षति पहुंचे। 

 

इसके अलावा, धातुओं की इंजीनियरिंग और उनके रीसाइक्लिंग व बेहतर उपयोग पर भी शोध किया जाएगा, जो भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के हिसाब से तांबे की गुणवत्ता में सुधार लाएगा।

 

घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

एचसीएल के सीएमडी अनुपम मिश्र के नेतृत्व में कंपनी अब तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। यह साझेदारी भारत सरकार के उस राष्ट्रीय लक्ष्य को मजबूती देती है, जिसके तहत घरेलू स्तर पर धातुओं और महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन बढ़ाकर आयात पर देश की निर्भरता को कम करना है। 

 

उद्योग (Industry) और अकादमिक अनुसंधान संस्थानों का यह अनूठा मेल साबित करता है कि आने वाले समय में भारतीय खनन उद्योग वैश्विक मानकों को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 

इस अवसर पर दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह संयुक्त शोध कार्य आने वाले वर्षों में भारतीय धातु उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। 

 

इस तकनीकी सहयोग से न केवल उत्पादन के नए कुशल तरीके सामने आएंगे, बल्कि देश के युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बड़ा मंच मिलेगा।



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