वंदे भारत से सफर का सपना और साढ़े 9 घंटे की फजीहत! मालगाड़ी के इंजन से खींच कर लाई गई पटना – vande bharat ranchi patna engine fail train reaches towed by goods train passengers stranded


Vande Bharat: रांची से पटना आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस का इंजन मेसरा स्टेशन के पास तकनीकी खराबी के कारण फेल हो गया। एमआर प्रेशर खराब होने से ट्रेन स्पीड नहीं पकड़ सकी। आखिरकार, मालगाड़ी के इंजन के सहारे ट्रेन को गया होते हुए करीब साढ़े नौ घंटे की फजीहत के बाद रात 1:38 बजे पटना पहुंचाया गया।

vande bharat
रांची-पटना वंदे भारत का इंजन फेल, साढ़े 9 घंटे तक फंसे रहे यात्री
पटना: रांची से पटना आ रही वंदे भारत का इंजन बीच रास्ते में ही खराब हो गया। मालगाड़ी से सहारे ट्रेन को गयाजी तक लाया गया। गया जी जंक्शन पर इंजन दुरुस्त करने का प्रयास असफल रहा। रांची से सवा चार बजे खुली ये ट्रेन रात डेढ़ बजे के बाद पटना पहुंची। करीब साढ़े नौ घंटे यात्री परेशान रहे।

ट्रेन में कुछ यात्रियों ने रेल मंत्रालय को एक्स पर पोस्ट कर भी इसको लेकर शिकायत की। पटना जंक्शन पर ट्रेन से उतरने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। इधर, मामले में धनबाद डीआरएम, सीनियर डीसीएम के अलावा रांची डीआरएम को मैसेज और कॉल करने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। रांची डीसीएम श्रेया सिंह ने पूछने पर कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।

रांची-पटना वंदे भारत का इंजन फेल

दरअसल, रांची से पटना आ रही प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत (22350) में बीच रास्ते में ही तकनीकी खराबी आ गई। इसे एक मालगाड़ी के इंजन के सहारे किसी तरह बरकाकाना से गया तक पहुंचाया गया। फिर यहां से मालगाड़ी के इंजन के सहारे ही करीब साढ़े तीन घंटे की देरी से रात 1:38 बजे पटना पहुंची। दरअसल, रांची-पटना वंदे भारत शाम करीब 4.15 बजे रांची से रवाना हुई और मेसरा स्टेशन पर इसमें खराबी आ गई। लोको पायलट ने ठीक करने का प्रयास किया। थोड़ी देर बाद ट्रेन खुली, लेकिन मेसरा में ही फिर खड़ी हो गई।

स्पीड नहीं पकड़ पा रही थी गाड़ी

एमआर प्रेशर खराब होने से ट्रेन गति नहीं पकड़ पा रही थी। लेकिन, पायलट ने किसी तरह शाम 7.05 बजे ट्रेन को बरकाकाना तक पहुंचाया। यहां एक घंटे तक मरम्मत का प्रयास किया गया। इसके बाद पायलट ने हाथ खड़े कर दिए और सहायक इंजन की मांग की। फिर मालगाड़ी का इंजन जोड़कर ट्रेन को रवाना किया गया और यह ढाई घंटे विलंब से गया पहुंची। इसके बाद पटना के लिए चली।

मालगाड़ी की इंजन बनी खेवनहार

  • बरकाकाना स्टेशन पर करीब एक घंटे तक तकनीकी टीम ने ट्रेन की मरम्मत करने की कोशिश की, फिर पायलट ने हाथ खड़े कर दिए।
  • मालगाड़ी का सहायक इंजन वंदे भारत से जोड़ा गया, जिसके सहारे ट्रेन बरकाकाना से ढाई घंटे की देरी से गयाजी जंक्शन पहुंची।
  • धनबाद डीआरएम, सीनियर डीसीएम और रांची डीआरएम से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
  • रांची डीसीएम श्रेया सिंह को इस घटना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। साढ़े नौ घंटे तक यात्री ट्रेन में परेशान रहे।
सुनील पाण्डेय

लेखक के बारे मेंसुनील पाण्डेयसुनील पाण्डेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में बतौर सीनियर जर्नलिस्ट कार्यरत हैं। जनवरी 2021 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप का हिस्सा बने सुनील वर्तमान में NBT ऑनलाइन की बिहार-झारखंड टीम में संपादकीय और रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रणनीतिक न्यूज़ प्लानिंग, सटीक संपादन और धारदार ग्राउंड रिपोर्टिंग उनकी विशेष पहचान है। राजनीति और व्हाइट कॉलर करप्शन जैसे विषयों पर गहरी पकड़ रखने वाले सुनील ने 2005 से शुरू हुए अपने करियर में कई बड़ी खबरें ब्रेक की हैं। जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) से लेकर केरल तक के चुनावी बयार को समझा। दिल्ली, बिहार और तेलंगाना में पत्रकारिता के विभिन्न आयामों को अनुभव करने वाले सुनील सोशल मीडिया एक्स (पहले ट्विटर) पर @sunilpandeyjee के जरिए सक्रिय रहते हैं।

सुनील का पत्रकारिता करियर प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग अनुभवों से समृद्ध है, जहां उन्होंने संपादन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। पटना, दिल्ली और हैदराबाद जैसे महानगरों में उन्होंने कई प्रतिष्ठित हस्तियों का साक्षात्कार किया है। उनकी ग्राउंड रिपोर्ट्स का प्रभाव इतना गहरा रहा है कि कई मौकों पर सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और उनमें सुधार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सुनील पाण्डेय की पारखी नजर राजनीतिक उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों के आम आदमी पर पड़ने वाले असर के विश्लेषण पर रहता है। डिजिटल युग की मांग को समझते हुए वे अपनी लेखनी और वीडियो, दोनों माध्यमों से नवभारत टाइम्स के पाठकों से जुड़ते हैं। उनमें किसी भी सामान्य खबर को राष्ट्रीय विमर्श (National Narrative) बनाने की अद्भुत क्षमता है। वे केवल समाचार देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खबर के पीछे के नैतिक मूल्यों और उसके व्यापक प्रभाव को गहराई से परखते हैं।

अपने पत्रकारिता सफर का आगाज सुनील ने प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका ‘माया’ से किया, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों के लिए स्वतंत्र स्तंभकार (कॉलमनिस्ट) के रूप में अपनी लेखनी को धार दी। ETV न्यूज की संपादकीय टीम के साथ संपादन और रिपोर्टिंग के गुर सीखने के बाद, उन्होंने ज़ी मीडिया और नेटवर्क 18 जैसे बड़े संस्थानों में एक लंबा समय बिताया। प्रिंट और टीवी न्यूज़ के व्यापक अनुभव के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया। न्यूज़ इकोसिस्टम की गहरी समझ विकसित की। वर्तमान में वे टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवभारत टाइम्स ऑनलाइन’ में अपनी धारदार पत्रकारिता को जारी रखे हुए हैं।

सुनील पाण्डेय की शैक्षणिक नींव ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ माने जाने वाले पटना विश्वविद्यालय में पड़ी। यहां से ग्रेजुएशन और मास्टर के साथ ही उन्होंने पत्रकारिता की डिग्री भी प्राप्त की। वे समाचारों के विभिन्न स्रोतों के विश्लेषणात्मक अध्ययन और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों जैसे गंभीर विषयों पर अपनी लेखनी और व्याख्यानों के माध्यम से निरंतर विचार साझा करते रहते हैं। पत्रकारिता करियर के दौरान कई अवॉर्ड से सुनील पाण्डेय को सम्मानित किया जा चुका है।… और पढ़ें