‘खराब डील से अच्छा न हो ट्रेड डील’ अमेरिका की आंख में आंख गड़ाकर भारत का जवाब
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India-US Trade Deal: अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर भारत ने सख्त रुख अपना लिया है. मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं होगा. भारत ने साफ कर दिया है कि कृषि, टैरिफ और व्यापारिक रियायतों जैसे अहम मुद्दों पर समझौता किए बिना किसी तरह के समझौते पर साइन नहीं होगा. भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ते निर्यात के साथ-साथ ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे नए ट्रेड पार्टनर्स के कारण सरकार की मोलभाव की ताकत बढ़ी है.
अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर भारत सरकार ने अपना रुख और सख्त कर लिया है. (फाइल फोटो- Reuters)
अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर भारत सरकार ने अपना रुख और सख्त कर लिया है. अमेरिका चाहता है कि भारत जल्द से जल्द इस ट्रेड डील पर मुहर लगा दे, लेकिन मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं होगा. सरकार का मानना है कि जब भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और दुनिया के कई बड़े देशों के साथ व्यापार बढ़ रहा है, तो बिना फायदे के किसी डील पर साइन करने की कोई जरूरत नहीं है.
ट्रेड डील पर क्यों अटकी बात?
अंततराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछले महीने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के भारत दौरे के दौरान उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड डील हो जाएगी. लेकिन यह बातचीत कई अहम मुद्दों पर अटक गई. भारत ने साफ कहा कि जब तक उसकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक समझौते पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा.
भारत की क्या है डिमांड?
भारत की सबसे बड़ी मांग यह है कि उसके सामान पर अमेरिका में चीन जैसे दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ मिले. साथ ही अमेरिका यह भी भरोसा दे कि समझौते के बाद भारतीय उत्पादों पर अचानक नए टैक्स नहीं लगाए जाएंगे. इसके अलावा मोदी सरकार ने कृषि को लेकर भी दोटूक रुख अपनाया है. सरकार किसी भी कीमत पर किसानों के हितों से समझौता करने के लिए तैयार नहीं है.
अमेरिका के क्या-क्या अरमान?
उधर अमेरिका चाहता है कि इस महीने प्रस्तावित नए टैरिफ लागू होने से पहले भारत कुछ रियायतें दे दे. लेकिन भारत ने साफ संदेश दिया है कि सिर्फ समय सीमा के दबाव में कोई समझौता नहीं होगा. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी पहले ही कह चुके हैं कि भारत वही डील करेगा, जिसमें देश का फायदा हो. अगर समझौते में भारत को लाभ नहीं मिलता तो उसे टालना बेहतर होगा.
भारत ने क्यों सख्त किया लहजा?
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में भारत की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हुई है. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात बढ़ा है. खाड़ी देशों के साथ व्यापार फिर रफ्तार पकड़ चुका है और अमेरिका को होने वाला निर्यात भी बढ़ा है. इतना ही नहीं, भारत ने अपने लिए दूसरे विकल्प भी तैयार कर लिए हैं. ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता जल्द लागू होने वाला है, जबकि यूरोपीय संघ के साथ भी बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है. यानी अब भारत सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं है.
आर्थिक मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक है. कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाया है. ऐसे में सरकार को भरोसा है कि वह बेहतर शर्तों पर बातचीत कर सकती है. जानकारों का कहना है कि मोदी सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है… सिर्फ समझौता करने के लिए समझौता नहीं होगा. अगर डील होगी तो भारत के हितों को ध्यान में रखकर ही होगी. यही वजह है कि इस बार नई दिल्ली अमेरिका के दबाव में आने के बजाय अपने पत्ते सोच-समझकर खेल रही है.
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साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें