1986 के बाद बन रहा यह संयोग
तीन राज्यसभा सीटों पर जीत के साथ ही राज्यसभा की मौजूदा संख्या में साधारण बहुमत के लिए जरूरी 123 सीटों के मुकाबले BJP सिर्फ छह सीटें पीछे है। पिछली बार किसी एक राजनीतिक दल को राज्यसभा में बहुमत 1986 में मिला था, जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पास जरूरी संख्या बल था। हालांकि BJP के पास अभी भी अपने दम पर बहुमत नहीं है लेकिन NDA की 152 सीटों की संख्या के साथ वह यहां काफी मजबूत स्थिति में है।
नजर अब आने वाले मॉनसून सत्र पर
पहले टीएमसी और फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी में फूट के बाद संसद में एनडीए की ताकत बढ़ी है। साथ ही पिछले कुछ समय से यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले दिनों में सरकार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संवैधानिक कानून पेश करेगी, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल की काफी अधिक चर्चा है। संसद के मॉनसून सत्र से पहले परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी गुणा गणित और हलचल तेज हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा संवैधानिक संशोधनों की होगी। संवैधानिक संशोधन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक है, और इस हिसाब से राज्यसभा में पूर्ण प्रभावी संख्या में सदस्य मतदान करते हैं तो 166 सदस्य दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करते हैं।
दो तिहाई बहुमत से अब भी पीछे एनडीए
एनडीए दो-तिहाई बहुमत से अब भी पीछे है लेकिन ऐसी चर्चा है कि कुछ क्षेत्रीय दल समर्थन दे दें या गैर हाजिर होने पर एनडीए इस अंतर को पाट सकती है। इन दलों के संभावित समर्थन की चर्चा है-
➤ DMK (8 सांसद): अभी हाल में इंडिया गठबंधन से डीएमके ने दूरी बनाई है। चर्चा इस बात की है या तो पार्टी कानून का समर्थन कर सकती है या वोटिंग से दूर रह सकती है।
➤ YSR कांग्रेस पार्टी (4 सांसद): सरकार का समर्थन करने की उम्मीद है, जिसमें संभावित परिसीमन बिल भी शामिल है।
➤ बीजू जनता दल (5 सांसद): महिलाओं के लिए आरक्षण की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए, पार्टी कानून का समर्थन कर सकती है या वोटिंग से दूर रहने का फैसला कर सकती है।
➤ एक NCP (SP) सांसद: कानून का समर्थन करने की संभावना है। साथ ही निर्दलीय सांसद परिमल नाथवानी भी NDA का समर्थन करेंगे। झारखंड में बीजेपी के समर्थन से उन्हें जीत मिली है।