बलरामपुर में महंगाई के साथ मुनाफाखोरी की समस्या सामने आई है। बाजारों में जरूरी सामान के दाम मनमाने तरीके से बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि थोक मंडियों में कीमतें स्थिर हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं और दुकानदारों द्वारा अधिक लाभ कमाने की प्रवृति ने आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है।

बलरामपुर, संवाददाता। महंगाई की मार झेल रहे आम उपभोक्ताओं के सामने अब एक नई चुनौती मुनाफाखोरी के रूप में खड़ी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ती कीमतों का हवाला देकर जिले के कई बाजारों में रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम मनमाने तरीके से बढ़ाए जा रहे हैं। सब्जी, दूध, दही, आटा, चावल, दाल, खाद्य तेल और मसालों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट तक उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक वसूली की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई दुकानों पर बिना बिल सामान बेचा जा रहा है, जबकि पैक्ड और खुले सामान की कीमतों में भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
बाजार की पड़ताल में सामने आया कि थोक मंडियों में कई वस्तुओं के दाम स्थिर रहने के बावजूद खुदरा स्तर पर उनकी कीमतें कहीं अधिक बढ़ाकर वसूली जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक महंगाई के साथ-साथ अनियंत्रित मुनाफाखोरी भी उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। पहले जहां अधिकांश दुकानदार 10 से 20 प्रतिशत मार्जिन पर कारोबार करते थे, वहीं अब कई वस्तुओं पर 40 से 50 प्रतिशत तक लाभ लिया जा रहा है। इस विशेष पड़ताल में तीन प्रमुख बाजारों में एक ही दिन एक ही सामान के दामों में खासा अंतर देखने को मिल रहा है। थोक और खुदरा कीमतों का अंतर, उपभोक्ताओं व व्यापारियों की राय, प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और विभागीय कार्रवाई के रिकॉर्ड के आधार उपभोक्ताओं ने सवाल उठाए हैं। बाजार में वास्तविक महंगाई अधिक है या फिर मुनाफाखोरी ने हालात बिगाड़ दिए हैं, इसका जबाब लोग जिम्मेदार से मांग रहे हैं।
