Quadrangular Security Grids: 5 महीने और…पाकिस्तान-बांग्लादेश के उड़ जाएंगे तोते, इजरायल जैसा इंतजाम करने जा रहा भारत – india quadrangular security grids along bangladesh pakistan borders plan revealed by amit shah this project like israel
Pakistan-Bangladesh Borders: भारत पहली बार अपनी सीमाओं को आधुनिक तकनीक के आधार पर सुरक्षित करने जा रहा है। इसके लिए चार स्तरीय ऐसा स्मार्ट ग्रिड यानी सुरक्षा कवच बनाया जाएगा, जिसे भेद पाना बेहद नामुमकिन होगा।
भारत का चार स्तरीस सीमा सुरक्षा ग्रिड
नई दिल्ली: भारत अपनी पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती करीब 6,000 किलोमीटर लंबी सीमाओं को लेकर चार स्तरीय सुरक्षा कवच बनाने जा रहा है। यानी इन सीमाओं से दुश्मन के इलाके से किसी तरह की घुसपैठ की बात तो छोड़ दीजिए, परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा प्लान तो कुछ ऐसा ही है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि भारतीय सीमाओं को इजरायल जैसी स्मार्ट बॉर्डर तकनीक से लैस किया जाएगा।
शाह का चार स्तरीय सुरक्षा ग्रिड का प्लान
दरअसल, हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिस चार-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड का ऐलान किया था, उसमें 7 मुख्य और 33 उप-बिंदु होंगे। सुरक्षा बलों के सुझावों के बाद इस साल के आखिर तक इन्हें एक साथ लागू कर दिया जाएगा।
यह फैसला बीते हफ्ते हुई पहली जमीनी सीमा सम्मेलन के बाद लिया गया है, जिसमें सीमावर्ती जिलों के 119 पुलिस कप्तान और कलेक्टर शामिल हुए थे।
स्मार्ट बॉर्डर: एंटी ड्रोन सिस्टम और हाई रिजोल्यूशन कैमरे
अधिकारियों ने बताया कि इस सुरक्षा ग्रिड के चार हिस्सों में केंद्र सरकार, केंद्रीय एजेंसियां, संबंधित सीमाओं पर तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन और चौथा हिस्सा स्थानीय लोग होंगे।
अधिकारियों ने कहा कि स्मार्ट बॉर्डर के लिए दिसंबर से पहले इस पर काम पूरा करके इसे जारी कर दिया जाएगा। स्मार्ट बॉर्डर में एंटी-ड्रोन सिस्टम, हाई-रिजोल्यूशन कैमरे और वॉर्निंग सिस्टम जैसी चीजें शामिल होंगी। कुछ लोगों का दावा है कि यह स्मार्ट बॉर्डर ग्रिड इजरायल जैसी तकनीक पर आधारित है, जो आतंकियों और घुसपैठियों के लिए काल साबित होगी।
दूसरा हिस्सा आतंकरोधी ग्रिड का होगा
इस चार स्तरीय सुरक्षा का दूसरा हिस्सा एंटी-टेररिज्म ग्रिड होगा। इसमें केंद्रीय एजेंसियां और राज्य पुलिस शामिल होंगी जो साइबर क्राइम, फाइनेंशियल क्राइम, नार्को-टेरर, संगठित अपराध, कट्टरपंथ, हथियारों की तस्करी और सीमावर्ती इलाकों में अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान जैसे मुद्दों पर ध्यान देंगी।
सीमावर्ती जिलों में आबादी में बदलावों की जांच
राज्य प्रशासन और CAPF की मदद से यह स्मार्ट बॉर्डर ग्रिड आबादी में होने वाले बदलावों की जांच करेगा। अधिकारियों ने बताया कि अन्य हिस्सों में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, जमीनी सेंसर, थर्मल इमेजिंग, CCTV और एंटी-टनलिंग सिस्टम जैसी चीजें शामिल होंगी।
केंद्रीय गृह सचिव हर छह महीने में लेंगे जायजा
सिस्टम तैयार होने के बाद केंद्रीय गृह सचिव हर छह महीने में सभी संबंधित पक्षों के साथ नियमित बातचीत करेंगे, जबकि इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख तीन महीने के भीतर सुरक्षा बलों और CAPF के साथ बातचीत करेंगे। योजना के अनुसार, यह प्रक्रिया राज्य स्तर पर भी आगे बढ़ेगी, जहां पुलिस महानिदेशक यानी DGP को जिले के SP और कलेक्टर स्तर पर स्थिति का आकलन करना होगा।
भारत को ऐसी स्मार्ट ग्रिड की जरूरत क्यों पड़ी
भारत की पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ करीब 7 हजार किलोमीटर की सीमाएं हैं। इनमें से करीब 6 हजार किमी का स्मार्ट बॉर्डर ग्रिड बनना है।
पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा 3,233 किलोमीटर तक है। ये सीमाएं जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात से होकर गुजरती हैं।
भारत की बांग्लादेश के साथ 4,096.7 किलोमीटर लंबी सीमा है। भारत की यह सरहद पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से जुड़ी हैं।
शाह ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ 1,289 किमी और बांग्लादेश के साथ 4,096 किमी की सीमा की सुरक्षा पारंपरिक तरीकों से नहीं की जा सकती। इन सीमाओं पर वर्तमान में अवैध घुसपैठ, ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी के अलावा मवेशी, नकली भारतीय मुद्रा नोट और संगठित अपराध जैसे खतरे मौजूद हैं।
लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।
दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।
दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।
नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।
दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें