NDA के कितने प्रतिशत समर्थक अपनी गाड़ी में नहीं भराना चाहते E20 पेट्रोल? C-Voter के सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे – c-voter survey finds more than half of nda voters unwilling to use e20 petrol
सर्वे में सामने आया है कि ज्यादातर लोग एथेनॉल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। इनमें उन लोगों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा है, जो केंद्र में एनडीए सरकार के समर्थक हैं।
सी वोटर के सर्वे के मुताबिक लोग E20 पेट्रोल नहीं भराना चाहते हैं।
नई दिल्लीः एक सर्वे में सामने आया है कि ज्यादातर लोग एथेनॉल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। इनमें उन लोगों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा है, जो केंद्र में एनडीए सरकार के समर्थक हैं। सी-वोटर के सर्वे में पता चला है कि आधे से ज्यादा एनडीए समर्थक E20 पेट्रोल अपनी गाड़ी में नहीं डलवाना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे गाड़ी की माइलेज कम होगी या गाड़ी खराब हो जाएगी। सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि लोगों में गाड़ी की परफॉर्मेंस को लेकर चिंताएं ज्यादा बनी हुई हैं और यह बात सत्ताधारी गठबंधन के अपने वोटर्स के बीच भी देखी जा रही है। लोग मोदी सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के विरोध में नजर आ रहे हैं।
52.5% एनडीए समर्थक E20 पेट्रोल के खिलाफ
इंडिया टुडे में प्रकाशित सी-वोटर के सर्वे के मुताबिक 52.5 फीसदी एनडीए समर्थक मतदाताओं का कहना है कि वो अपनी गाड़ी में E20 पेट्रोल भराना नहीं चाहते हैं। सिर्फ 18.1 फीसदी एनडीए समर्थक वोटर्स ने ही इस पेट्रोल को लेकर पॉजिटिव राय जाहिर की है। हालांकि 29.5 फीसदी लोग E20 पेट्रोल को लेकर दुविधा की स्थिति में है।
57.9% विरोधी एथेनॉल वाला पेट्रोल गाड़ी में नहीं डलवाना चाहते
विपक्ष के समर्थकों में इसका विरोध और भी ज्यादा देखने को मिला। केंद्र की एनडीए सरकार के विरोधी 57.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल के खिलाफ हैं। दूसरी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े 55 प्रतिशत वोटरों ने भी एथेनॉल वाला पेट्रोल नहीं भराना चाहते। कुल मिलाकर, 55.1 फीसदी लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करना पसंद नहीं करेंगे, जबकि सिर्फ़ 17.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया।
गडकरी के चैलेंज के बाद सामने आया सी-वोटर का सर्वे
यह सर्वे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के उस चैलेंज के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल की आलोचना करने वालों से एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल से नुकसान उठाने वाले कम से कम एक व्यक्ति को सामने लाने को कहा था। विरोध करने वालों ने यह चैलेंज स्वीकार करते हुए कहा कि वे एक नहीं, बल्कि कई ऐसे लोगों को सामने लाएंगे जिनका दावा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों को नुकसान पहुंचा है।
एथेनॉलः CIC ने पेट्रोलियम मंत्रालय को दिया ये आदेश
इस बीच, केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने पेट्रोलियम मंत्रालय की योजना इकाई पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) को पेट्रोल उत्पादन और आयात, एथेनॉल खरीद एवं मिश्रण तथा पेट्रोलियम क्षेत्र के मुनाफे से संबंधित ऐतिहासिक आंकड़े सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश एक आरटीआई आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने के लिए दिया गया, क्योंकि आयोग ने पाया कि पीपीएसी ने केवल ‘आंशिक सूचना’ उपलब्ध करायी।
क्या क्या जानकारी देने का दिया निर्देश
सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह सेठी ने पीपीएसी को एथेनॉल मिश्रण संबंधी अधिसूचनाओं के लिए वेब लिंक उपलब्ध कराने, एथेनॉल आपूर्तिकर्ताओं से संबंधित सवाल को संबंधित लोक प्राधिकरण को हस्तांतरित करने और कंपनी-वार पेट्रोल आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी के अनुरोध का जवाब देते समय आरटीआई अधिनियम के तहत उचित छूट का उल्लेख करने का भी निर्देश दिया।
आरटीआई आवेदन में भारत के पेट्रोल और इथेनॉल कार्यक्रम से संबंधित छह प्रकार की सूचनाएं मांगी गई थीं। इनमें ईंधन उत्पादन और आयात, इथेनॉल मिश्रण मानदंड, इथेनॉल की खरीद और खपत, आपूर्तिकर्ताओं का विवरण तथा पेट्रोल बिक्री से होने वाला मुनाफा शामिल था।
लेखक के बारे मेंवरुण शैलेशवरुण शैलेश, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। वह अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स से जुड़े और होमपेज टीम का हिस्सा बने। वह शिफ्ट और होमपेज की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ न्यूज की प्रभावी प्लानिंग, खबर लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उन्हें प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल न्यूज टीम में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान डेस्क के साथ रिपोर्टिंग का अनुभव भी हासिल किया। सियासी गलियारे में होने वाली हलचलों, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों, समाज में सांस्कृतिक बदलावों पर नजर रखते हैं। करंट अफेयर्स को लेकर सचेत रहने वाले वरुण शैलेश रोजाना खबरों को विभिन्न एंगल से प्रस्तुत करने को लेकर एक्टिव रहते हैं। वैश्विक राजनीति का देश की सियासत पर पड़ने वाले असर, जियोपॉलिटिकल सिचुएशन के लिहाज से खबरों के प्रजेंटेशन में महारत रखते हैं। वरुण शैलेश न्यूज को चैलेंज की तरह लेते हैं और खबरों की दुनिया को एन्जॉय करते हैं।
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वरुण शैलेश ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से सोशियोलॉजी (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया। फिर भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर की डिग्री भी हासिल की।… और पढ़ें