जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत अपनी पुरानी और स्पष्ट नीति पर कायम है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत होर्मुज मार्ग के इस्तेमाल के लिए किसी भी पक्ष को कोई शुल्क नहीं देगा।
अधिकारियों का कहना है कि जब पहले ईरान की ओर से जहाजों पर शुल्क वसूलने की बात कही गई थी, तब भी भारत का यही रुख था और अब भी इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
ट्रंप बोले- 20% देना होगा टैक्स
भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का संचालन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत होना चाहिए और सभी देशों के वाणिज्यिक जहाजों को निर्बाध एवं सुरक्षित आवाजाही का अधिकार मिलना चाहिए। यह स्थिति ऐसे समय बनी है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका अब होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा संभालेगा और वहां से गुजरने वाले कार्गो पर 20 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा।
भारत लगातार रख रहा नजर
हालांकि भारत ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पश्चिम एशिया में 1 मार्च, 2026 से शुरू हुए संघर्ष के बाद गठित अंतर-मंत्रालयी समिति पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह का ट्रांजिट शुल्क भारत के लिए स्वीकार्य नहीं होगा। इस बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति रणनीति में भी बड़ा बदलाव किया है।
भारत की निर्भरता
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले तक भारत के करीब 60 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होर्मुज मार्ग से होती थी, जो अब घटकर लगभग 20 प्रतिशत रह गई है। भारत ने रूस समेत अन्य स्रोतों से तेल आयात बढ़ाया है। यह तेल यूरोप के रास्ते स्वेज नहर होकर भारत पहुंच रहा है।
प्रतिबंध का असर भारत पर सीमित
निजी एजेंसी केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज अब जोखिम वाले क्षेत्रों से बचने के लिए लंबे लेकिन सुरक्षित समुद्री मार्ग अपना रहे हैं। इससे न केवल तेल आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से भविष्य में होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर किसी भी शुल्क या प्रतिबंध का असर भारत पर सीमित रहेगा।
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ट्रंप बोले- अमेरिका बनेगा होर्मुज का गार्जियन
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका के साथ हुआ एक “तय समझौता” तोड़ दिया है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह समझौता कब और किस विषय पर हुआ था। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि अमेरिका अब स्वयं को “गार्जियन आफ द होर्मुज स्ट्रेट” के रूप में स्थापित करेगा। इसके बदले इस मार्ग से गुजरने वाले सभी माल पर सुरक्षा और निगरानी की लागत की भरपाई के लिए 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि ये मार्ग पूरी तरह खुला है और आगे भी खुला रहेगा, चाहे ईरान इसका समर्थन करे या नहीं। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका अब “ईरानी नाकेबंदी” फिर से लागू करेगा, जिसके तहत केवल ईरान के जहाजों और उसके ग्राहकों के जहाजों को आने-जाने से रोका जाएगा।
ईरान के संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स ने कहा कि स्ट्रेट आफ होर्मुज के प्रबंधन में अमेरिकी दखल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि अमेरिका वैकल्पिक समुद्री मार्ग बनाने की कोशिश करता है तो उसे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए बताया कि होर्मुज और ट्रांजिट रूट के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत हुई है, लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
अमेरिका-ईरान ने एक-दूसरे पर बरसाए बम, मिसाइलें और ड्रोन
न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, सेंटकाम ने बताया कि रविवार से सोमवार के बीच ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार, मिसाइल व ड्रोन ठिकानों तथा फास्ट अटैक बोट्स पर व्यापक हमले किए गए। इन अभियानों में लड़ाकू विमान, युद्धपोत, हमलावर ड्रोन और पहली बार समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में करीब 20 लोगों की मौत हुई है।
ईरानी अधिकारियों ने बताया कि होर्मोजगान, खुजेस्तान, मरकजी, सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांतों में अमेरिकी हमले हुए। केश्म द्वीप, सिरिक, अबादान और बंदर अब्बास में भी मिसाइल हमलों और विस्फोटों की खबरें आईं।
एपी के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में आइआरजीसी ने बंदर अब्बास के पास एक अमेरिकी ड्रोन मार गिराने का दावा किया। आइआरजीसी ने यह भी कहा कि दो जहाज ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर अनधिकृत मार्ग से होर्मुज पार करने की कोशिश कर रहे थे। चेतावनी के बावजूद नहीं रुकने पर एक जहाज को ड्रोन हमले से निष्क्रिय कर दिया गया। इसके बाद ईरान ने खाड़ी के छह देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया।
सरकारी नूर न्यूज के अनुसार, आईआरजीसी ने जार्डन, बहरीन और कुवैत में तीन चरणों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। दावा किया गया कि कुवैत के दो एयरबेस पर पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, ईंधन टैंक और रणनीतिक रडार को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि अमेरिकी सेंटकाम ने इन दावों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
पहले चरण में जार्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर हमले का दावा किया गया, जबकि जार्डन ने कहा कि उसने चार ईरानी मिसाइलें मार गिराईं। दूसरे चरण में बहरीन के शेख ईसा एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही गई, लेकिन बहरीन ने सभी हमलों को विफल करने का दावा किया। तीसरे चरण में कुवैत के अली अल-सलेम और अहमद अल-जाबेर एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया गया।
आइएईए को परमाणु केंद्रों पर जाने की अनुमति नहीं
रॉयटर्स के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि फारस की खाड़ी में तनाव के लिए अमेरिका जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जिन परमाणु केंद्रों पर 2025 में अमेरिकी हमले हुए थे, वहां अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) के निरीक्षकों को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। माना जाता है कि ईरान का अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार इन्हीं केंद्रों में मौजूद है।
ट्रंप-नेतन्याहू समेत 12 नेता ‘रिवेंज लिस्ट’ में
एएनआई के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में 12 अंतरराष्ट्रीय नेताओं की एक ‘रिवेंज लिस्ट’ जारी की। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सेंटकाम कमांडर ब्रैड कूपर, इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी, इजरायली सेना प्रमुख एयाल जामिर और विदेश मंत्री गिदियोन सार के नाम शामिल हैं।
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