पाकिस्तान की राह पर टीम इंडिया, दोस्ती, पर्ची वाले खिलाड़ियों का हो रहा सेलेक्शन? इस कारण डूबी नैया


भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा प्रदर्शन से पूरा देश खफा है. हर कोई यह जानना चाह रहा है कि आखिर लगातार दो वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम अचानक एक जीत के लिए कैसे तरस रही है? ब्रिटेन दौरे पर टीम इंडिया ने कुल सात टी20 मैच खेले, जिसमें एक मैच बारिश से रद्द हुआ, और छह मुकाबलों में भारत को हार का सामना करना पड़ा. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार टीम इंडिया लगातार छह टी20 मैच हारी है. ऐसे में सवाल उठना जायज़ है कि इन हार का जिम्मेदार कौन है? 

क्या पाकिस्तान की राह पर चल रही टीम इंडिया? 

क्रिकेट के जानकार यह बात समझेंगे कि जो हाल अभी टीम इंडिया का है, वैसा ही हाल पाकिस्तान का रहता है. पाकिस्तान में कई बार ऐसा देखा गया है कि कप्तान और कोच अपने करीबी खिलाड़ियों को नेशनल टीम में जगह देते हैं. घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को इग्नोर कर दिया जाता है, और कप्तान व कोच के करीबियों को टीम में शामिल कर लिया जाता है. कुछ इसी तरह मौजूदा टीम इंडिया के साथ हो रहा है. भारत की टी20 टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके सेलेक्शन पर सवाल उठ रहे हैं. फैंस टीम इंडिया में सेलेक्शन का पैमाना भी जानना चाह रहे हैं. 

वाशिंगटन सुंदर, प्रसिद्ध कृष्णा और रवि बिश्नोई जैसे खिलाड़ी लगातार खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम इंडिया में कैसे बने हुए हैं. सूर्यांश शेडगे को किस आधार पर टीम इंडिया में शामिल किया गया? इसके अलावा हर्षित राणा, जो चोटिल होने की वजह से पूरे आईपीएल से बाहर रहे, आखिर उन्हें बिना घरेलू क्रिकेट खिलाए, राष्ट्रीय टीम में क्यों शामिल किया गया? वरुण चक्रवर्ती को लेकर भी यही सवाल उठता है. क्या हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर इन सवालों का जवाब दे पाएंगे?

सूर्यांश शेडगे कप्तान श्रेयस अय्यर के करीबी माने जाते हैं. दोनों की डोमेस्टिक टीम सेम है. साथ ही दोनों आईपीएल में भी पंजाब किंग्स के लिए खेलते हैं. ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या 140 करोड़ की आबादी वाले देश में भारत की राष्ट्रीय टीम में खेलना इतना आसान हो गया है? 

क्या इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उनके घर पर खेलने के लिए अनुभवी खिलाड़ियों को टीम में शामिल नहीं करना चाहिए था. जसप्रीत बुमराह के ना रहने पर मोहम्मद सिराज, भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी में से किसी अनुभवी गेंदबाज को टीम में जगह क्यों नहीं दी गई. स्पिन विभाग में भी ऐसा ही हुआ. कुलदीप यादव को इग्नोर कर दिया गया. उन खिलाड़ियों को टीम इंडिया में जगह क्यों नहीं दी गई, जो पहले इंग्लैंड में खेल चुके हों, जिन्हें वहां की परिस्थितियों के बारे में पता हो. 

किसी क्लब जैसी लगी टीम इंडिया

इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज हो, या उससे पहले आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज. दोनों ही सीरीज में भारतीय टीम कोई छोटे से क्लब जैसी टीम लगी. एकदम औसत दर्जे की फील्डिंग. भारतीय खिलाड़ियों ने बेहद आसान कैच छोड़े. आसानी से विपक्षी बल्लेबाजों को एक रन को दो रन में कंवर्ट करने दिया. बाउंड्री पर खराब फील्डिंग की, जिससे एक या दो रन चौके में तब्दील हुआ. वहीं इंग्लैंड और आयरलैंड, दोनों ने दमदार फील्डिंग की, और नतीजे उनके पक्ष में गए. 

संजू सैमसन, वो बल्लेबाज, जिसने आपको अकेले दम पर वर्ल्ड कप जिताया, आखिर उसे क्यों टीम से बाहर किया गया? सोशल मीडिया का प्रेशर राष्ट्रीय टीम पर क्यों हावी हो गया? बल्लेबाजों के क्रम में क्यों इतने बदलाव किए गए? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब हर भारतीय जानना चाहता है. 

यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि भारतीय टीम सिर्फ फ्लैट पिचों की आदी हो गई है. जहां भी गेंद टर्न होती है, या फिर तेज गेंदबाजों को बाउंस मिलता है, भारतीय बल्लेबाज फेल हो जाते हैं. क्या सेलेक्टर्स और टीम मैनेजमेंट को भारतीय बल्लेबाजों की ये कमजोरी नहीं पता थी. आखिर इसे ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों का सेलेक्शन क्यों नहीं किया गया. 

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