स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है, जो 2010 के बाद उनका पहला सेमीफाइनल है। यूरो 2024 चैंपियन स्पेन के युवा स्टार लामिन यामल शानदार फॉर्म में हैं और उन्होंने फ्रांस को खुली चुनौती दी है।

लामिन यामल और युवाओं का बेखौफ अंदाज
स्पेन की सबसे बड़ी ताकत उनके युवा खिलाड़ियों का निडर और आक्रामक प्रदर्शन है। 19 साल के स्टार फॉरवर्ड लामिन यामल इस टूर्नामेंट में विपक्षी डिफेंस की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बेल्जियम के खिलाफ मैच जिताऊ खेल दिखाकर प्लेयर ऑफ द मैच बने यामल ने सेमीफाइनल से ठीक पहले विरोधी टीम फ्रांस को खुली चुनौती दे दी है। यामल का साफ कहना है, ‘स्पेन किसी से नहीं डरता, अगर किसी को डरना चाहिए तो वह फ्रांस की टीम है।’ यह बुलंद आत्मविश्वास दिखाता है कि स्पेनिश युवा खिलाड़ी किसी भी बड़े मंच के दबाव में बिखरने वाले नहीं हैं।
इसके साथ ही स्पेन ने अपनी पारंपरिक गेंद पर पोजेशन बनाए रखने की शैली को आधुनिक तेज आक्रमण के साथ बखूबी जोड़ा है। रॉड्रि और पेड्री जैसे विश्व स्तरीय खिलाड़ियों से सजी स्पेन की मिडफील्ड पूरे मैच के टेम्पो को अपने इशारों पर नचाती है। बेल्जियम के खिलाफ भी स्पेन ने 58% बॉल पजेशन के साथ मैच को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में रखा। इस समय विपक्षी टीमों के लिए स्पेनिश खिलाड़ियों के पैरों से गेंद छीनना सबसे मुश्किल काम बन चुका है।
अभेद्य डिफेंस की दीवार और जादुई सुपर-सब की गहराई
टूर्नामेंट में स्पेन का डिफेंस अब तक एक मजबूत चट्टान की तरह खड़ा रहा है। क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम के चार्ल्स डी केटेलेरे द्वारा किए गए एकमात्र गोल से पहले तक, स्पेन ने इस पूरे वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं खाया था। पूरे 6 मैचों में सिर्फ 1 गोल गंवाना यह साबित करता है कि उनके डिफेंस को भेदना नामुमकिन के बराबर है। इसके अलावा स्पेन की टीम केवल अपने शुरुआती 11 खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं है। मिकेल मेरिनो जैसे बेहतरीन सब्सटिट्यूट ने पुर्तगाल के खिलाफ राउंड ऑफ 16 और फिर बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 88वें मिनट में निर्णायक विनर गोल दागकर यह साबित किया है कि स्पेन के पास आखिरी मिनटों में पासा पलटने वाले जादुई खिलाड़ी मौजूद हैं।
हालिया इतिहास में स्पेन का पलड़ा भारी
सेमीफाइनल में स्पेन का सामना मजबूत फ्रांस से डलास स्टेडियम में होना है। हालिया बड़े मुकाबलों का इतिहास देखें तो स्पेन का पलड़ा बहुत भारी रहा है। यूरो 2024 के सेमीफाइनल में स्पेन ने फ्रांस को 2-1 से मात दी थी, वहीं नेशंस लीग 2025 के सेमीफाइनल में भी स्पेन ने फ्रांस को 5-4 से हराया था। इन आंकड़ों को देखते हुए स्पेनिश टीम मनोवैज्ञानिक रूप से भी फ्रांस पर हावी है। इसके अलावा साल 2010 में जब स्पेन की टीम सेमीफाइनल में पहुंची थी, तब उनकी टीम ने चैंपियन भी बनी थी। यह पहला मौका था जब स्पेन ने फीफा वर्ल्ड कप का खिताब जीता था। ऐसे में स्पेन का सेमीफाइनल में पहुंचा सिर्फ फ्रांस ही नहीं अर्जेंटीना और इंग्लैंड के लिए भी खतरे की घंटी है।
