जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बिहार में दूसरे राज्यों से कटकर आ रहे तत्काल आरक्षण टिकटों को लेकर रेलवे ने सख्त रुख अपनाया है।
पवन एक्सप्रेस में टेंपरिंग किए गए तत्काल टिकट पर अलग-अलग स्टेशनों से 12 यात्रियों के पकड़े जाने के बाद समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा के निर्देश पर पूरे रैकेट की निगरानी व जांच के लिए विशेष मानीटरिंग सेल गठित किया है।
पवन एक्सप्रेस में समस्तीपुर व सोनपुर मंडल से स्पेशल एस्क्वाड टीम गठित की गई है। इसके अलावा अन्य ट्रेनों में भी अलग-अलग एस्क्वाड टीम जांच कर रही हैं।
मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर ट्रेन में इसी तरह के कुछ संदिग्ध टिकटों पर सफर करने का पता चलने पर सोनपुर कंट्रोल को सूचना दी गई, लेकिन जांच में सही पाए जाने पर सभी यात्रियों को छोड़ दिया गया।
दूसरे जोन से आने वाले तत्काल टिकटों की हो रही विशेष जांच
रेल अधिकारियों के अनुसार मानीटरिंग सेल को दूसरे रेलवे जोन से जारी तत्काल टिकटों की पड़ताल, संदिग्ध बुकिंग पैटर्न की पहचान व टिकट दलालों के संगठित नेटवर्क का पता लगाने की जिम्मेदारी एस्क्वाड टीम को सौंपी गई है।
जांच के दौरान टिकट बुकिंग का स्थान, यूजर आइडी, आइपी एड्रेस, एजेंट कोड, भुगतान का माध्यम व टिकट जारी करने वाले केंद्र का मिलान किया जा रहा है। इसमें जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां आरपीएफ व वाणिज्य विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।
जितना चाहोगे उतना तत्काल कंफर्म टिकट देंगे…
मुजफ्फरपुर । पवन एक्सप्रेस से हाजीपुर में टेंपरिंग तत्काल टिकट के साथ पकड़े गए यात्रियों से जब्त तीन मोबाइल अब पूरे रैकेट का सबसे बड़ा सुराग बनने वाले हैं।
जांच एजेंसियां इन मोबाइल की काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर), वाट्सएप चैट व अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही हैं। उद्देश्य इस संगठित नेटवर्क में शामिल एक-एक दलाल व उसके संपर्क सूत्र तक पहुंचना है।
वाट्सएप चैट से कई अहम जानकारियां मिली हैं। चैट में टिकट दलाली से जुड़े मैसेज मिले हैं, जिनमें लिखा है, “जितना चाहोगे, उतना कन्फर्म तत्काल टिकट देंगे।” जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे मैसेज से इस बात का साफ संकेत हैं कि गिरोह विभिन्न राज्यों से तत्काल टिकट की व्यवस्था कर मोटी रकम लेकर यात्रियों को उपलब्ध करा रहा है।
रेल एसपी बीणा कुमारी के आदेश पर जांच कर रहे हाजीपुर जीआरपी थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार ने कई जगहों पर छापेमारी की है। उनका मानना है कि मोबाइल के काल रिकार्ड व वाट्सएप चैट के आधार पर टिकट दलालों के बड़े सिंडिकेट तक पहुंचने में सफलता मिल सकती है।
जांच में पता लगाया जा रहा कि टिकट कहां से बुक किए गए, उनकी डिजिटल कापी किसने भेजी, बिहार में कहां-कहां इसका प्रिंट निकाला जा रहा और यात्रियों तक टिकट पहुंचाने का काम किन लोगों ने किया जा रहा। काल डिटेल के आधार पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान की जा रही है और उनसे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।