भारत की UNSC की सदस्यता में किस मुस्लिम देश से भिड़ंत और क्यों राह मुश्किल? ‘मिशन इम्पॉसिबल’ पर एस. जयशंकर – india launches campaign for non-permanent seat at unsc competing from tajikistan


UN सिक्योरिटी काउंसिल की अस्थायी सीट के लिए भारत की कूटनीतिक जंग इस बार एक मुस्लिम देश के साथ है। दोनों ही इस कुर्सी के लिए जोर लगा रहे हैं।जिस देश के साथ भारत का मुकाबला है, उसे मुस्लिम देशों का संगठन OIC भी सपोर्ट कर रहा है।

India And Tajikistan
भारत और ताजिकिस्तान के बीच कूटनीतिक जंग (AI Image)
नई दिल्ली: दुनिया के एक मुस्लिम देश से भारत की भिड़ंत होने वाली है। ये भिड़ंत किसी लड़ाई-झगड़े को लेकर नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अस्थायी सीट को लेकर है। दरअल, साल 2028-29 में यूएनएससी की अस्थायी सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान दोनों ही जोर लगा रहे हैं। इस चुनाव में ताजिकिस्तान को इस्लामिक देशों के संगठन (OIC) का समर्थन हासिल है। इसलिए इस चुनाव में भारत के सामने कड़ा कूटनीतिक मुकाबला खड़ा हो गया है।

एस जयशंकर कर रहे नेतृत्व

बता दें कि 2028 और 29 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के चुनाव साल 2027 में होने जा रहै हैं। इन चुनावों के लिए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर अपने मिशन इम्पॉसिबल पर जुट गए हैं। विदेश मंत्री के नेतृत्व में ही ये राजनयिक अभियान चलाया जा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देशों की यात्रा की है। इसके अलावा कैरेबियाई देशों के साथ भी संपर्क बढ़ाया जा रहा है। ताकी व्यापक स्तर पर भारत के लिए समर्थन जुटाया जा सके।

ताजिकिस्तान से कैसे हैं संबंध

संयुक्त राष्ट्र के इस चुनाव में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इस्लामिक देशों के संगठन OIC खुलकर ताजिकिस्तान का समर्थन कर रहा है। भारत के लिए यह टक्कर चुनौतीपूर्ण हो गई है। हालांकि, ऐतिहासिक तौर पर देखें तो ताजिकिस्तान के साथ भारत के संबंध बेहद करीबी और रणनीतिक रहे हैं। इसमें आतंकवाद विरोधी सहयोग से लेकर रणनीतिक सबंध तक शामिर हैं। हालांकि, कुछ ही समय पहले ताजिकिस्तान के आयनी एयरबेस से भारत की रणनीतिक वापसी भी हुई है।

इन देशों पर देना होगा जोर

  • अमेरिका: भारत के अमेरिका के साथ अच्छे संबंध हैं, इसलिए भारत यूएस को यूएनएससी के चुनाव में समर्थन के लिए अपील कर सकता है।
  • श्रीलंका: भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के लिए भी श्रीलंका अहम है। समय-समय पर भारत श्रीलंका को आर्थिक मदद करता रहता है।
  • फिजी: इस देश की 38 फीसदी जनसंख्या भारतीय मूल की है। इन्हें गिरमिटिया मजदूरों का वंशज माना जाता है। इतना ही नहीं फिजी में हिंदी आधिकारिक भाषा है।
  • ऑस्ट्रिया: भारत और ऑस्ट्रिया के राजनयिक संबंध साल 1949 में ही स्थापित हो गए थे। इतना ही नहीं भारत ने साल 1955 में ऑस्ट्रिया की आजादी के लिए सोवियत संघ के साथ बातचीत में बड़ी भूमिका निभाई थी।

भारत कब-कब रहा अस्थायी सदस्य

बता दें कि भारत अब तक कुल 8 बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है। देश को सबसे पहले UNSC की अस्थायी सदस्यता आजादी के 3 साल बाद 1950 में मिली थी। तब 1950 से लेकर 1951 तक भारत के पास ये कुर्सी रही। इसके बाद पूरे 17 साल के अंतराल के बाद साल 1967 में भारत एक बार फिर यूएन सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बना। इसके ठीक 7 साल बाद यानी साल 1972 में एक बार फिर ये मौका भारत को मिला। इसके ठीक 5 साल बाद फिर यानी 1977 में भारत एक बार फिर अस्थायी सदस्य बना। लेकिन इसके बाद भारत को अस्थायी सदस्यता के लिए 7 साल तक इंतजार करना पड़ा और 1984 को भारत को ये मौका मिला। इसके बाद क्रमश: 1991, 2011 और फिर 2021 में भारत के पास UN में अस्थायी सदस्यता रही।

अक्षय श्रीवास्तव

लेखक के बारे मेंअक्षय श्रीवास्तवअक्षय श्रीवास्तव, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मार्च 2025 में उन्होंने टाइम्स समूह का डिजिटल विंग नवभारत टाइम्स (NBT Digital) ज्वाइन किया। यहां अक्षय न्यूज टीम का हिस्सा हैं और राष्ट्रीय खबरों के साथ-साथ दिल्ली और अपराध से जुड़े समाचारों का संपादन और क्यूरेशन करते हैं। समय-समय पर वह फील्ड रिपोर्टिंग में भी उतरते हैं। अक्षय ग्राउंड पर जाकर खबरों के पीछे छिपी कहानी को निकालने में रुचि रखते हैं। अपने 13 साल के पत्रकारिता के अनुभव में अक्षय ने रिपोर्टिंग के साथ-साथ डेस्क पर भी कई जिम्मेदारियां संभाली हैं। अक्षय ने साल 2019 और 2024 की राजनीति के निर्णायक लोकसभा चुनाव भी कवर किए हैं।

करियर के दौरान अक्षय ने प्रिंट मीडिया में एक लंबी पारी खत्म कर साल 2018 में डिजिटल मीडिया में कदम रखा। यहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता का शुरुआती काम सीखा। इसके बाद वह दैनिक भास्कर के डिजिटल सेक्शन में काम करने लगे। यहां उन्होंने जीके सेक्शन की जिम्मेदारी संभाली। आज तक में कार्य के दौरान अक्षय ने कनमैलियों पर एक एक्सक्लूसिव स्टोरी की, जो चर्चा का विषय रही। नवभारत टाइम्स में वह कफ सिरप पीकर अपने बच्चे गंवाने वाले परिवारों तक पहुंचे और उनका दर्द जाना।

पत्रकारिता का अनुभव
अक्षय का पत्रकारिता करियर हिंदी अखबार दैनिक नव भारत भोपाल के साथ साल 2013 में बतौर ट्रेनी शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश से प्रकाशित राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर में 2014 से 2016 तक उप-संपादक के रूप में कार्य किया। 2016 से 2018 तक अक्षय ने दैनिक हरिभूमि समाचार पत्र में बतौर उप-संपादक काम किया। साल 2018 में दैनिक भास्कर के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद जनवरी 2022 में AajTak डिजिटल के साथ जुड़े और मार्च 2015 तक होम पेज पर अपनी सेवाएं दीं।

अक्षय ने एशिया के पहले पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से बीएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) और एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है। विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह कई प्रतियोगताओं में भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुके हैं।… और पढ़ें