सुप्रीम कोर्ट ने स्टैंडअप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना समेत 5 लोगों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. ये कार्रवाई दिव्यांग लोगों पर किए गए असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े एक मामले में की गई है. कोर्ट ने इन लोगों को गलती सुधारने का मौका देते हुए अपने कार्यक्रम में दिव्यांग लोगों को बुलाने का आदेश दिया था. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
मामले में याचिका दाखिल करने वाली संस्था ने कोर्ट को इस बात की जानकारी दी कि उसके आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है. इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने नाराज़गी जताई. बेंच ने कहा, यह साफ नजर आ रहा है कि समय रैना ने कोर्ट को हल्के में लिया है. उन्होंने आदेश का खुलेआम उल्लंघन किया है. रिकॉर्ड पर कुछ न होने के बावजूद हलफनामा भी दायर कर दिया गया. यह स्थिति की गंभीरता को और बढ़ाने वाली बात है.”
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कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, “अगर आप अपने तौर-तरीके सुधारना नहीं चाहते और समाज की भावनाओं का सम्मान करना नहीं चाहते, तो आपको परिणाम भुगतने होंगे.” इसके बाद कोर्ट ने सभी पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही. कॉमेडियन के वकील ने नरमी बरतने की प्रार्थना की. इसे देखते हुए इस रकम को घटाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी लोग 2 सप्ताह के भीतर जुर्माना जमा करें. कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी कि अगर उसके आदेशों का पालन नहीं किया हुआ, तो जुर्माना बढ़ा कर 30 लाख कर दिया जाएगा.
क्या है मामला?
क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन नाम की संस्था ने रैना और दूसरे कॉमेडियनों पर दिव्यांग लोगों का मज़ाक उड़ाने का आरोप लगाया था. यह भी बताया गया था कि इन लोगों ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के जैसी गंभीर बीमारी के खर्चीले इलाज को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी की. कॉमेडियन समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर कोर्ट के आदेश के मुताबिक व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और अपनी हरकत के लिए खेद जताया.
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क्या था कोर्ट का आदेश?
27 नवंबर 2025 को कोर्ट ने समय रैना से कहा कि वह अपने प्लेटफार्म पर ऐसे दिव्यांग व्यक्तियों को बुलाएं जिन्होंने किसी क्षेत्र में सफलता हासिल की है. इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा. ऐसे कार्यक्रम से जमा राशि का इस्तेमाल दिव्यांग व्यक्तियों के उपचार के लिए हो. कोर्ट ने ऐसा ही निर्देश बाकी कॉमेडियनों को भी दिया था.