पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। पाकिस्तानी सरकार और सेना प्रदर्शनों को कुचलने पर लगी है तो लोग पीछे हटने को तैयार नहीं है।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पीओके के अलग-अलग हिस्सों से हिरासत में लिए गए प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे नेताओं की रिहाई, पुलिसिया दमन रोकने और अपनी 38-सूत्रीय मांगों को लागू करने की मांग की है। इन्हीं मुद्दों बुधवार को मार्च किया जाएगा। ये मार्च ऐसे समय में हो रहा है, जब हालिया झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है और पीओके के चप्पे-चप्पे पर पाकिस्तानी सुरक्षा बल तैनात हैं।
पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा
पीओके में पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। रावलकोट में बड़े पैमाने पर विद्रोह के बीच सरदार अमन खान ने कहा कि पाकिस्तान पीओके को आजाद कश्मीर कहना बंद करे। य कोई विवादित इलाका नहीं है। यह एक ‘ऑक्यूपाइड टेरिटरी’ है, जिस पर पाकिस्तान का गैर-कानूनी कब्जा है।
पीओके का रावलकोट मौजूदा विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बिंदु है। शहर के ईदगाह ग्राउंड में हजारों की संख्या में लोग जुट रहे हैं। यहां से लगातार पाकिस्तानी सेना और सरकार को चुनौती दी जा रही है। पीओके के नेता बार-बार कह रहे हैं कि कश्मीर में अब पाकिस्तानी नेताओं की भारत विरोधी बयानबाजी को नहीं सुना जाएगा।
आंदोलन को कुचलने की कोशिश नाकाम
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मंहगाई और विधानसभा की शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों के मुद्दे पर बीते महीने प्रदर्शन शुरू हुए थे। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना के दमन ने चीजों को बदतर बना दिया है। इससे आंदोलन खत्म होने की बजाय और भड़क रहा है।
पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में आंदोलन बड़ा रूप ले चुका है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेता सीधेतौर पर शहबाज शरीफ और असीम मुनीर को चुनौती दे रहे हैं। इससे घबराई पाकिस्तान सरकार लोगों पर गोलियां चलवा रही है।
