Pok Protest: प्रदर्शनकारी नेताओं और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता पूरी तरह से नाकाम हो गई है। इसके बाद प्रदर्शनकारी संगठन के नेताओं ने एलान किया है कि ‘अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है अब सिर्फ प्रतिरोध होगा’।
हाइलाइट्स
- पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जोरदार प्रदर्शन शुरू
- पीओके की कथित राजधानी की तरह बढ़े प्रदर्शनकारी
- पाकिस्तान असेंबली से कर सकते हैं आजादी की मांग

मौके से आ रही रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बढ़ते तनाव के बीच यूनिफॉर्म पहने सैकड़ों स्कूली बच्चे अपने शिक्षकों और माता-पिता के साथ रावलकोट के ईदगाह मैदान में जमा हो गये हैं। वो सफेद झंडे लहरा रहे हैं और कब्जे वाले इलाके में पाकिस्तानी सेना की बेरहम कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तानी अधिकारियों ने रविवार को चेतावनी दे रखी है कि अगर बच्चों के साथ कोई अप्रिय घटना घटती है तो प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
क्या पाकिस्तान असेंबली से आजादी का ऐलान करेगी JAAC?
JAAC ने आज मुजफ्फराबाद कूच करने का ऐलान कर रखा था और इसीलिए रैली में हजारों लोगों को देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारी अलग अलग क्षेत्रों से मुजफ्फराबाद के लिए मार्च शुरू कर चुके हैं। JAAC ने तीन दिन पहले पाकिस्तान सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था और कहा था कि अगर उसकी मांगे नहीं मानी जाती हैं तो पाकिस्तान असेंबली से आजादी की मांग की जाएगी। पाकिस्तान सरकार ने मांगों को नहीं माना है इसीलिए आज इस बात पर नजर होगी कि क्या JAAC पाकिस्तान असेंबली से आजादी की घोषणा करती है या नहीं?
इस बीच यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया है। इसमें PoK और दुनिया भर में बसे कश्मीरी समुदाय के नेताओं, पत्रकारों और सिविल सोसाइटी के लोगों को संबोधित किया गया। इसका मकसद कब्जे वाले इलाके में पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ से मानवाधिकारों के उल्लंघन, जारी घेराबंदी और शांतिपूर्ण नागरिकों पर की जा रही बेरहम कार्रवाई पर चर्चा की गई है।
UKPNP ने पाकिस्तानी अधिकारियों से मांग की है कि वे तत्काल बेरहम बल प्रयोग, मनमाने ढंग से गिरफ्तारी और लोगों को जबरन गायब करने का सिलसिला बंद करें। हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करें और उन्हें कोर्ट के सामने पेश करें। इसके अलावा 5 जून के बाद मारे गए लोगों के शव बिना किसी शर्त के वापस सौंपना सुनिश्चित करें।
पीओके में ‘आर-पार’ की जंग का एलान
प्रदर्शनकारी नेताओं और पाकिस्तानी प्रशासन के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता पूरी तरह से नाकाम हो गई है। इसके बाद प्रदर्शनकारी संगठन के नेताओं ने एलान किया है कि ‘अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है अब सिर्फ प्रतिरोध होगा’। आंदोलनकारियों ने सरकार से किसी भी तरह के संवाद को बंद करके मुजफ्फराबाद विधानसभा की ओर बढ़ने का फैसला किया है।
भारी सुरक्षा बल और रेंजर्स की तैनाती
प्रदर्शनकारियों के मार्च को मुजफ्फराबाद पहुंचने से रोकने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी है। 17,500 से ज्यादा अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों और अर्धसैनिक बलों (पाकिस्तानी रेंजर्स) को मुजफ्फराबाद और उसके प्रवेश द्वारों पर तैनात किया गया है। मुजफ्फराबाद को जोड़ने वाले सभी मुख्य राजमार्गों और रास्तों को बड़े-बड़े बैरिकेड्स, कटीले तारों और कंटेनरों से ब्लॉक कर दिया गया है।
मार्च से ठीक पहले हिंसक झड़पें और मौतें
आज यानि 15 जुलाई को होने वाले मार्च से ठीक पहले कल (मंगलवार) पुंछ, रावलकोट और सुधनोती जिलों में भारी हिंसा हुई है। रावलकोट बस स्टैंड और सुधनोती में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स ने आंसू गैस के गोले दागे और अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें 8 से 9 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबर है। इसके बाद रैली में और भारी संख्या में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।
पाकिस्तान ने ब्लैकआउट और शहर बंद किया
पाकिस्तान सरकार ने मुजफ्फराबाद पहुंचने वाले रास्तों और उसके करीबी इलाकों में मोबाइल इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई ताकि प्रदर्शनकारी एक-दूसरे से संपर्क न कर सकें। इसके बावजूद अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं ने मुख्य रास्तों पर धरना देकर पाकिस्तान की मुख्य भूमि से जोड़ने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया है। बाजार और परिवहन पूरी तरह से ठप हैं।
इस बार के मार्च की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें स्थानीय महिलाओं और स्कूली बच्चों ने रिकॉर्ड संख्या में हिस्सा लिया है। सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियो में महिलाएं और बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों, भारी टैक्स और आटे-बिजली की महंगाई के खिलाफ नारे लगाते हुए मुजफ्फराबाद की तरफ बढ़ रहे हैं।
