Virtual Magnet Motor: चीन-अमेरिका नहीं कर पाए, भारतीय कंपनी ने बनाई बिना चुंबक वाली मोटर जो चलेगी सॉफ्टवेयर से – indian startup vimag labs virtual magnet motor tech ev news in hindi


 भारतीय कंपनी विमैग लैब्स ने ऐसी मोटर बनाई है, जो बिना चुंबक के काम करेगी।  अभी तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली मोटर में रेयर अर्थ मैग्नेट्स का इस्तेमाल होता था, जिसकी 90% सप्लाई पर चीन का कब्जा है। विमैग लैब्स की मोटर बिजली और सॉफ्टवेयर के सटीक तालमेल के जरिए चुंबक का काम लेगी।

Virtual Magnet Motor
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भारतीय स्टार्टअप ‘विमैग लैब्स’ इन दिनों अपनी खास मोटर को लेकर काफी चर्चा में है। दरअसल इस स्टार्टअप ने ऐसी अनोखी इलेक्ट्रिक मोटर बनाई है, जिसमें किसी तरह की रेयर अर्थ मैगनेट्स का इस्तेमाल नहीं होता। इसकी जगह यह मोटर सॉफ्टवेयर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की मदद से खुद ही मैग्नेटिक फील्ड तैयार करती है।

इस स्वदेशी तकनीक के लिए कंपनी को पांचवां भारतीय पेटेंट भी मिल चुका है। दरअसल यह स्टार्टअप एक ऐसी समस्या का समाधान ढूंढ रही है, जिसने टेस्ला और जीएम जैसी दिग्गज कार कंपनियों को सालों से परेशान किया है। दरअसल अभी तक इलेक्ट्रिक गाड़ियों को चीन से आने वाले खास चुंबकीय तत्वों की जरूरत पड़ती है, जिसे इस कंपनी की तकनीक खत्म कर सकती है।

विमैग लैब्स ने क्या सुलझा लिया है?

विमैग लैब्स ने क्या सुलझा लिया है?
  1. इलेक्ट्रिक गाड़ियों में परमानेंट मैग्नेट मोटर का इस्तेमाल होता है। जिसके लिए रेयर अर्थ मैग्नेट्स की जरूरत पड़ती है। इन खास चुंबकीय तत्वों की सप्लाई को चीन कंट्रोल करता है।
  2. विमैग लैब्स का दावा है कि उन्होंने जो वर्चुअल मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर बनाई है, वह बिना चुंबकों के भी काम कर सकती है। इतना ही नहीं बिना चुंबकों के भी यह मोटर पारंपरिक मोटर के बराबर और कई मामलों में उससे बेहतर परफॉर्मेंस दे सकती है।
  3. रिपोर्ट के मुताबिक इस तकनीक को तैयार करने में इंजीनियरों ने 87,000 से ज्यादा घंटे काम किया है।​

बिन चुंबक कैसे चलेगी मोटर?

बिन चुंबक कैसे चलेगी मोटर?
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक(REF.) इस मोटर की खासियत है कि यह चलने के लिए स्थायी चुंबक पर निर्भर नहीं करेगी।
  • इसकी जगह यह सॉफ्टवेयर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के तालमेल पर काम करेगी।
  • इसमें बिजली के प्रवाह को बेहद सटीक तरह से नियंत्रित किया जाएगा। इसके लिए एडवांस एल्गोरिदम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स का इस्तेमाल होगा। बिजली का यह नियंत्रित प्रवाह बिना किसी असल चुंबक के एक मजबूत और गतिशील चुंबकीय क्षेत्र पैदा करता है।
  • इसके अलावा इस मोटर का डिजाइन ब्रशलेस और स्लिप-रिंग मुक्त होता है। जिससे, घर्षण और टूट-फूट की समस्या नहीं होती।
  • आसान शब्दों में कहें, तो यह एक सॉफ्टवेयर आधारित मोटर है, जो चुंबक का काम बैकएंड पर कोडिंग और बिजली के दम पर कर ले लेती है।

चीन के दबदबे को चुनौती

चीन के दबदबे को चुनौती
  1. गौर करने वाली बात है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए इस्तेमाल होने वाली चुंबकों के रिफाइनिंग और प्रोडक्शन पर 90% से ज्यादा कब्जा चीन का है।
  2. चीन समय-समय पर इन रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर पाबंदियां लगाता रहता है। इससे अमेरिकी और यूरोपीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को गाड़ियों का उत्पादन रोकना पड़ता है।
  3. इन खतरों को देखते हुए दुनियाभर की कार बनाने वाली कंपनियां चीन पर निर्भरता को कम करने के बारे में सोच रही हैं।
  4. ऐसे में विमैग लैब्स की यह तकनीक चीन के एकाधिकार को जबरदस्त चुनौती दे सकती है।

बिना चुंबक वाली मोटर की रेस में और कौन?

बिना चुंबक वाली मोटर की रेस में और कौन?
  1. बिना मैग्नेट वाली मोटर की खोज में विमैग लैब्स अकेली नहीं है। टेस्ला ने 2023 में ही घोषणा कर दी थी कि उनकी अगली मोटर बिना चुंबक के होगी।
  2. इसके अलावा जनरल मोटर्स और होंडा जैसी कंपनियां इसके दूसरे विकल्पों जैसे कि आयरन-नाइट्राइड मैग्नेट और रीसाइक्लिंग पर करोड़ों डॉलर खर्च कर रही हैं।
  3. हालांकि, गौर करने वाली बात है कि भारी मात्रा में निवेश करने के बाद भी कोई भी कंपनी इस तरह की मोटर का बड़े पैमाने पर कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू नहीं कर पाई है।
  4. रिपोर्ट्स के मुताबिक विमैग लैब्स की खास तकनीक शुरुआती टेस्टिंग में काफी शानदार रही है। इसे तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक्सेल जैसी कंपनियों ने पैसा भी लगाया है।
  5. अब बड़ी चुनौती इस मोटर को बड़े पैमाने पर बनाने की है। अक्सर लैब में सफल होने वाले प्रयोग बड़े स्तर पर उत्पादन के दौरान लागत, टिकाऊपन और माइलेज के मामले में पिछड़ जाते हैं। ऐसे में अब कंपनी इसे बड़े पैमाने पर बनाने पर फोकस करेगी।
भव्य भारद्वाज

लेखक के बारे मेंभव्य भारद्वाजभव्य भारद्वाज, टेक और गैजेट्स की दुनिया के एक अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में जुड़े हुए हैं। पिछले 11 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भव्य ने टेक्नोलॉजी, गैजेट्स और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के बदलते परिदृश्य को बहुत करीब से देखा और कवर किया है। इन्होंने जी न्यूज (DNA), इंडिया न्यूज, यूसी न्यूज, ओपो इंडिया और बाइटडांस (टिकटॉक) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहते हुए टेक्‍नोलॉजी को हिंदी भाषा में आम यूजर्स तक पहुंचाया है। इन्‍होंने Google और WhatsApp (Meta) जैसी ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए काम करते हुए तकनीकी बारीकियों और यूजर्स को लेकर अपनी समझ को बेहतर क‍िया है।
एक टेक जर्नलिस्ट के तौर पर भव्य की विशेषज्ञता नए गैजेट्स के रिव्यूज, लॉन्च इवेंट्स और एआई (AI) की दुनिया में हो रहे बदलावों पर है। भव्य AI के बारे में पढ़ने-समझने के साथ उसका इस्तेमाल करके लोगों तक उनके काम की चीजों को पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। साथ ही उनकी पैनी नजर न सिर्फ लेटेस्ट स्मार्टफोन्स पर रहती है, बल्कि वह ऑडियो डिवाइसेस और वियरेबल्स को भी गहराई से परखते हैं। भव्य का हुनर जटिल तकनीकी जानकारियों को आसान और बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम पाठक भी नई तकनीक को आसानी से समझ सकें। भव्य अलग-अलग टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करते हुए लोगों तक आसान भाषा में काम में आने वाले टिप्स और ट्रिक्स पहुंचाने में भी महारत रखते हैं।

भव्य भारद्वाज ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास मीडिया और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक किया है। उन्‍होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें तकनीकी खबरों को तथ्यात्मक और रचनात्मक तरीके से पेश करने की मजबूती देती है।
वह टेक्नोलॉजी को सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स के आधार पर नहीं आंकते, बल्कि इस नजरिए से देखते हैं कि एक यूजर को उसके साथ कैसा अनुभव मिलेगा। वह मानते हैं कि टेक्नोलॉजी का असली मकसद जीवन को सरल बनाना है और यही सोच उनकी टेक्नोलॉजी को बयान करने के तरीके में भी झलकती है।… और पढ़ें