सुक्रांत, जालंधर। फर्जी अधिकारी बन कर लोगों को ठगने वाली एक फिल्म 2005 में आई थी बंटी और बबली, जिसका रिमेक भी 2021 में बना था। उस एक फिल्म से मिला आइडिया, इंटरनेट से तैयार की गई फर्जी पहचान और लोगों के सरकारी नौकरी पाने के सपनों को हथियार बनाकर अनमोल रतन ने ऐसा ठगी का जाल बुना कि वर्षों तक खुद को आइपीएस अधिकारी बताकर लोगों को धोखा देता रहा।
पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब पांच साल पहले उसने फर्जी आइपीएस बनने की योजना बनाई। शुरुआत में उसने इंटरनेट मीडिया पर नकली प्रोफाइल बनाई, फर्जी पुलिस कार्यालय की तस्वीरें अपलोड कीं और अखबारों की नकली कटिंग तैयार कर खुद को बड़े पुलिस अधिकारी के रूप में प्रचारित किया।
उसके एक दोस्त को फतेहगढ़ साहिब में पुलिस ने यातायात नियम तोड़ने के मामले में पकड़ा तो उसने पहली बार आइपीएस बन कर फोन किया तो पुलिस ने दोस्त छोड़ दिया। इसके बाद वह अपने प्रभाव का झांसा देकर लोगों के छोटे-मोटे सरकारी काम करवाने का दावा करता और भरोसा जीतता रहा।
जब लोगों का विश्वास मजबूत हो गया तो उसने पंजाब पुलिस में डीएसपी, इंस्पेक्टर और हवलदार तक भर्ती कराने के नाम पर लाखों रुपये वसूलने शुरू कर दिए। शाहकोट पुलिस की जांच में अब तक 31.50 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि यह सिर्फ शुरुआत है।
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लैपटॉप, मोबाइल, फर्जी आइडी कार्ड और नकली दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच के साथ बैंक खातों, काल रिकार्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस फर्जी आइपीएस का नेटवर्क जालंधर तक सीमित नहीं, बल्कि कई अन्य जिलों और राज्यों तक फैला हो सकता है।
ऐसे आया फर्जी आइपीएस बनने का आइडिया
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि अनमोल रतन ने करीब पांच वर्ष पहले फिल्म बंटी और बबली देखने के बाद फर्जी आइपीएस अधिकारी बनने का प्लान बनाया।
फिल्म में उसने देखा कि एक व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर लोगों पर रौब जमाता है और अपने काम निकलवा लेता है। यहीं से उसके दिमाग में यह विचार आया कि यदि वह खुद को आइपीएस अधिकारी साबित कर दे तो लोग बिना जांच-पड़ताल उसके झांसे में आ जाएंगे। इसके बाद उसने इंटरनेट की मदद से अपनी नकली पहचान तैयार करनी शुरू कर दी।
इंटरनेट बना सबसे बड़ा हथियार
सबसे पहले उसने सोशल मीडिया पर खुद को आइपीएस अधिकारी बताने वाली प्रोफाइल बनाई। इसके बाद फर्जी पुलिस कार्यालय की तस्वीरें तैयार कर इंटरनेट पर अपलोड कीं। इतना ही नहीं, उसने नकली अखबारों की कटिंग भी बनाईं, जिनमें खुद को बड़े पुलिस आपरेशन और गैंगस्टरों से पूछताछ करने वाला अधिकारी दिखाया गया। इन पोस्टों का मकसद सिर्फ लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि वह पंजाब पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी है।
पहले छोटे काम किए, फिर करोड़ों के सपने बेचने लगा
शुरुआत में अनमोल लोगों के छोटे-छोटे सरकारी काम करवाने का दावा करता था। पुलिस की फर्जी पहचान का रौब दिखाकर वह लोगों पर रौब झाड़ने लगा और छोटे मोटे काम करने के लिए सरकारी दफ्तरों में फोन करता और उन से मामूली रकम लेता था।
जब लोगों का भरोसा उस पर बढ़ने लगा तो उसने सरकारी नौकरियां दिलाने का खेल शुरू कर दिया। वह खुद को बड़े अधिकारियों से सीधा संपर्क रखने वाला आइपीएस बताकर डीएसपी, इंस्पेक्टर और हवलदार तक भर्ती करवाने का दावा करने लगा।
स्टेटस सिंबल बना ”फर्जी आइपीएस”
जांच में सामने आया है कि समय के साथ अनमोल ने अपनी फर्जी पहचान को ही अपना स्टेटस सिंबल बना लिया। वह लोगों की लग्जरी गाड़ियों में घूमता, अच्छे कपड़े पहनता और खुद को प्रभावशाली अधिकारी की तरह पेश करता था। लोगों को लगता था कि वह वास्तव में बड़ा पुलिस अधिकारी है। इसी छवि का फायदा उठाकर वह लोगों को धोखा देता रहा।
परिवार को भी बना लिया नेटवर्क का हिस्सा
पुलिस जांच में पता चला है कि अनमोल ने अपनी शादी भी खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर की। बाद में पत्नी मनदीप कौर को भी इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल कर लिया। पिता बलजीत सिंह भी लोगों के सामने बेटे को आइपीएस अधिकारी बताकर उसकी बात पर भरोसा दिलाते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी का साला भी इस नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जिसकी तलाश जारी है।
अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
- क्या अनमोल ने केवल जालंधर में ही लोगों को ठगा या अन्य जिलों में भी नेटवर्क फैला रखा था?
- फर्जी आइडी कार्ड, अखबारों की कटिंग और दस्तावेज किसने तैयार किए?
- सोशल मीडिया पर फर्जी पहचान बनाने में क्या कोई और भी शामिल था?
- नौकरी दिलाने के नाम पर अब तक कितने लोगों से ठगी की गई?
- ठगी की कुल रकम कितनी है और पैसा किन-किन संपत्तियों में लगाया गया?
पुलिस को और पीड़ितों की तलाश
थाना प्रभारी अमन सैनी ने बताया कि अनमोल रतन, उसकी पत्नी मनदीप कौर और पिता बलजीत सिंह को जेल भेज दिया गया है। बरामद लैपटॉप, मोबाइल, फर्जी आइडी कार्ड और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही बैंक खातों, काल रिकार्ड और इंटरनेट मीडिया की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के शिकार सिर्फ जालंधर ही नहीं, बल्कि पंजाब के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों में भी हो सकते हैं।
–सुक्रांत