डिजिटल डेस्क, पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
पार्टी के कई प्रमुख चेहरे बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सभी नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
भाजपा में शामिल होने वालों में बिहार के शिक्षा जगत का चर्चित नाम और गणितविद् प्रो. केसी सिन्हा, दीघा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी बिट्टू सिंह और मनेर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी गोपाल सिंह शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव के बीच जन सुराज के प्रमुख चेहरों का भाजपा में जाना प्रशांत किशोर के लिए बड़ा झटका है।
पार्टी जिस समय उपचुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है, उसी दौरान वरिष्ठ नेताओं का साथ छोड़ना उसके लिए चुनौती माना जा रहा है।
शिक्षा जगत का बड़ा नाम हैं प्रो. केसी सिन्हा
प्रो. केसी सिन्हा बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में गणित शिक्षा के क्षेत्र का जाना-पहचाना नाम हैं। उनका जन्म भोजपुर जिले में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने बीएससी और एमएससी की पढ़ाई पूरी की और दोनों परीक्षाओं में स्वर्ण पदक हासिल किया।
इसके बाद वे पटना साइंस कॉलेज में गणित के प्रोफेसर बने। लंबे समय तक अध्यापन के साथ-साथ उन्होंने गणित विषय पर लेखन भी किया।
उनकी लिखी 70 से अधिक पुस्तकें प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। बिहार समेत कई राज्यों के लाखों छात्र उनकी पुस्तकों के माध्यम से पढ़ाई करते हैं।

विधानसभा चुनाव से पहले थामा था जन सुराज का दामन
प्रो. केसी सिन्हा ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की सदस्यता ली थी। पार्टी ने उन्हें पटना की कुम्हरार विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था।
हालांकि त्रिकोणीय मुकाबले में उन्हें जीत नहीं मिली। भाजपा उम्मीदवार संजय कुमार ने चुनाव जीता, जबकि कांग्रेस के इंद्रदीप चंद्रवंशी दूसरे स्थान पर रहे। प्रो. केसी सिन्हा को 15,017 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे।
बांकीपुर उपचुनाव के बीच बढ़े सियासी मायने
प्रो. केसी सिन्हा, बिट्टू सिंह और गोपाल सिंह का भाजपा में शामिल होना बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
राजधानी पटना और आसपास के क्षेत्रों में प्रो. केसी सिन्हा की शैक्षणिक पहचान तथा छात्रों और शिक्षकों के बीच उनकी लोकप्रियता भाजपा के लिए सकारात्मक संदेश देने का काम कर सकती है।
दूसरी ओर, जन सुराज के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक दृष्टि से बड़ा झटका माना जा रहा है। पार्टी अभी बिहार में अपने जनाधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लगातार प्रमुख नेताओं के पाला बदलने से उसकी रणनीति पर असर पड़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।
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