Kudankulam Nuclear Plant Data Leak


  • Hindi News
  • National
  • Kudankulam Nuclear Plant Data Leak | Hackers Expose Blueprints & Records

चेन्नई36 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
तमिलनाडु में स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम। - फाइल - Dainik Bhaskar

तमिलनाडु में स्थित न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम। – फाइल

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक हो गए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है। इनमें पॉवर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की लिस्ट, कंट्रोल रूम और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए।

सर्वर मई में हैक हुआ था, जून में दस्तावेज लीक का दावा किया गया। इसकी जानकारी अब सामने आई है।

तमिलनाडु के कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने माना है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा का सर्वर हैक किया गया। इसकी जानकारी सरकार को दे दी गई है। कंपनी ने यह नहीं बताया कि कौन सा डेटा लीक हुआ।

न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) रिलायंस के साथ मिलकर मामले की समीक्षा कर रहा है। भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम भी इस डेटा लीक की जांच कर रही है।

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट तमिलनाडु में तिरुनेलवेली जिले के कुडनकुलम गांव के पास है।

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट तमिलनाडु में तिरुनेलवेली जिले के कुडनकुलम गांव के पास है।

डेटा लीक कैसे हुआ, 6 पॉइंट में समझें…

  1. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 प्रोजेक्ट का ठेकेदार है।
  2. कंपनी का कुछ डेटा थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा के सर्वर पर मौजूद था।
  3. योट्टा ने सर्वर पर 29 मई 2026 को संदिग्ध गतिविधि देखी। दावा किया कि साइबर अटैक रोक दिया।
  4. जून के अंत में रिलायंस ने योट्टा को बताया कि वर्ल्ड लीक्स नामक हैकर समूह डेटा चोरी का दावा कर रहा है।
  5. डार्क वेब पर करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया गया।
  6. लीक दस्तावेजों में कथित तौर पर ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की जानकारी, निरीक्षण रिकॉर्ड, बैठकों के दस्तावेज की फाइलें शामिल हैं।

डेटा लीक कितना खतरनाक

परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डार्क वेब पर मौजूद ये दस्तावेज अगर असली हैं, तो इनके जरिए कोई हमलावर न्यूक्लियर पावर प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।

डार्क वेब क्या है, जहां डेटा अपलोड किया गया

  • डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउजर (जैसे- क्रोम, एज या सफारी) से नहीं खोला जा सकता। इसे एक्सेस करने के लिए टोर ब्राउजर जैसे विशेष ब्राउजर की जरूरत होती है।
  • यह इंटरनेट का छिपा हुआ हिस्सा है। यहां वेबसाइटें और यूजर अपनी पहचान छिपाकर काम कर सकते हैं। हैक किए गए डेटा, रैनसमवेयर, अवैध खरीद-बिक्री और साइबर अपराध के काम यहां होते हैं।
  • इसलिए जब कोई हैकर डेटा चुराता है, तो वह अक्सर उसे डार्क वेब पर बेचने या सार्वजनिक करने की कोशिश करता है।

प्लांट पर 2019 में भी हो चुका साइबर हमला

साल 2019 में भी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने कहा था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई थी।

न्यूक्लियर पावर प्लांट कैसे काम करता है?

1. यूरेनियम से ऊर्जा बनती है

रिएक्टर में यूरेनियम ईंधन का इस्तेमाल होता है। यूरेनियम के परमाणु टूटने (न्यूक्लियर फिशन) से बहुत अधिक गर्मी पैदा होती है।

2. पानी गर्म होकर भाप बनता है

यह गर्मी पानी को गर्म करती है। पानी भाप में बदल जाता है।

3. भाप टर्बाइन घुमाती है

तेज दबाव वाली भाप टर्बाइन को घुमाती है।

4. टर्बाइन से बिजली बनती है

टर्बाइन से जुड़ा जनरेटर घूमता है और बिजली पैदा करता है।

5. भाप फिर पानी बन जाती है

इस्तेमाल के बाद भाप को ठंडा करके दोबारा पानी बनाया जाता है। यही पानी फिर से रिएक्टर में इस्तेमाल होता है।

——————————-

ये खबर भी पढ़ें…

6 नए न्यूक्लियर प्लांट बिजली की कमी पूरी करेंगे: सबसे ज्यादा पूर्वांचल में बनेंगे

देश में सबसे ज्यादा बिजली की डिमांड यूपी में है। इसको पूरा करने के लिए सरकार 6 न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने जा रही है। इनमें नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) के हिस्से में 3, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) 2 और अडानी ग्रुप 1 पावर प्लांट बना सकते हैं। ये कुल 8400 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट होंगे। पूरी खबर पढ़ें…



Leave a Comment