गणेश व कांतिक ट्रेडिंग की आड़ में ₹100 करोड़ का खेल; DGGI की छापेमारी में दबोचा गया जमशेदपुर का स्क्रैप कारोबारी


जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। फर्जी बिल (Fake Invoices) के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और जीएसटी (GST) का चूना लगाने वाले गिरोह के खिलाफ जांच एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है। 

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने संयुक्त निदेशक अभिनव कुमार के नेतृत्व में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जमशेदपुर के बारीडीह निवासी स्क्रैप कारोबारी अजय शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है।

जांच में करीब 100 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाकर सरकार को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

बुधवार को एमजीएम अस्पताल में मेडिकल जांच कराने के बाद आरोपी को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे घाघीडीह जेल भेज दिया गया है।

डीजीजीआई की अब तक की तफ्तीश में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अजय शर्मा का सीधा संबंध जमशेदपुर के अन्य चर्चित और रसूखदार स्क्रैप व्यापारियों विक्की भालोटिया, शिव देवरा और अमित गुप्ता के सिंडिकेट से है।

गौरतलब है कि ये तीनों बड़े कारोबारी पिछले कई महीनों से करोड़ों रुपये के टैक्स फर्जीवाड़े और फर्जी बिलिंग के आरोप में रांची के होटवार जेल में बंद हैं। 

 

केंद्रीय जांच एजेंसी पिछले काफी समय से इस अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट के नेटवर्क को खंगाल रही थी, जिसमें अब अजय शर्मा की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

 

गुप्त छापेमारी के बाद हुई गिरफ्तारी

खुफिया इनपुट के आधार पर डीजीजीआई की विशेष टीम ने मंगलवार को बारीडीह स्थित अजय शर्मा के दो ठिकानों पर बेहद गोपनीयता के साथ छापेमारी की थी। 

 

इस दौरान अधिकारियों ने भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए। घंटों चली लंबी पूछताछ और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद बुधवार दोपहर टीम ने उसे आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

 

फर्जी फर्मों के जरिए चल रहा था खेल

जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी अजय शर्मा साल 2023 से इस अवैध धंधे में सक्रिय था। वह बिना किसी माल (स्क्रैप) की वास्तविक सप्लाई के, केवल कागजों पर फर्जी बिल जारी कर स्क्रैप का कारोबार दिखा रहा था। इसके लिए उसने मुख्य रूप से दो बोगस फर्में पंजीकृत करा रखी थीं:

  •     गणेश ट्रेडिंग
  •     कांतिक ट्रेडिंग

इन फर्जी फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का हेरफेर किया जा रहा था। डीजीजीआई अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस सिंडिकेट के तार देश के किन-किन अन्य राज्यों और किन बड़े स्टील एवं स्क्रैप कारोबारियों से जुड़े हुए हैं।



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