जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ग्रामीण भारत की खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय मंच प्रदान करने वाला देश का प्रमुख खेल आंदोलन ‘ईशा ग्रामोत्सव’ अब उत्तर भारत के गांवों में भी अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है। सद्गुरु द्वारा स्थापित ईशा आउटरीच के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस वार्षिक ग्रामीण खेल उत्सव के 18वें संस्करण का विस्तार पहली बार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र तक होने जा रहा है।
पुरुषों के लिए वालीबाल और महिलाओं के लिए थ्रोबाल स्पर्धाओं वाली प्रतियोगिता में इस वर्ष देश के 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के लगभग 40 हजार गांवों से 80 हजार से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, जो एक करोड़ रुपये से अधिक की कुल पुरस्कार राशि के लिए मैदान में पसीना बहाएंगे।
इस मंच से पेशेवर खिलाड़ियों को दूर रखा गया: स्वामी पुलका
विशेष कि इस बार प्रतियोगिता में लगभग सात हजार टीमें भाग ले रही हैं, जिनमें करीब 15 हजार महिला खिलाड़ी शामिल हैं।
ग्रामोत्सव के राष्ट्रीय समन्वयक स्वामी पुलका ने बताया कि इस मंच से पेशेवर खिलाड़ियों को दूर रखा गया है ताकि ग्रामीण युवाओं को मौलिक प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिल सके।
प्रतियोगिता तीन स्तरीय प्रारूप (क्लस्टर, डिवीजनल और ग्रैंड फिनाले) में होगी, जिसकी शुरुआत जुलाई के दूसरे सप्ताह से हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में क्लस्टर स्तर के मुकाबले 25-26 जुलाई को लखनऊ, वाराणसी, मुजफ्फरनगर और मेरठ में होंगे। इसके बाद एक व दो अगस्त को गौतम बुद्ध नगर में डिवीजनल चरण के मैच खेले जाएंगे।
इसी तरह हरियाणा में 25-26 जुलाई को पानीपत, करनाल और अंबाला में क्लस्टर मैच होंगे। अगला चरण एक व दो अगस्त को हिसार और कुरुक्षेत्र में होगा, जबकि नौ अगस्त को करनाल में डिवीजनल चरण तय है।
पैरालिंपिक श्रेणी के लिए विशेष पुरस्कार भी निर्धारित
विभिन्न चरणों से गुजरते हुए इस खेल महाकुंभ का ग्रैंड फिनाले छह सितंबर को कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में प्रतिष्ठित आदियोगी की प्रतिमा के समक्ष सद्गुरु की मौजूदगी में आयोजित होगा। ग्रैंड फिनाले की विजेता टीमों (पुरुष व महिला) को पांच-पांच लाख रुपये, उपविजेताओं को तीन-तीन लाख रुपये, तथा तीसरे व चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्रमशः एक लाख और 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा पैरालिंपिक श्रेणी के लिए विशेष पुरस्कार भी निर्धारित हैं।
आयोजकों के अनुसार, केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन संगठन के रूप में मान्यता प्राप्त यह उत्सव केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयोजन ग्रामीण युवाओं को नशे और गरीबी के जाल से निकालकर स्वस्थ जीवनशैली, अनुशासन व सामाजिक सौहार्द की ओर ले जाने का एक बड़ा माध्यम बना है।