अपनी नियमित बिजनेस ट्रिप पर दुबई गए कारोबारी को शायद अंदाजा भी नहीं था कि अगले कुछ दिन उनकी जिंदगी के सबसे भयावह दिन साबित होने वाले हैं। भीलवाड़ा के कारोबारी मुकेश टेलर की किडनैपिंग और फिरौती का मामला सिर्फ एक आम अपराध नहीं, बल्कि विदेश से संचालित हो रहे एक संगठित उगाही नेटवर्क का हिस्सा है। इसमें दुबई और भीलवाड़ा के बीच सक्रिय कई लोगों की भूमिका सामने आई है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में जुटी है।
पुलिस के अनुसार भीलवाड़ा निवासी कारोबारी मुकेश टेलर जून में अपने व्यावसायिक कार्य से दुबई गए थे। एक जुलाई को उनका अपहरण कर लिया गया। आरोप है कि उन्हें एक फ्लैट में 10 दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। पुलिस के अनुसार इसी दौरान उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और 40 लाख रुपये की फिरौती देने का दबाव बनाया गया।
जब कारोबारी ने इतनी बड़ी रकम तुरंत देने में असमर्थता जताई तो आरोपियों ने अपना पूरा फोकस परिवार पर कर दिया। दुबई से सीधे कारोबारी के ससुर गोपाललाल को भीलवाड़ा में फोन किया गया और बताया कि उनके दामाद का अपहरण कर लिया गया है और सुरक्षित रिहाई के लिए 40 लाख रुपये देने होंगे। इसके बाद परिवार हरकत में आया और रुपयों का जुगाड़ किया। पुलिस जांच के मुताबिक भीलवाड़ा में मौजूद आरोपी योगेश मूंदड़ा और राजू पठान 40 लाख रुपये का चेक लेने कारोबारी के घर पहुंचे और भुगतान की पुष्टि होने के बाद ही दुबई में कैद कारोबारी को रिहा कर दिया गया।
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यहीं से आरोपियों की सबसे बड़ी चूक शुरू हुई। उन्हें लगा कि मामला विदेश में हुआ है और पीड़ित वापस आने के बाद भी शायद कानूनी कार्रवाई नहीं करेगा लेकिन भीलवाड़ा लौटते ही मुकेश टेलर सीधे सुभाष नगर थाने पहुंचे और पत्नी के साथ पूरी घटना की रिपोर्ट दर्ज करा दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ना शुरू कीं। सबसे पहले यह पता लगाया कि भीलवाड़ा में फिरौती की रकम किसने ली और उसकी भूमिका क्या थी। जांच की पहली बड़ी कड़ी फाइनेंसर योगेश मूंदड़ा बना। उसकी गिरफ्तारी के बाद मिले इनपुट और तकनीकी साक्ष्यों ने जांच को नई दिशा दी। इसके बाद पुलिस दुबई में कारोबारी के साथ कथित मारपीट और बंधक बनाने में शामिल मोइन खान और वसीम तक पहुंच गई। दोनों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का फोकस उन लोगों पर है, जिन्होंने पूरी साजिश को अंजाम दिया।
पूछताछ में एक और अहम तथ्य सामने आया कि दुबई के जिस फ्लैट में कारोबारी को 10 दिन तक रखा गया, वह संबंध भीलवाड़ा के पूर्व पार्षद और मुख्य आरोपी फजले रऊफ शेख उर्फ लुत्फी का है। इसी आधार पर उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है, ताकि दुबई पुलिस और अन्य एजेंसियों की मदद से उसे गिरफ्तार किया जा सके। वहीं मामले का एक अन्य आरोपी राजू पठान अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
अब पुलिस की सबसे ज्यादा नजर मोइन खान से होने वाली पूछताछ पर है। अदालत ने उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उससे पूछताछ में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह सिर्फ एक कारोबारी से फिरौती वसूलने की वारदात थी या इसके पीछे विदेश में सक्रिय कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसी पूछताछ से यह भी सामने आ सकता है कि इस गिरोह ने पहले भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं।
मामले में फिलहाल तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, दो आरोपी अब भी फरार हैं और जांच दुबई तक पहुंच चुकी है। ऐसे में यह मामला अब सिर्फ अपहरण और फिरौती का नहीं, बल्कि भीलवाड़ा से दुबई तक फैले संभावित नेटवर्क की तह तक पहुंचने बन चुका है।