कर्ज लेकर लगाई मिर्च की फसल, वायरस ने बिगाड़ा खेल, 90 प्रतिशत नष्ट


BARWANI CHILI CROP DESTROYED

कर्ज लेकर लगाई थी मिर्च की फसल (ETV Bharat)

बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी में ग्राम बालकुआं सहित आसपास के क्षेत्रों में इस साल मिर्च की फसल पर वायरस का गंभीर प्रकोप देखने को मिल रहा है. किसानों का कहना है कि जिस फसल से उन्हें लाखों रुपए की आय होने की उम्मीद थी, वही अब उनकी सबसे बड़ी चिंता बन गई है. कई किसानों ने लाखों रुपए खर्च कर मिर्च की खेती की, लेकिन अब फसल तेजी से सूख रही है और पौधे पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर पहुंच गए हैं.

किसानों का आरोप है कि वायरस के साथ-साथ बीज और दवाइयों की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है. उन्होंने शासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने, वैज्ञानिक जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

बड़वानी में मिर्च की फसल पर वायरस का प्रकोप (ETV Bharat)

किसान ने लगाई थी 8 एकड़ में मिर्च की फसल

ग्राम बालकुआं निवासी किसान हीरालाल बरफा ने बताया कि “उन्होंने इस वर्ष 8 एकड़ में मिर्च की फसल लगाई थी. फसल की तैयारी, नर्सरी, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी सहित अब तक करीब 6 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. शुरुआत में फसल अच्छी थी और पूरी तरह तैयार होने लगी थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस बार 20 से 25 लाख रुपए तक का मुनाफा होगा, क्योंकि यहां की मिर्च की अच्छी मांग रहती है और यह राजस्थान के जोधपुर सहित महाराष्ट्र तक भेजी जाती है.

उन्होंने बताया कि अचानक फसल में वायरस का प्रकोप शुरू हो गया. पहले कुछ पौधे प्रभावित हुए, लेकिन देखते ही देखते बीमारी पूरे खेत में फैलने लगी. वर्तमान में करीब 40 से 50 प्रतिशत फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है और यदि यही स्थिति बनी रही तो पूरा खेत बर्बाद हो सकता है. उनका कहना है कि गांव के करीब 20 से 22 किसान इसी समस्या से जूझ रहे हैं.

BARWANI FARMERS WORRIED

किसान परेशान (ETV Bharat)

कर्ज लेकर किसानों ने लगाई मिर्च की फसल

हीरालाल बरफा ने बताया कि खेती करने के लिए उन्हें करीब 5 लाख रुपए का कर्ज लेना पड़ा, जबकि बाकी राशि घर से लगाई गई. अब ऐसी स्थिति बन गई है कि लागत निकालना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते मदद नहीं की तो किसान आर्थिक संकट में आ जाएंगे. अब उम्मीद केवल रबी सीजन की फसल से है, जिसमें चना लगाने की योजना है. उन्होंने बताया कि चने की खेती में भी प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपए तक का खर्च आता है. ऐसे में यदि वर्तमान नुकसान की भरपाई नहीं हुई तो अगली फसल लेना भी मुश्किल हो जाएगा.”

फसल पर वायरस का अटैक

वहीं ग्राम बालकुआं के किसान गजानन खेमा राठौड़ ने बताया कि “उन्होंने 10 एकड़ में पूरी तरह मिर्च की खेती की थी. खेत लीज पर लेकर खेती की गई थी, जिसके लिए उन्हें खेत मालिक को करीब 5 लाख रुपए देना है. इसके अलावा बीज, नर्सरी, खाद, दवा और अन्य कृषि कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए गए. उन्होंने बताया कि मिर्च के पौधे नर्सरी से बुक कर मंगवाए गए थे, व 720 कंपनी का बीज लगाया गया था.

90 PERCENT CHILI CROP DESTROYED

किसानों की मिर्च की फसल नष्ट (ETV Bharat)

फसल में वायरस आने के बाद उन्होंने विभिन्न कंपनियों की दवाइयों का छिड़काव भी कराया, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला. उनका आरोप है कि बीज और दवाइयों की गुणवत्ता भी संदेहास्पद है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

गजानन राठौड़ ने कहा कि वर्तमान में उनकी करीब 90 प्रतिशत फसल वायरस की चपेट में आ चुकी है, जबकि केवल 10 प्रतिशत फसल बची है. जिससे कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलने वाला. उन्होंने कहा कि मिर्च की खेती किसान इसलिए करते हैं, क्योंकि इसमें अन्य फसलों की तुलना में अधिक लाभ मिलता है, लेकिन इस बार पूरी मेहनत और पूंजी बर्बाद हो गई.

बालकुआं क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होती मिर्च और कपास की खेती

अब सबसे बड़ी चिंता कर्ज चुकाने की है. उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित बीज एवं दवा कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.” किसानों का कहना है कि बालकुआं क्षेत्र में मिर्च और कपास की खेती बड़े पैमाने पर होती है. विशेष रूप से मिर्च यहां किसानों की प्रमुख नकदी फसल है, जिससे अच्छी आय होती है, लेकिन इस बार वायरस के कारण अधिकांश किसानों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है. यदि समय रहते राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में किसान खेती से विमुख होने को मजबूर हो सकते हैं.

CHILI CROP DESTROYED

कर्ज लेकर लगाई थी मिर्च की फसल (ETV Bharat)

कृषि विशेषज्ञ क्या बोले

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मिर्च में लगने वाला वायरस मुख्य रूप से सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई), थ्रिप्स और अन्य रस चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैलता है. वायरस लगने पर पौधों की पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं. पौधों की बढ़वार रुक जाती है और धीरे-धीरे पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी का कोई सीधा उपचार नहीं होता, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है.

इसके लिए प्रमाणित बीज और स्वस्थ पौधों का उपयोग, समय-समय पर कीट नियंत्रण, रोगग्रस्त पौधों को खेत से हटाना तथा कृषि विभाग की सलाह के अनुसार दवाइयों का उपयोग आवश्यक है. साथ ही उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराकर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और राहत देने की आवश्यकता बताई.

किसानों ने करी ये प्रमुख मांगें

प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि बालकुआं सहित प्रभावित गांवों का तत्काल सर्वे कराया जाए, वायरस के कारणों की वैज्ञानिक जांच की जाए, नुकसान का आकलन कर किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही बीज एवं कीटनाशक कंपनियों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसानों को इस प्रकार के नुकसान का सामना न करना पड़े.



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