रोहित दो कंपनियों के लिए 16 घंटे काम करते हैं। 7 लाख कमाते हैं। फिर भी भविष्य में आर्थिक संकट आने का डर सता रहा है। जरूरत से ज्यादा काम करने के चलते अपनों को समय भी नहीं दे पाते। सॉफ्टवेयर इंजीनियर की यह कहानी हर स्टूडेंट को पढ़नी चाहिए।
इंजीनियरिंग कर मोटे पैकेज वाली जॉब पाना हर छात्र का सपना होता है। हर कोई सोचता है कि उसे बढ़िया सैलरी मिले ताकि वह अपना अच्छा घर खरीद सके और जीवन में किसी भी जरूरी खर्च के लिए सोचना न पड़े। लेकिन अगर कोई हर महीने 7 लाख रुपये कमाने के बावजूद भी खुद को आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करें तो आप इस स्थिति को क्या कहेंगे? म्यूचुअल फंड एडवाइजर अंशुमान शर्मा के पर्सनल फाइनेंस पॉडकास्ट ‘फिक्स योर फाइनेंस’ के लेटेस्ट एपिसोड में 29 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोहित ने अपने करियर, डर और दबाव को लेकर बात की। करियर को लेकर सता रहे डर और अनिश्चतता के चलते ही वह अपनी उम्र के लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा कमाने के बावजूद दिन में 16 घंटे काम करते हैं। इस इंटरव्यू को लेकर हजारों प्रोफेशनल्स ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
दो कंपनियों के लिए करते हैं काम
रोहित ने बताया कि वह अभी दो टेक्निकल जॉब्स कर रहे हैं- एक दिन में और दूसरी रात में एक अमेरिका की कंपनी के लिए। उन्होंने कहा, “मैं दो कंपनियों के लिए काम कर रहा हूं – एक दिन में और एक रात में। काम का शेड्यूल हर दिन लगभग 16 घंटे का होता है। इतने बिजी रूटीन के कारण किसी और चीज के लिए बहुत कम समय बचता है। उन्होंने माना, “ऐसा बहुत कम होता है कि मैं लोगों को समय दे पाऊं , मैं बस बाहर जाना चाहता हूं।’ काम ने उनकी जिंदगी के लगभग हर पहलू पर कब्जा कर लिया है।
सैलरी मिलने से बहुत पहले ही दबाव शुरू हो गया था
रोहित के लिए लंबे समय तक काम करने की वजह ऐशो-आराम की चाह नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनका परिवार दोनों भाइयों की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकता था। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ एक व्यक्ति ही पढ़ सकता था, इसलिए मेरे भाई ने मुझे पढ़ाया। मुझ पर यह बोझ जैसा है कि अगर मैं यह नहीं कर पाया तो यह परिवार की नाकामी होगी।” यही भावना उनके पूरे करियर के दौरान उनके साथ रही है। आर्थिक रूप से सफल होने के बाद भी वह खुद पर दबाव डालते रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें अपने परिवार के लिए लंबे समय की सुरक्षा बनानी है।
AI का सता रहा डर
दो घर होने, नई कार खरीदने और म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और स्टॉक में 80 लाख रुपये से ज्यादा की बचत करने के बावजूद रोहित का एआई का डर सता रहा है। एआई के बढ़ते प्रचलने के चलते उन्हें भविष्य की चिंता हमेशा सताती रहती है। वे कहते हैं “मैं IT की नौकरी कर रहा हूं और आप जानते ही हैं कि AI का जमाना है। मुझे लगता है कि अगर कुछ गड़बड़ भी हुई, तो मेरी कमाई बस थोड़ी कम हो जाएगी।”
उनकी चिंता टेक्नोलॉजी व आईटी इंडस्ट्री में एआई के चलते आई खलबली को उजागर करती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से हो रहे बदलावों ने ऑटोमेशन, नौकरी के बदलते स्वरूप और लगातार नई स्किल्स सीखने की जरूरत पर बहस छेड़ दी है।
इतना मोटा पैसा जमा तो डर किस बात का
जब उनसे पूछा गया कि अच्छी-खासी बचत होने के बावजूद वे इतने लंबे समय तक काम क्यों करते रहते हैं, तो रोहित ने बताया कि उन्होंने अपने लिए एक बड़ा फाइनेंशियल लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा “अगले पांच-छह सालों में मैं 7-8 करोड़ रुपये जमा करना चाहता हूं। उसके बाद मैं यह नौकरी छोड़ दूंगा और सिर्फ अपनी अमेरिका वाली नौकरी जारी रखूंगा।” उनका कहना है कि आईटी इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बदलाव ला रहा है। अगर भविष्य में नौकरी या आय पर असर पड़ा तो उनकी कमाई काफी घट सकती है।
छात्रों के लिए क्या है सीख
रोहित की कहानी सिर्फ बड़ी सैलरी की नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, करियर के दबाव और भविष्य की अनिश्चितता की भी कहानी है। आज एआई तेजी से मैनपावर की जगह ले रहा है। ऐसे में केवल अच्छी नौकरी मिल जाना ही सफलता की गारंटी नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लगातार नई तकनीक सीखते रहेंगे, अपनी स्किल्स को अपडेट करेंगे और बदलते समय के अनुसार खुद को ढालेंगे, वही लंबे समय तक सफल रहेंगे। इसके साथ ही यह कहानी यह भी सिखाती है कि आर्थिक सफलता केवल ज्यादा कमाई से नहीं आती, बल्कि इस भरोसे से आती है कि आपने अपने भविष्य के लिए पर्याप्त तैयारी कर ली है।
छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि करियर बनाना जरूरी है, लेकिन उसकी कीमत अपनी सेहत, रिश्तों और मानसिक शांति खोकर नहीं चुकानी चाहिए। असली सफलता वही है जिसमें अच्छा करियर, आर्थिक सुरक्षा और संतुलित जीवन—तीनों साथ हों। करियर में सफलता को सिर्फ सैलरी पैकेज के साइज से नहीं मापा जाता। लंबे समय की तरक्की नई स्किल्स सीखने, टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलावों के हिसाब से खुद को ढालने, समझदारी से पैसे मैनेज करने और अपनी शारीरिक व मानसिक सेहत का ध्यान रखने पर भी निर्भर करती है।
रोहित का सफर एक और सच्चाई को भी सामने लाता है। फाइनेंशियल सिक्योरिटी का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि कोई कितना कमाता है, इसका मतलब यह भी है कि वे कितना सुरक्षित महसूस करते हैं। कभी-कभी, सबसे बड़ी चुनौती पैसा कमाना नहीं, बल्कि यह भरोसा करना होता है कि आपने जो बनाया है, वह काफी है। आज के स्टूडेंट्स के लिए शायद यही सबसे बड़ा सबक है।
डिस्क्लेमर : यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पॉडकास्ट बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए बयानों और उससे जुड़ी सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट की गई जानकारी पर आधारित है। इसमें व्यक्त किए गए विचार उस व्यक्ति के हैं और इनका उद्देश्य केवल शिक्षा व तरक्की से जुड़ी जानकारी देना है।