मैनपुरी में सांपों का खूनी खेल: सात महीने में 194 लोगों को डसा, अंधविश्वास में झाड़-फूंक कराना पड़ रहा भारी – Deadly Game of Snakes in Mainpuri 194 People Bitten in Seven Months lclam


यूपी के मैनपुरी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल के आंकड़ों के आधार पर जनवरी 2026 से जून 2026 तक कुल 194 लोगों के सर्पदंश का शिकार होने की आधिकारिक पुष्टि की है. इस अवधि में दो गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया. 

बरसात शुरू होने की वजह से जीव-जंतुओं के बाहर निकलने से अचानक यह संख्या तेजी से बढ़ी है. डॉक्टरों के अनुसार पांच प्रभावित लोगों की जान इलाज में हुई अत्यधिक देरी और परिजनों द्वारा तांत्रिकों से झाड़-फूंक कराने की लापरवाही के कारण चली गई. स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बिना समय गंवाए सीधे सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचने का निर्देश जारी किया है.

जुलाई के शुरुआती दिनों में बढ़ा खतरा

जिले में बरसात शुरू होते ही सर्पदंश के मामलों में अचानक तेजी देखने को मिली है. जिला अस्पताल के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी से 15 जून तक कुल 194 लोग सांप के काटने का शिकार बने. इसमें सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अकेले जुलाई महीने के शुरुआती पंद्रह दिनों के भीतर ही सांप के काटने के 31 नए मामले सामने आ चुके हैं. समय पर अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश मरीजों की जान बचा ली गई है.

झाड़-फूंक के चक्कर में जा रही जान

बकौल चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह- “यदि किसी को सांप काटता है, तो वह अपना समय खराब न करे. वह समय बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, तुरंत मरीज को जिला अस्पताल लेकर आएं.” 

डॉक्टरों का साफ कहना है कि सांप के काटने पर सबसे बड़ी बाधा अंधविश्वास बन रहा है. लोग समय पर अस्पताल आने के बजाय झाड़-फूंक और तांत्रिकों के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिससे जहर शरीर में फैल जाता है. पिछले वर्ष 2025 में जिले में सर्पदंश के 255 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें 2 लोगों की मौत हुई थी.

अस्पताल में पर्याप्त दवाएं और बचाव के उपाय

एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हम लोग आईडीएसपी पोर्टल पर इसकी लगातार समीक्षा करते हैं. मैनपुरी जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एएसवी (एंटी स्नेक वेनम) इंजेक्शन और जरूरी वैक्सीन उपलब्ध हैं. उन्होंने जनता से अपील की है कि बरसात के इस मौसम में लोग रात को टॉर्च लेकर चलें, नंगे पैर न घूमें और अपने आसपास कूड़ा-कचरा इकट्ठा न होने दें. जालीदार दीवारों से भी उचित दूरी बनाकर रखें क्योंकि अक्सर जीव-जंतु ऐसी जगहों पर छिप जाते हैं.

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