अमेरिका और ईरान के बीच जंग गहराने लगी है। इसके चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल के जहाजों का आना-जाना मुश्किल होने लगा है। इस बीच कुछ वैकल्पिक रास्तों को लेकर उम्मीद है। हालांकि ईरान अब इन रास्तों को भी बंद कराने की फिराक में है।
अमेरिका और ईरान के बीच जंग गहराने लगी है। इसके चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल के जहाजों का आना-जाना मुश्किल होने लगा है। इस बीच कुछ वैकल्पिक रास्तों को लेकर उम्मीद है। हालांकि ईरान अब इन रास्तों को भी बंद कराने की फिराक में है। इसके लिए उसने यमन के हूतियों से कह रखा है। यह रास्ता है बाब-मंदाब स्ट्रेट का। ईरान ने कहा है कि अगर ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर अमेरिकी हमले जारी रहते हैं तो हूती मंदाब का रास्ता बंद कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो फिर बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। बता दें कि होर्मुज के बंद होने से दुनिया के एक चौथाई तेल सप्लाई का रास्ता पहले से ही बंद है। अब अगर दूसरा रास्ता भी बंद हुआ तो तेल के दाम आसमान छुएंगे यह बात तय है।
क्या है बाब अल-मंदाब
अरबी में बाब अल-मंदाब का अर्थ होता है, ‘आंसुओं का रास्ता’। इससे ही साबित हो जाता है कि इस रास्ते से गुजरना कितना मुश्किल है। यह 32 किलोमीटर चौड़ा स्ट्रेट है जो अरब प्रायद्वीप को अफ्रीका से अलग करता है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और इसके जरिए हिंद महासागर तक पहुंचता है। बाब अल-मंदाब, ज्वालामुखीय द्वीप पेरीम से दो चैनलों में बंटा है। इसमें से एक है 26 किलोमीटर चौड़ा पश्चिमी चैनल और दूसरा 3 किलोमीटर चौड़ा पूर्वी चैनल।
अल-मंदाब क्यों है अहम
बाब अल-मंदाब की अहमियत इस बात से साबित होती है कि यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। एपी के मुताबिक दुनिया का करीब 12 फीसी व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसमें से ज्यादातर व्यापार सुएज कैनाल और यूरोप की तरफ जाता है। मौजूदा हालात से पहले, यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते से गुजरने वाला कच्चा तेल और पेट्रोलियम लिक्विड्स 2020 में 5.7 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर 2023 में 9.3 मिलियन पहुंच गया था। लेकिन साल 2024 में जब हूती हमलों के चलते, जहाजों को अफ्रीका के रास्ते जाना पड़ातो यह आंकड़ा 4.1 मिलियन बैरल तक गिर गया। यहां तक कि साल 2025 की पहली तिमाही तक भी यह आंकड़ा इसी के करीब रहा।
कहानी में ट्विस्ट
लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट आया, इस साल फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद। इन हमलों के चलते होर्मुज बंद हुआ, जहां से साल 2025 में हर दिन 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई होती रही। लेकिन युद्ध के चलते हालात खराब हुए तो वैकल्पिक रास्तों की तलाश तेज हुई। सऊदी अरब ने अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों से रेड सी के यानबू पोर्ट तक जाने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए सप्लाई जारी रखी। वहीं, बाब अल-मंदाब का रास्ता, एशियाई बाजारों के काम आया, जिनमें प्रमुख रूप से दक्षिण कोरिया और चीन शामिल हैं। तेल यानबू से निकलता है, रेड सी को पार करता है और बाब अल-मंदाब के रास्ते यहां तक पहुंचता है।
तेल सप्लाई में तेजी
इधर बाब अल-मंदाब के रास्ते से तेल सप्लाई में तेजी आई है। यह आंकड़ा 2025 की पहली तिमाही में 3.7 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर 2026 की पहली तिमाही में 5.4 मिलियन हो गया। वहीं एलपीजी, जो 2025 की दूसरी तिमाही में बंद हो गया था, फिर से शुरू हुआ और 2026 की पहली तिमाही में 2.9 बिलियन क्यूबिक फीट प्रति दिन पहुंच गया। हालांकि इस रास्ते में हूतियों का प्रभाव है। यह समय-समय पर इस रास्ते पर दबाव बनाकर अपना काम निकालते रहे हैं। नवंबर 2023 में जब हमास ने इजरायल पर हमला बोला, तब से 2025 की शुरुआत तक हूती ने 100 व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। यह हमले रेड सी कॉरिडोर में किए गए। इन हमलों दो जहाज डूब गए और चार नाविक भी मारे गए थे। यह सभी इजरायल से जुड़े जहाज थे।
हूती हैं ईरान के साथ
हालांकि साल 2025 में अमेरिकी-हूती डील के बाद हूतियों ने लाल सागर में हमले रोक दिए। इस साल इन लोगों ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध में ईरान का साथ दिया। जून में धमकी दी गई थी कि वह इजरायल से जुड़ी जहाजों पर निशाना बनाएंगे। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि हूती सीधे तौर पर ईरान का साथ देने वाले हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के विश्लेषण में बताया गया है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे का साथ देते हैं। जहां तक बाब अल-मंदाब की बात है, यहां पर भी स्थिति तनावपूर्ण है। रॉयटर्स के मुताबिक हूती पहले ही लाल सागर में नौकाओं को निशाना बनाने के लिए मिसाइल और ड्रोन तैनात कर चुके हैं। अब यह आदेशों का इंतजार कर रहे हैं।
होर्मुज और मंदाब दोनों बंद हुए तो क्या
अगर होर्मुज और बाब अल-मंदाब दोनों रास्ते एक साथ बंद हो जाते हैं तो इसका क्या असर होगा? विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा होने पर, एशिया और यूरोप के बीच कॉमर्शियल शिपिंग के लिए केवल एक ही विकल्प बचेगा। यह होगा, गुड होप की नुकीली चोटी के पास से होकर जाने वाला लंबा रास्ता। इस घुमावदार रास्ते का असर पहले ही नजर आने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पोर्टवॉच प्लेटफॉर्म के मुताबिक, पिछले तीन साल में केप के आस-पास कॉमर्शियल तीन गुना से अधिक बढ़ गया है। इस साल एक मार्च से 24 अप्रैल के बीच, यहां से हर रोज औसतन 20 जहाज गुजरे। जबकि साल 2023 में इसी दौरान यह संख्या मात्र छह थी। वहीं, बाब अल-मंदाब के रास्ते का ट्रैफिक 18 से घटकर पांच पर आ गया।
भारत पर क्या असर
अब सवाल उठता है कि बाब अल मंदाब के बंद होने का भारत पर क्या असर होगा? भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ईंधन की कीमतें और उपभोक्ता सामान से जुड़ी चुनौतियां होंगी। जानकारी के मुताबिक बाब अल-मंदाब के रास्ते कच्चा तेल, रिफाइंड पेट्रोलियम, एलएनजी और एलपीजी के साथ-साथ अनाज और स्टील जैसे बल्क कार्गो और कपड़े और खिलौनों के कंटेनर जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान ने होर्मुज को रोकने की अपनी क्षमता दिखा दी है। अब जो संकेत मिल रहे हैं, उससे केवल होर्मुज ही नहीं, बल्कि बाब अल-मंदाब भी खतरे में है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगर ईरान होर्मुज में जहाजों के आवागमन पर बम बरसाना बंद नहीं करता तो परिणाम भयावह होंगे। उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर निशाना साधने की बात कही है। इसके अलावा, पुलों और अन्य सुविधाओं पर भी हमलों की बात कही गई है। वहीं, ईरानी सेना ने जवाब में कहा है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमले किए तो अभी तक जो कुछ सही सलामत बचा है, सब टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर ने भी एक ऐसी ही चेतावनी जारी की है। ईरान की सरकारी एजेंसी इरना के मुताबिक जितने भी एक्सपोर्ट्स कॉरिडोर से अमेरिका और उसके साथियों को मदद मिल रही है, उन सभी पर निशाना साधा जाएगा।