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री-नीट-यूजी में 720 में से 700 अंक लाकर 31वीं रैंक हासिल करने वाले प्रखर बंसल का क्रिकेटर बनने का सपना था। जिला क्रिकेट एकेडमी ज्वॉइन कर ली थी, लेकिन मां की एक इच्छा ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।
मां चाहती थीं कि बेटा देश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज एम्स (दिल्ली) के सामने खड़े होकर सेल्फी ले। मां की इच्छा पूरी करने के लिए कोटा आ गए। हालांकि, वे अभी भी क्रिकेट खेलते हैं। वे बताते हैं कि जब भी उन्हें पढ़ाई से फुर्सत मिलती है या थोड़ा ब्रेक मिलता है तो अपने घर छबड़ा (बारां) लौट जाते हैं और वहां दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलते हैं। क्रिकेट उन्हें मानसिक रूप से तरोताजा रखता है। कोटा में रहकर जहां उन्होंने पूरा ध्यान अपनी ऑफलाइन पढ़ाई और तैयारियों पर लगाया, वहीं घर लौटते ही वह अपनी पसंदीदा पिच पर बल्ला घुमाने से नहीं चूकते। री-नीट पर 15 अंक पर बोले- अच्छा ही हुआ, पहले रैंक कम आती माता पिता दोनों ने कोटा से की कोचिंग प्रखर की इस सफलता के पीछे एक मजबूत मेडिकल बैकग्राउंड भी है। उनके पिता डॉ. एसपी गुप्ता और मां डॉ. मनीषा गुप्ता दोनों ही स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनेकोलॉजिस्ट) हैं और छबड़ा में प्राइवेट अस्पताल चलाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जिस संस्थान एलन से प्रखर ने पढ़ाई की, सालों पहले उनके माता-पिता भी वहीं के स्टूडेंट रह चुके हैं। प्रखर के पिता को आरपीएमटी में 59वीं रैंक मिली थी, वहीं उनकी मां ने सीपीएमटी में 1100 रैंक हासिल की थी। माता-पिता की इस विरासत को प्रखर ने ऑल इंडिया 31वीं रैंक लाकर एक नया मुकाम दे दिया है। प्रखर को मुख्य नीट में 720 में 715 अंक आ रहे थे, लेकिन दुबारा परीक्षा दी तो 700 अंक रह गए। इस पर उसका मानना था कि यह अच्छा हुआ, क्योंेकि पहले पेपर लीक के कारण कई स्टूडेंट्स के 720 अंक आ रहे थे। जिससे रैंक काफी नीचे रहती। इस बार रैंक सही है। शरीर को फिट रखने पर कहना था कि यहां हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की, लेकिन बाहर का खाना नहीं खाया। फास्ट फूड से दूरी रखी। रात 10.30 बजे बाद सो जाता था। सुबह जल्दी उठता था। मोबाइल 2 घंटे चलाता था। बाद में कम कर दिया। दिल्ली से एमबीबीएस करने के बाद प्रखर आगे चलकर कार्डियो थोरेसिक सर्जन बनना चाहते हैं।