
बकरीद का असली नाम ईद-उल-अजहा है.अरबी भाषा में ईद का मतलब त्यौहार होता है और अजहा का मतलब कुर्बानी या बलिदान माना जाता है. इसलिए ईद-उल-अजहा को कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है. वहीं भारत, पाकिस्तान और कुछ दूसरे देशों में इसे बकरीद कहा जाता है. साथ ही माना जाता है कि बकरी या बकरे की कुर्बानी ज्यादा होने की वजह से लोगों ने इसे बकरीद कहना शुरू कर दिया.

इस त्योहार की शुरुआत हजरत इब्राहिम और उनके बेटे हजरत इस्माइल की कहानी से जुड़ी हुई है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा. हजरत इब्राहिम के लिए उनके बेटे हजरत इस्माइल सबसे ज्यादा अजीज थे.उन्होंने अल्लाह के हुक्म को मानते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया. लेकिन जब वे कुर्बानी देने लगे, तब अल्लाह ने उनकी सच्ची नीयत देखकर हजरत इस्माइल की जगह एक दुम्बा भेज दिया. उसी दिन से कुर्बानी की परंपरा शुरू मानी जाती है.
Published at : 26 May 2026 10:53 AM (IST)