किडनी 95% तक खराब होने पर भी नहीं देती संकेत! पूरी डैमेज होने से पहले इन बातों का रखें ध्यान – kidney damage golden rules symptoms prevention kidney ki suraksha ke upaay tvism


Kidney damage symptoms: किडनी को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि अक्सर इसके लक्षण तब दिखाई देते हैं, जब किडनी को नुकसान काफी आगे बढ़ चुका होता है. डॉक्टर्स का कहना है कि किडनी डैमेज 95 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद भी कई बार साफ लक्षण नहीं दिखते इसलिए शुरुआती जांच और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. इसी आधार पर यहां किडनी को सुरक्षित रखने के कुछ तरीके बताए हैं जो खासकर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए भी काफी जरूरी हैं.

चुपचाप बढ़ती है किडनी की बीमारियां

किडनी, शरीर से गंदगी और एक्स्ट्रा पानी को बाहर निकालने का काम करती है लेकिन जब इसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होती है तो शुरुआत में खास संकेत नहीं मिलते.

मायो क्लीनिक और CDC के मुताबिक, शुरुआती क्रोनिक किडनी डिजीज में अक्सर लक्षण नहीं होते इसलिए बीमारी का पता ब्लड और यूरिन टेस्ट से ही चलता है. यही वजह है कि लोग कमजोरी, सूजन या पेशाब में बदलाव आने तक इंतजार कर देते हैं जबकि तब तक नुकसान बढ़ चुका होता है.

शुरुआती संकेत पर रखें नजर

रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने बताया कि पेशाब में प्रोटीन लीकेज को किडनी डैमेज का सबसे शुरुआती संकेत हो सकता है. इसके अलावा पैरों में सूजन, थकान, बार-बार पेशाब आना या कम पेशाब होना, भूख कम लगना और ब्लड प्रेशर का बढ़ना भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं. खासतौर पर जिन्हें डायबिटीज, हाई BP, मोटापा या फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें जांच टालनी नहीं चाहिए.

इन चीजों का रखें ध्यान

डॉक्टरों की सलाह है कि किडनी को बचाने के लिए ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखें, नमक कम लें, पानी सही मात्रा में पिएं, बिना जरूरत दर्द की दवाएं न लें और धूम्रपान से बचें.

इसके अलावा हेल्दी वजन बनाए रखना, एक्टिव रहना, शराब की मात्रा लिमिट करना और समय-समय पर किडनी टेस्ट कराना भी जरूरी है. सीडीसी और NIDDK भी यही कहते हैं कि रिस्क फैक्टर्स को कंट्रोल करके क्रोनिक किडनी डिजीज की रफ्तार धीमी की जा सकती है.

कब कराएं जांच?

यदि किसी को डायबिटीज, हाई BP, किडनी की फैमिली हिस्ट्री या पहले से कोई किडनी प्रॉब्लम है तो रूटीन स्क्रीनिंग करना बेहतर है. मायो क्लीनिक के मुताबिक, किडनी की बीमारी में शरीर कई बार देर से संकेत देता है इसलिए इसका डायग्नोस सिर्फ लक्षणों पर निर्भर नहीं होना चाहिए. डॉक्टर यूरिन टेस्ट, सिरम क्रिएटनाइन और दूसरे किडनी फंक्शन टेस्ट से शुरुआती डैमेज पकड़ सकते हैं.

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य जानकारी और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है. इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या इलाज का विकल्प न समझें.)

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