Neet Controversy:दिग्विजय सिंह ने Pm मोदी के जवाबदेही मॉडल को सराहा, संसदीय समिति के सामने पेश हुए Nta अफसर – Digvijaya Singh Praises Pm Modi Accountability On Neet While Rahul Gandhi Attacks Cbse Fees


नीट विवाद को लेकर राहुल गांधी जहां प्रधानमंत्री के साथ आर-पार के मूड में है, वहीं पार्टी के सबसे मुखर चेहरों में से एक दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री की नीयत और देश की संस्थागत व्यवस्था पर खुलकर भरोसा जताया है। शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह सोमवार को हुए बैठक में साफ कहा कि जब देश का शीर्ष नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के समक्ष परीक्षा प्रणाली को सुधारने की जवाबदेही ले रहा है, तो इस सकारात्मक रुख की सराहना की जानी चाहिए।

सूत्रों ने बताया, बैठक में परीक्षा सुधार, एनटीए की कार्यप्रणाली और नीट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान दिग्विजय ने कहा कि जब सरकार जवाबदेही स्वीकार रही है तो इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। हालांकि, उनकी टिप्पणी का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। वैसे यह पहला अवसर नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से मोदी की किसी विशेषता का उल्लेख किया हो। पिछले वर्ष उन्होंने भाजपा-आरएसएस की संगठनात्मक क्षमता की सराहना करते हुए कहा था कि एक साधारण कार्यकर्ता का प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना संगठन की ताकत को दर्शाता है।

पीएम छात्रों के नाम खुला पत्र लिखें

अध्यक्ष ने कहा, 21 जून की दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों और अभिभावकों में विश्वास जगाना बेहद जरूरी है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान छात्रों के नाम खुला पत्र या फिर संदेश लिखें जिसमें छात्रों को लगे कि वो अकेले नहीं हैं।

राजनीतिकरण पर सवाल तो सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा से जुड़े सदस्यों  ने समिति में शामिल विपक्ष के सदस्यों से पूछा कि नीट यूजी की दोबारा परीक्षा पर राजनीति क्यों हो रही है। परीक्षा के बीच जांच के नाम पर ऐसी बैठकें क्योंकि की जा रही हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, राजनीति  का तो कोई सवाल ही नहीं है। अध्यक्ष ने मंत्रालय और अधिकारियों को 21 जून को होने  वाली दोबारा नीट के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं भी दी हैं।

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पुनर्मूल्यांकन फीस पर राहुल बोले- सीबीएसई के जेबकतरों से सावधान

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया और उसकी फीस को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा को एक सेवा के बजाय एक व्यापार के तौर पर देखा जाता है, तो गलतियां सुधारी नहीं जातीं, बल्कि और बढ़ जाती हैं और इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे अपने वक्त,अपने आत्मविश्वास खोने और अपने भविष्य के रूप में चुका रहे हैं। इसके साथ उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली की वजह से दिक्कतों का सामना कर रहे सीबीएसई छात्रों संग अपनी बातचीत का वीडियो क्लिप भी साझा किया।

इसके साथ उन्होंने लिखा, जेबकतरों से सावधान रहें। आज वे सीधे सीबीएसई के अंदर ही बैठे हैं। सीबीएसई की वजह से गलत नंबर आने पर आपको डिजिटल स्कैन कॉपी पाने के लिए 100 रुपये प्रति विषय, नंबरों की दोबारा गिनती के लिए 100 रुपये प्रति पेपर और पुनर्मूल्यांकन के लिए 25 प्रति सवाल शुल्क देना पड़ता है। अपनी ही आंसर सीट की सही जांच के लिए एक छात्र को 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, जरा सोचिए कि जब करीब 4 लाख चार लाख छात्रों ने ऐसे आवेदन दिए हैं, तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा होगा। 


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