पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल के बागी गुट के विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि आने वाले समय में उनकी ताकत और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उनके साथ विधायकों की संख्या कम नहीं होगी बल्कि लगातार बढ़ती जाएगी। वहीं, भाजपा नेता प्रियंका टिबरेवाल के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे शर्मनाक बताया।
क्या बंगाल में राजनीतिक समीकरण बदलने वाले हैं?
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनकी संख्या लगातार बढ़ेगी और इसमें किसी तरह की कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सब कुछ साफ दिखाई देगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले एक सप्ताह में उनकी किसी सांसद से बात नहीं हुई है। उनके इस बयान को बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कई नेताओं का रुख बदल सकता है।
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प्रियंका टिबरेवाल के विरोध पर क्यों भड़के ऋतब्रत ?
ऋतब्रत बनर्जी ने भाजपा नेता प्रियंका टिबरेवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एंटाली विधानसभा सीट से चुनाव हार चुकी भाजपा उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल ने संदीपन साहा के घर के सामने विरोध प्रदर्शन किया। ऋतब्रत ने इस घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यू मार्केट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। उनके बयान से साफ है कि यह विवाद अब राजनीतिक टकराव से आगे बढ़कर कानूनी स्तर तक पहुंच गया है।
शुभेंदु अधिकारी से ऋतब्रत ने क्या मांग की?
ऋतब्रत बनर्जी ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से अपील की कि वह इस तरह की घटनाओं का समर्थन न करें। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए। ऋतब्रत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी के घर के बाहर प्रदर्शन करना सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होती है। उनके बयान के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल में पहले से ही भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक संघर्ष तेज है। ऐसे में ऋतब्रत बनर्जी के बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। एक तरफ उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ने का दावा किया, वहीं दूसरी तरफ भाजपा पर हमला बोलकर नई बहस छेड़ दी। आने वाले समय में यह विवाद और बढ़ सकता है, क्योंकि दोनों दल लगातार एक-दूसरे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस इस मामले पर आगे क्या रणनीति अपनाते हैं।