पहली नजर में देखें तो ये विकल्प मददगार हो सकते हैं, लेकिन असल में कहानी कुछ और ही है. इससे धीरे-धीरे आपका कर्ज बढ़ता ही जाता है. मिनिमम बकाया राशि वह राशि होता है, जो बैंक आपको भारी जुर्मान से बचने के लिए कहता है, लेकिन यह कुल बकाया राशि का एक छोटा हिस्सा होता है. बाद में बैंक आपके बाकी बचे बकाया राशि पर ब्याज लगता है.